
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं, तब भारतीय अर्थव्यवस्था तेज विकास और नियंत्रित महंगाई के संतुलित दौर से गुजर रही है। हालांकि, मजबूत दिखने वाले आर्थिक आंकड़ों के पीछे कई चुनौतियां भी छिपी हैं, जिनसे निपटना बजट 2026-27 की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
सरकारी आकलन के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करता है। लेकिन नाममात्र वृद्धि दर 8 प्रतिशत के आसपास रहने से राजस्व संग्रह पर दबाव बढ़ने की आशंका है। यह दर बजट अनुमान 10.1 प्रतिशत से कम है, जिससे सरकार की आय प्रभावित हो सकती है।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू चुनौतियां
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ युद्ध और कमजोर अंतरराष्ट्रीय व्यापार ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में वित्त मंत्री के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। मौजूदा आर्थिक विस्तार मुख्य रूप से सरकारी खर्च के सहारे टिका हुआ है, जबकि निजी निवेश, उपभोग और निर्यात अपेक्षाकृत कमजोर बने हुए हैं।
राजकोषीय घाटा लक्ष्य के करीब, कर्ज पर नजर
सरकार के 2025-26 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखने की उम्मीद है। इसमें आरबीआई से मिलने वाला अधिक लाभांश और कुछ खर्चों में कटौती मददगार साबित हो सकती है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि आने वाले वर्षों में राजकोषीय अनुशासन को मापने के लिए घाटे की बजाय जीडीपी के अनुपात में कर्ज को आधार बनाया जाएगा। लक्ष्य है कि 2030-31 तक सरकारी कर्ज को जीडीपी के 50 प्रतिशत से नीचे लाया जाए।
निजी निवेश बना बड़ी चिंता
निजी क्षेत्र में निवेश की रफ्तार अब भी सुस्त है। उच्च ब्याज दरें, कमजोर मांग और कम क्षमता उपयोग इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। सकल स्थायी पूंजी निर्माण (GFCF) में कोई बड़ा सुधार नहीं दिखा है। ऐसे में बजट से उम्मीद की जा रही है कि वह निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
कैपेक्स पर जोर, राज्यों के सामने चुनौती
केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में राजस्व खर्च घटाकर पूंजीगत व्यय पर जोर दिया है। 2025-26 में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 11.2 ट्रिलियन रुपये किया गया है। इससे अर्थव्यवस्था में मल्टीप्लायर प्रभाव मजबूत हुआ है। हालांकि, राज्यों के सामने अब भी अनावश्यक राजस्व खर्च कम करने और पूंजीगत खर्च की गुणवत्ता सुधारने की चुनौती बनी हुई है।
बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें
महंगाई, रोजगार, निजी निवेश, राजस्व संग्रह और कर्ज प्रबंधन जैसे मुद्दों के बीच बजट 2026-27 से बड़े सुधारों की उम्मीद की जा रही है। वित्त मंत्री के फैसले यह तय करेंगे कि भारत का ‘विकसित भारत’ बनने का सफर कितनी मजबूती से आगे बढ़ता है।

