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    धार भोजशाला विवाद: वसंत पंचमी पर पूजा और नमाज साथ-साथ, ड्रोन-AI से हाई अलर्ट

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    मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर में वसंत पंचमी के अवसर पर विशेष व्यवस्था की गई है। एक ओर मां वाग्देवी की पूजा और शोभायात्रा, तो दूसरी ओर दोपहर 1 से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज—दोनों कार्यक्रम एक ही परिसर में हो रहे हैं। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने ड्रोन और AI आधारित निगरानी के साथ हाई अलर्ट लागू किया है।

    शांतिपूर्ण आयोजन की अपील

    कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि परिसर में पूजन-हवन शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्वक चल रहा है। नमाज के लिए समय निर्धारित है और आम जनता से अपील की गई है कि किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं। उन्होंने कहा कि आधिकारिक जानकारी दोपहर 3 बजे के बाद साझा की जाएगी।

    मस्जिद वाले हिस्से पर टेंट

    सुरक्षा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भोजशाला के मस्जिद वाले हिस्से को प्रशासन ने सफेद टेंट से ढकवा दिया है। छत के एक भाग पर भी टेंट लगाया गया है, ताकि किसी तरह का विवाद न हो और दोनों समुदायों की भावनाएं सुरक्षित रहें।

    शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब

    धार के लालबाग से शुरू हुई शोभायात्रा भोजशाला पहुंची। बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष भगवा पताकाएं लेकर शामिल हुए। यात्रा में ‘खाली कर दो रास्ते, भोजशाला के वास्ते’ जैसे नारे गूंजते रहे। डीजे वाहनों के साथ यात्रा मां वाग्देवी के तेल चित्र को लेकर आगे बढ़ी।

    भीड़ में बिगड़ी श्रद्धालुओं की तबीयत

    मुख्य गेट पर लंबी कतार के कारण भीड़ बढ़ गई। इसी दौरान एक बुजुर्ग श्रद्धालु बेहोश हो गए, जिन्हें मौके पर मौजूद प्रशासन और स्वयंसेवकों ने स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत सामान्य बताई गई है। कुछ अन्य श्रद्धालुओं को भी मौके पर उपचार दिया गया।

    प्रशासन का संदेश

    प्रशासन का साफ संदेश है कि दोनों धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों। सुरक्षा बलों की तैनाती, ड्रोन से निगरानी और स्पष्ट समय-सीमा के जरिए किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने की कोशिश की जा रही है। धार में पूरे जिले की नजरें टिकी हैं।

    केरल में मोदी का मेगा रोड शो: ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड लॉन्च

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    National desk:
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी राज्य केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भव्य रोड शो किया। यह यात्रा थंपानूर ओवरब्रिज से शुरू होकर पुथरिकंडम मैदान तक पहुंची। इस दौरान पीएम ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया, शिलान्यास किया और नई योजनाओं को हरी झंडी दिखाई।

    पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की शुरुआत

    प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया और देशभर के एक लाख लाभार्थियों को पीएम स्वनिधि ऋण वितरित किए। केरल के 10 हजार और तिरुवनंतपुरम के 600 रेहड़ी-पटरी वालों को यह कार्ड मिला। मोदी ने कहा कि अब केवल अमीरों तक सीमित रहने वाला क्रेडिट कार्ड गरीब मेहनतकशों तक भी पहुंचेगा।

    ‘विकसित भारत के लिए देश एकजुट’

    अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए पूरा देश एकजुट होकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि शहर इस लक्ष्य में बड़ी भूमिका निभाते हैं और बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने शहरी बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर निवेश किया है।

    गरीब और मध्यम वर्ग पर फोकस

    प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम आवास योजना के तहत देश में चार करोड़ से अधिक घर बनाए गए हैं। शहरी गरीबों के लिए एक करोड़ से ज्यादा मकान बने हैं, जिनमें केरल के सवा लाख परिवारों को पक्का घर मिला है।
    उन्होंने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आयुष्मान भारत के तहत पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज और मातृ वंदना योजना का भी जिक्र किया।

