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    दिल्ली विश्वविद्यालय में गूंजा मध्यप्रदेश का सांस्कृतिक गौरव, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदेश से “मध्यांचल उत्सव 2026” बना युवाओं की प्रेरणा का मंच

    मध्यांचल उत्सव 2026:दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकरलाल सभागार में 19 जनवरी 2026 को मध्यांचल स्टूडेंट्स एसोसिएशन, दिल्ली द्वारा “मध्यांचल उत्सव 2026” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक, साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना था। यह उत्सव युवा ऊर्जा और क्षेत्रीय पहचान के संगम के रूप में आयोजित हुआ, जिसमें पारंपरिक कलाओं और लोक विधाओं के साथ विचार विमर्श सत्र भी शामिल रहे।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 11 बजे हुई। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित रहे। उनके साथ श्री श्याम टेलर भाजपा युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष मध्यप्रदेश, श्री अनूप लाठर डीयू कल्चर काउंसिल के अध्यक्ष और जन संपर्क अधिकारी, डॉ. संजय वर्मा दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के ओएसडी और कार्यवाहक निदेशक तथा सुश्री रेखा सक्सेना विभागाध्यक्ष राजनीतिक विज्ञान दिल्ली विश्वविद्यालय भी मौजूद रहीं।

    अतिथियों के स्वागत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश से आए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने युवाओं द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज युवाओं को सबसे अधिक रोजगार देने का काम मध्यप्रदेश कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से खूब पढ़ने, आगे बढ़ने और अपने प्रदेश लौटकर योगदान देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार युवाओं के हर प्रयास में उनके साथ खड़ी है।

    कार्यक्रम के दूसरे सत्र में संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट पवन रिले, प्रसिद्ध कवि सुमित ओरछा और राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल शामिल हुए। इस सत्र में साहित्य, समाज और समकालीन विषयों पर विचार विमर्श हुआ।

    कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। प्रसिद्ध लोकगायिका सुश्री कविता शर्मा, लोकगायक श्री लोकेश बुंदेलखंडी और अभिनेता एवं रंगमंच कलाकार श्री देवेन्द्र अहिरवार ने मध्यप्रदेश की लोककलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।

    इस अवसर पर दिल्ली में रहने वाले मध्यप्रदेश के विद्यार्थी और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे मध्यप्रदेश की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

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