Comptroller and Auditor General of India (CAG) ने (PMKVY) में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है। ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि कई उम्मीदवारों के बैंक अकाउंट नंबर संदिग्ध थे और कई जगह एक ही फोटो को अलग-अलग उम्मीदवारों के लिए बार-बार इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, करीब 34 लाख प्रमाणित उम्मीदवार अब तक अपना बकाया भुगतान नहीं पा सके हैं।

योजना का परिचय
PMKVY की शुरुआत जुलाई 2015 में हुई थी और इसे तीन चरणों में लागू किया गया। 2015 से 2022 के बीच इस योजना के लिए 14,450 करोड़ रुपये का बजट रखा गया और लगभग 1.32 करोड़ उम्मीदवारों को स्किल ट्रेनिंग और प्रमाण पत्र दिए गए। योजना का उद्देश्य युवाओं को स्किल डेवलपमेंट की ओर आकर्षित करना और बेरोजगारी कम करना है।
CAG की रिपोर्ट में खुलासे
CAG ने इलेक्ट्रॉनिक पहचान और संपर्क विवरणों की जांच में पाया कि 95.90 लाख प्रतिभागियों में से 90.66 लाख के रिकॉर्ड में बैंक अकाउंट विवरण या तो खाली थे या गलत/Null दर्ज था। कई खातों में 111111111111 या 123456 जैसे संदिग्ध नंबर पाए गए।
DBT प्रणाली में भी खामियां मिलीं। केवल 24.53 लाख उम्मीदवार DBT से जुड़े और इनमें से सिर्फ 17.69 लाख को ही भुगतान हुआ। अधूरी जानकारी के कारण 34 लाख से अधिक उम्मीदवारों को भुगतान नहीं मिल पाया।
ऑनलाइन ईमेल सर्वे में भी कम ही सहभागिता रही। भेजे गए ईमेल में से 36.51% डिलीवर नहीं हुए और केवल 3.95% उम्मीदवारों ने जवाब दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और राजस्थान में प्रशिक्षण के फोटो सबूतों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई।
मंत्रालय का बयान
मंत्रालय ने कहा कि पिछले वर्षों में योजना को मजबूत किया गया है। अब फेस ऑथेंटिकेशन, जियो-टैग्ड अटेंडेंस और लाइव अटेंडेंस डैशबोर्ड जैसी तकनीकी सुविधाओं के जरिए निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है। उम्मीदवारों से फीडबैक लेने के लिए सेंट्रल कम्युनिकेशन लेयर (CCL) की व्यवस्था भी लागू की गई है।
यह रिपोर्ट दर्शाती है कि PMKVY में सुधार की जरूरत है और योजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने आवश्यक हैं।
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