    टैक्स राहत और बैंकिंग पहुंच

    मोदी ने कहा कि 12 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त करने से मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को बड़ा लाभ मिला है। बीते 11 वर्षों में करोड़ों लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। अब एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाएं और मछुआरे भी आसानी से बैंक लोन ले पा रहे हैं, जिसमें सरकार खुद गारंटर बन रही है।

    रेहड़ी-पटरी वालों के लिए नई उम्मीद

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले सड़कों पर सामान बेचने वालों की हालत बेहद खराब थी। पीएम स्वनिधि योजना से लाखों रेहड़ी-पटरी वालों को पहली बार बैंक लोन मिला। अब क्रेडिट कार्ड के जरिए उन्हें और सशक्त बनाया जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपना कारोबार बढ़ा सकें।

    ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और भारत की चुप्पी: क्यों दिल्ली ने चुना ‘वेट एंड वॉच’ का रास्ता

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    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में अपने नए वैश्विक मंच ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का ऐलान किया। इस दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया, लेकिन भारत ने फिलहाल न तो इसे स्वीकार किया और न ही खारिज किया। दिल्ली ने इस पहल पर “देखो और समझो” की नीति अपनाई है।

    क्यों हिचक रहा है भारत

    सूत्रों के अनुसार, भारत कई पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है—

    • बोर्ड में शामिल देशों की सूची

    • इसकी वैधता और भविष्य

    • संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर असर

    • गाज़ा और इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत का रुख

    • अमेरिका से संभावित कूटनीतिक दबाव

    भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय व्यवस्था का समर्थक रहा है। ऐसे में कोई भी ऐसा मंच जो यूएन के समानांतर ढांचा बने, दिल्ली के लिए असहज हो सकता है।

    किन देशों ने दी सहमति

    अब तक अर्जेंटीना, सऊदी अरब, मिस्र, इज़राइल, यूएई, तुर्की, जॉर्डन, पाकिस्तान, कतर, इंडोनेशिया सहित कई देशों ने बोर्ड में शामिल होने की सहमति दी है। पश्चिम एशिया के बड़े खिलाड़ी इसमें मौजूद हैं, लेकिन यूरोप के प्रमुख देश—फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन—दूर हैं।
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन भी इससे बाहर हैं, जिससे इसकी वैश्विक वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।

    ‘ट्रंप प्रोजेक्ट’ होने की चिंता

    दिल्ली की एक बड़ी चिंता यह है कि यह बोर्ड पूरी तरह ट्रंप की व्यक्तिगत पहल है। ट्रंप के कार्यकाल के समाप्त होते ही यह मंच निष्क्रिय हो सकता है। भारत ऐसे अस्थायी मंच पर संसाधन और राजनीतिक पूंजी लगाने से पहले सावधानी बरत रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र बनाम नया मंच

    अगर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ संयुक्त राष्ट्र को कमजोर करता है या समानांतर व्यवस्था बनता है, तो यह भारत की बहुपक्षीय नीति के विपरीत होगा। ट्रंप ने जरूर कहा है कि यह बोर्ड यूएन के साथ मिलकर काम करेगा, लेकिन इसके नियम, अधिकार और निर्णय प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं हैं।

    गाज़ा से आगे बढ़ा तो बढ़ेगी चिंता

    भारत चाहता है कि यह मंच केवल गाज़ा तक सीमित रहे, जैसा कि कनाडा ने सुझाव दिया है। लेकिन ट्रंप ने इसे “दुनिया के लिए” बताया है। आशंका है कि यह मंच भविष्य में अन्य संघर्षों—यहां तक कि भारत-पाकिस्तान मामलों—में भी दखल दे सकता है।

    पाकिस्तान की मौजूदगी, भारत पर दबाव

    पाकिस्तान पहले से ही इस बोर्ड में शामिल है और उसके प्रधानमंत्री दावोस समारोह में मौजूद थे। दिल्ली में यह धारणा है कि अगर भारत बाहर रहा, तो भविष्य में किसी भारत-पाक तनाव के दौरान बोर्ड के फैसलों से वह कट सकता है।

