
राज्यसभा में सरकार ने पेश किया ब्योरा
नई दिल्ली: देशभर की निचली अदालतों (जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय) में ओबीसी, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के जजों की संख्या को लेकर केंद्र सरकार ने ताजा आंकड़े पेश किए हैं। राज्यसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि इस समय देश में कुल 20,833 जज निचली अदालतों में कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 46 प्रतिशत जज आरक्षित वर्गों से हैं।
तमिलनाडु में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व
आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु निचली अदालतों में आरक्षित वर्गों के जजों की हिस्सेदारी के मामले में देश में शीर्ष पर है। राज्य में कुल 1,234 जजों में से 1,205 यानी 97.6 प्रतिशत जज ओबीसी, एससी और एसटी श्रेणियों से आते हैं। इसका अर्थ है कि तमिलनाडु में जिला और अधीनस्थ अदालतों में लगभग हर 100 में से 98 जज आरक्षित वर्ग से हैं।
पुडुचेरी और मेघालय भी आगे
तमिलनाडु के बाद केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 88.5 प्रतिशत और मेघालय में 95 प्रतिशत जज आरक्षित वर्गों से हैं। कर्नाटक (88 प्रतिशत), तेलंगाना (69 प्रतिशत) और आंध्र प्रदेश (64 प्रतिशत) में भी आरक्षित वर्गों की भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक है।
दिल्ली में सबसे कम अनुपात
राजधानी दिल्ली में निचली अदालतों में आरक्षित वर्गों के जजों का अनुपात सबसे कम है। यहां केवल 13 प्रतिशत जज ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों से हैं। इसी तरह गुजरात और हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जाति-आधारित आंकड़े नहीं
कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए किसी जाति या वर्ग के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है। इसी कारण इन दोनों स्तरों पर जजों के जाति-आधारित प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़े केंद्र सरकार के पास उपलब्ध नहीं हैं।
2018 के बाद से सामाजिक पृष्ठभूमि का रिकॉर्ड
हालांकि 2018 से यह व्यवस्था लागू है कि हाई कोर्ट के जज पद के लिए सिफारिश किए गए उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि की जानकारी एक तय फॉर्मेट में ली जाती है। 2018 से अब तक इस प्रक्रिया के तहत नियुक्त 847 जजों में 104 ओबीसी, 33 अनुसूचित जाति, 17 अनुसूचित जनजाति और 46 अल्पसंख्यक वर्ग से हैं। इसी अवधि में 130 महिलाओं को भी हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।
निचली अदालतों में आरक्षित वर्गों के जजों का प्रतिशत (चयनित राज्य)

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देशभर में: 46%
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तमिलनाडु: 97.6%
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मेघालय: 95%
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पुडुचेरी: 88.5%
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कर्नाटक: 88%
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तेलंगाना: 69%
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आंध्र प्रदेश: 64%
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छत्तीसगढ़: 63%
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केरल: 59%
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उत्तर प्रदेश: 54%
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मध्य प्रदेश: 49%
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राजस्थान: 45%
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पंजाब: 40%
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गुजरात: 29%
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हिमाचल प्रदेश: 29%
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दिल्ली: 13%
यह आंकड़े देश की निचली न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व की मौजूदा स्थिति को सामने रखते हैं और राज्यों के बीच बड़े अंतर को भी उजागर करते हैं।

