
Gujarat IAS controversy: पाटीदार आंदोलन याद है? जब आरक्षण की मांग को लेकर पाटीदार समाज के लोग गुजरात की सड़कों पर जम गए थे। यह आंदोलन इतना बढ़ने लगा था कि उस वक्त गुजरात सरकार की नींद उड़ गई थी। 22 साल का युवा हार्दिक पटेल इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा था। धमकी तो यह तक दी गई थी कि भारत और दक्षिण अफ्रीका का मैच होने नहीं दिया जाएगा। यहाँ तक कि टीम को स्टेडियम तक नहीं पहुँचने दिया जाएगा। लेकिन इसके काउंटर में बड़ी तादाद में लोग नरेंद्र मोदी की टी-शर्ट पहनकर स्टेडियम में पहुँचे। स्टेडियम का नज़ारा देखकर सबको यह आंदोलन फुस होता हुआ नज़र आने लगा।
लेकिन किसने सोचा था कि यह महज़ 22 साल का लड़का गुजरात सरकार की नींद उड़ा देगा। सरकार ने इस आंदोलन को कैसे खत्म किया, वह अपने आप में एक अलग कहानी है।
लेकिन क्या एक बार फिर पाटीदार आंदोलन की तैयारी है?
सवाल का जवाब है—हाँ, लेकिन आरक्षण को लेकर नहीं। इस बार पाटीदार समाज आंदोलन कर रहा है IAS अधिकारी राजेंद्रकुमार पटेल के बचाव में। राजेंद्रकुमार के ऊपर करप्शन के आरोप हैं। पाटीदार समाज का कहना है कि उन्हें टारगेट किया जा रहा है। उनके समर्थन में अहमदाबाद जिले के मंडल में रैली आयोजित हुई। जनसभा का नेतृत्व करने वाले वरुण पटेल ने कहा, “सरकार कुछ भी कहे, राजेंद्र पटेल हमारे समाज की शान हैं।”उन्होंने यह भी कहा—
पहले पाटीदारों को राजनीति से हटाने की साजिश थी। अब पाटीदारों और गुजरातियों को प्रशासन से हटाने की साजिश हो रही है।
कौन हैं राजेंद्र पटेल, जिनके लिए फिर हो रहा है आंदोलन?
Rajendrakumar Patel गुजरात कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। अहमदाबाद जिले के विरमगाम तालुका के दुमाना गांव के निवासी राजेंद्रकुमार पटेल ने डेंटल सर्जरी (BDS) में स्नातक की पढ़ाई के बाद सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 2014 में UPSC में ऑल इंडिया रैंक 70 हासिल की। मुख्य परीक्षा में उन्होंने गुजराती साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना। सेवा में चयन के बाद वे राज्य में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर तैनात रहे, जिनमें सुरेंद्रनगर के कलेक्टर का पद भी शामिल है। हाल के दिनों में उनका नाम एक मामले को लेकर सामने आया है, जिसकी जांच जारी है।
जमीन से जुड़ा है मामला।
आरोप है कि उन्होंने जमीन का Non-Agriculture (NA) परमिशन देने के बदले पैसे लिए। इसी मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई चल रही है। “मामले में NA परमिशन से जुड़ी अनियमितता का आरोप है, लेकिन यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि परमिशन किस व्यक्ति या संस्था को दी गई थी।
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