    संतुलन की राजनीति

    भारत के सामने चुनौती स्पष्ट है—
    एक ओर, बहुपक्षीयता और दो-राष्ट्र समाधान जैसी अपनी मूल विदेश नीति की रक्षा।
    दूसरी ओर, अमेरिका के साथ रणनीतिक रिश्तों को नुकसान से बचाना।

    इसी संतुलन के कारण भारत फिलहाल कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहा है और ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर दूर से नजर रखे हुए है।

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    दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप-3 की पाबंदियां हटीं, वायु गुणवत्ता में सुधार के बाद सीएक्यूएम का फैसला

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    नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में आंशिक सुधार के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण की पाबंदियों को हटा दिया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने गुरुवार को यह निर्णय लेते हुए कहा कि प्रदूषण स्तर में गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि स्थिति अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं है।

    एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार दोपहर राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 322 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रेप-3 के तहत लागू कड़े प्रतिबंधों को हटाया गया है, जबकि ग्रेप-1 और ग्रेप-2 के नियम फिलहाल लागू रहेंगे।

    कौन-कौन से प्रतिबंध हटे

    ग्रेप-3 के तहत जिन गतिविधियों पर रोक थी, उनमें मुख्य रूप से निर्माण कार्यों पर सख्ती, डीजल जनरेटर के उपयोग पर प्रतिबंध और कुछ औद्योगिक गतिविधियों पर रोक शामिल थी। इन प्रतिबंधों को हटाने से निर्माण और अन्य जरूरी गतिविधियों को सीमित राहत मिलेगी।

    अभी भी सतर्कता जरूरी

    सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया है कि वायु गुणवत्ता की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ता है, तो पाबंदियां दोबारा लागू की जा सकती हैं। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे निजी वाहनों के उपयोग में संयम बरतें और प्रदूषण कम करने के लिए सहयोग करें।

    ग्रेप-1 और ग्रेप-2 रहेंगे लागू

    हालांकि ग्रेप-3 हटाया गया है, लेकिन ग्रेप-1 और ग्रेप-2 के तहत आने वाले नियमों का पालन अनिवार्य रहेगा। इनमें धूल नियंत्रण के उपाय, कचरा जलाने पर रोक और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी जैसे प्रावधान शामिल हैं।

    नोएडा में इंजीनियर की मौत पर सख्त कार्रवाई, दो और बिल्डर गिरफ्तार; दफ्तर व कॉर्पोरेट ऑफिस सील

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    नोएडा में इंजीनियर की मौत के मामले में पुलिस और प्रशासन का एक्शन लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी से जुड़े दो और निदेशकों को गिरफ्तार किया गया, जबकि संबंधित बिल्डर कंपनियों के दफ्तर और कॉर्पोरेट कार्यालयों को सील कर दिया गया है। इस मामले में अब तक तीन बिल्डरों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

    दफ्तरों पर पुलिस की कार्रवाई

    पुलिस टीम ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-62 स्थित टॉवर-ए की सातवीं मंजिल पर संचालित बेस्टटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय को सीज किया। इसके अलावा सह-आरोपी बिल्डर निर्मल सिंह से जुड़े सेक्टर-126 नोएडा स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई। इस दौरान पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे तथा किसी भी अव्यवस्था से बचने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया।

    नियमों के उल्लंघन का आरोप

    जांच में सामने आया कि संबंधित कार्यालयों में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था। आरोपियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद प्रशासन ने नोटिस जारी कर परिसर को सीज करने के आदेश दिए। पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के लिए कंपनी से जुड़े अहम रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। अचानक हुई कार्रवाई से आसपास मौजूद लोगों और अन्य कंपनियों के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।

    लोटस ग्रीन के दो निदेशक गिरफ्तार

    पुलिस ने लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी के दो निदेशकों रवि बंसल (फरीदाबाद, हरियाणा) और सचिन करनवाल (गाजियाबाद) को गिरफ्तार किया है। दोनों को सूरजपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को तय की गई है। इससे पहले एमजेड विश टाउन कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

    जमीन सौदे और हिस्सेदारी की जांच

    पुलिस जांच में पता चला है कि संबंधित भूखंड वर्ष 2014 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने खरीदा था, जिसे बाद में वर्ष 2020 में एमजेड विश टाउन ने अधिग्रहित किया। इसके बावजूद लोटस ग्रीन की हिस्सेदारी अब भी बनी हुई है। शेयर होल्डिंग और निवेश से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    क्या है पूरा मामला

    यह मामला एटीएस ले ग्रैंडियोस सोसाइटी के पास उस समय सामने आया, जब तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर नाले की दीवार तोड़ते हुए पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी। हादसे में कार सवार इंजीनियर की मौत हो गई। पुलिस, दमकल और राहत एजेंसियों ने कई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर युवक को मृत घोषित कर दिया गया।

    पुलिस ने मृतक के परिजन की शिकायत पर बिल्डर कंपनियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की जाएगी।

    Ai से थमेगा फ्रॉड कॉल का खेल, टेलीकॉम सेक्टर में आने वाला है बड़ा बदलाव डिजिटल डेस्क

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    Ai fraud detector:
    जहां एक ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को नौकरियों और निजता के लिए खतरा माना जा रहा है, वहीं टेलीकॉम सेक्टर में इसे फ्रॉड के खिलाफ एक मजबूत हथियार के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक न केवल फर्जी कॉल और मैसेज की पहचान कर सकेगी, बल्कि भविष्य में कॉल करने का तरीका भी पूरी तरह बदल जाएगा।

    कैसे काम करेगा एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम

    टेलीकॉम सेक्टर में एआई ऐसे पैटर्न को पहचानने में सक्षम है, जो आमतौर पर फ्रॉड कॉल्स में देखने को मिलते हैं। कॉल की अवधि, लोकेशन, आवाज़ का पैटर्न, बार-बार नंबर बदलना और संदिग्ध कीवर्ड्स जैसे संकेतों के आधार पर एआई रियल-टाइम में फर्जी कॉल को ब्लॉक कर सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिस्टम किसी कॉल के यूज़र तक पहुंचने से पहले ही यह तय कर लेगा कि कॉल सुरक्षित है या नहीं।

    फ्रॉड करने वालों की होगी सटीक पहचान

    एआई की मदद से केवल कॉल रोकना ही नहीं, बल्कि फ्रॉड करने वालों की पहचान करना भी आसान होगा। मशीन लर्निंग मॉडल बार-बार इस्तेमाल होने वाले नंबरों, नेटवर्क व्यवहार और डिजिटल फुटप्रिंट का विश्लेषण कर अपराधियों तक पहुंचने में मदद करेंगे। इससे साइबर क्राइम पर लगाम लगने की उम्मीद है।

    कॉल और मैसेजिंग का तरीका बदलेगा

    भविष्य में एआई केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। कॉल स्क्रीनिंग, वॉयस ऑथेंटिकेशन और स्मार्ट कॉल अलर्ट जैसी सुविधाएं आम हो सकती हैं। यूज़र को कॉल उठाने से पहले ही यह जानकारी मिल सकेगी कि कॉल असली है या संदिग्ध।

    इसके अलावा, एआई-आधारित सिस्टम स्पैम मैसेज और फर्जी ओटीपी फ्रॉड को भी काफी हद तक खत्म कर सकता है।

    उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर

    बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के बीच यह तकनीक आम लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। टेलीकॉम कंपनियां एआई को अपने नेटवर्क में शामिल कर यूज़र्स को सुरक्षित और भरोसेमंद कॉलिंग अनुभव देने की तैयारी में हैं।

    आने वाले समय की तस्वीर

    दिल्ली विश्वविद्यालय में गूंजा मध्यप्रदेश का सांस्कृतिक गौरव, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदेश से “मध्यांचल उत्सव 2026” बना युवाओं की प्रेरणा का मंच

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    मध्यांचल उत्सव 2026:दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकरलाल सभागार में 19 जनवरी 2026 को मध्यांचल स्टूडेंट्स एसोसिएशन, दिल्ली द्वारा “मध्यांचल उत्सव 2026” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक, साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना था। यह उत्सव युवा ऊर्जा और क्षेत्रीय पहचान के संगम के रूप में आयोजित हुआ, जिसमें पारंपरिक कलाओं और लोक विधाओं के साथ विचार विमर्श सत्र भी शामिल रहे।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 11 बजे हुई। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित रहे। उनके साथ श्री श्याम टेलर भाजपा युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष मध्यप्रदेश, श्री अनूप लाठर डीयू कल्चर काउंसिल के अध्यक्ष और जन संपर्क अधिकारी, डॉ. संजय वर्मा दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के ओएसडी और कार्यवाहक निदेशक तथा सुश्री रेखा सक्सेना विभागाध्यक्ष राजनीतिक विज्ञान दिल्ली विश्वविद्यालय भी मौजूद रहीं।

    अतिथियों के स्वागत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश से आए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने युवाओं द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज युवाओं को सबसे अधिक रोजगार देने का काम मध्यप्रदेश कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से खूब पढ़ने, आगे बढ़ने और अपने प्रदेश लौटकर योगदान देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार युवाओं के हर प्रयास में उनके साथ खड़ी है।

    कार्यक्रम के दूसरे सत्र में संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट पवन रिले, प्रसिद्ध कवि सुमित ओरछा और राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल शामिल हुए। इस सत्र में साहित्य, समाज और समकालीन विषयों पर विचार विमर्श हुआ।

    कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। प्रसिद्ध लोकगायिका सुश्री कविता शर्मा, लोकगायक श्री लोकेश बुंदेलखंडी और अभिनेता एवं रंगमंच कलाकार श्री देवेन्द्र अहिरवार ने मध्यप्रदेश की लोककलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।

    इस अवसर पर दिल्ली में रहने वाले मध्यप्रदेश के विद्यार्थी और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे मध्यप्रदेश की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

    नई ऊंचाई पर भारत-यूएई साझेदारी, व्यापार दोगुना करने की दिशा में बड़ा कदम

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    India UAE Bilateral Trade Deal: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक 200 अरब डॉलर तक दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह निर्णय दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देता है।

    व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
    दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठकों में निर्यात-आयात, निवेश और उद्योग सहयोग को तेज करने पर सहमति बनी। इससे भारतीय कंपनियों को यूएई के बाजार में और अवसर मिलेंगे, जबकि यूएई का निवेश भारत में रोजगार और विकास को बढ़ावा देगा।

    ऊर्जा और रक्षा में मजबूती
    बैठक के दौरान ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अहम समझौते हुए, जिनमें दीर्घकालिक एलएनजी आपूर्ति शामिल है। साथ ही रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी साझेदारी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

    CEPA से पहले ही बदली तस्वीर
    भारत-यूएई के बीच पहले से लागू समग्र आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के बाद व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है। नया लक्ष्य इस रिश्ते को और मजबूत बनाता है।

    भविष्य की बड़ी तस्वीर
    विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल भारत को वैश्विक व्यापार में और मजबूत बनाएगी, वहीं यूएई के लिए भारत एक भरोसेमंद दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभरेगा। यह समझौता केवल व्यापार नहीं, बल्कि दोनों देशों की रणनीतिक मित्रता को भी नई ऊंचाई देगा।

    कौन हैं नितिन नबीन, जो संभालने जा रहे हैं देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान?

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    नितिन नबीन बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालने जा रहे हैं। इसके साथ ही वे अब तक के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। जनवरी में हुए चुनाव में उनके नाम पर सभी ने विश्वास जताया है। उनके नाम दो बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं—एक समय वे बिहार के सबसे कम उम्र के विधायक रहे हैं और अब इतनी कम उम्र में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। चलिए जानते हैं, कौन हैं नितिन नबीन।

    नितिन नबीन 45 वर्ष की उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले हैं, जो पार्टी के इतिहास में इस पद को संभालने वाले सबसे युवा नेता होंगे। इससे पहले यह रिकॉर्ड अमित शाह के पास था, जिन्होंने 49 वर्ष की उम्र में यह पद संभाला था।यह बदलाव पार्टी में युवा नेतृत्व को आगे लाने और संगठन में पीढ़ीगत संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    बिहार से राष्ट्रीय नेतृत्व तक
    नितिन नबीन का राजनीतिक सफर बिहार से शुरू हुआ और अब वे देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का शीर्ष पद संभालने जा रहे हैं। वे पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पाँच बार विधायक चुने जा चुके हैं और उनकी राजनीतिक यात्रा में लगातार जीत सामने आई है।उनकी शुरुआत 2006 में बाय-इलेक्शन से हुई थी और उसके बाद वे लगातार विधान सभा जीतते रहे हैं।

    संगठन में अनुभव
    नितिन नबीन ने बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में भी काम किया है और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी नियुक्त रहे हैं।उनका यह चयन सिर्फ़ अध्यक्ष बनने का कदम नहीं, बल्कि पार्टी के आंतरिक संगठन, चुनावी योजनाओं और युवा नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में लिया गया रणनीतिक निर्णय भी माना जा रहा है।

    नेतृत्व परिवर्तन का संदेश
    बीजेपी की इस नियुक्ति को पीढ़ीगत बदलाव, नेतृत्व के नवीनीकरण, और युवा नेताओं को आगे बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी आलाकमान का यह मानना है कि नेतृत्व केवल उम्र या पारिवारिक पृष्ठभूमि पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि किसी नेता के अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

     

    BMC Election 2026: मुंबई में ‘धुरंधर देवेंद्र’ की गूंज, भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी

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    BMC Election: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी है। 227 वार्डों में भाजपा ने 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। इसके साथ ही करीब तीन दशक से चला आ रहा ठाकरे परिवार का वर्चस्व समाप्त हो गया।

    मुंबई में जीत का उत्सव, लगे ‘धुरंधर देवेंद्र’ पोस्टर
    चुनाव नतीजों के बाद मुंबई के कई इलाकों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ‘धुरंधर देवेंद्र’ पोस्टर लगाए गए। ये पोस्टर मुंबई भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष तजिंदर सिंह तिवाना की ओर से लगाए गए हैं। पोस्टरों ने भाजपा की जीत और नेतृत्व की मजबूती को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया।

    भाजपा का 45 साल पुराना सपना हुआ पूरा
    भाजपा की स्थापना के 45 वर्षों में पहली बार बीएमसी में उसका मेयर बनने जा रहा है। देश की सबसे समृद्ध नगरपालिका में सत्ता की दहलीज पर पहुंचना पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

    अन्य दलों की स्थिति

    • शिवसेना (उद्धव गुट) – 65 सीटें

    • एकनाथ शिंदे की शिवसेना – 29 सीटें

    • कांग्रेस – 24 सीटें

    • AIMIM – 8 सीटें

    • मनसे – 6 सीटें

    • एनसीपी – 3 सीटें

    • समाजवादी पार्टी – 2 सीटें

    • एनसीपी (एसपी) – 1 सीट

    29 में से 25 महानगरपालिकाओं में भगवा लहर
    महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में से 25 में भाजपा या भाजपा-शिवसेना गठबंधन सत्ता में पहुंचता दिख रहा है। मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, पनवेल और नासिक में गठबंधन को बड़ी जीत मिली। पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ में पवार परिवार को भी करारी शिकस्त मिली।

    राज्यभर में भाजपा का दबदबा
    कुल 2,869 सीटों में भाजपा ने 1,441 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में खुद को स्थापित किया। एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 405, कांग्रेस को 318, अजित पवार की एनसीपी को 164, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 15 और मनसे को 14 सीटें मिलीं।

    कांग्रेस को तीन निकायों में राहत
    कांग्रेस को लातूर, चंद्रपुर और भिवंडी-निजामपुर में सफलता मिली।

    • लातूर: 70 में से 43 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत

    • भिवंडी-निजामपुर: 30 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी

    • मालेगांव: इंडियन सेकुलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र पार्टी 35 सीटों के साथ अव्वल