इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 मौतों की घटना के बाद जबलपुर में भी पेयजल सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है। शहर के कांचघर बीमा अस्पताल के पीछे स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में नागरिकों को जिस भूमिगत टैंक से पानी की आपूर्ति की जा रही है, उसकी स्थिति भयावह बनी हुई है।
ब्रिटिशकालीन यह भूमिगत टैंक पिछले कई वर्षों से 24 घंटे खुला पड़ा है। टैंक के आसपास गंदगी, कचरा और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है, जिससे कीड़े-मकोड़े और अन्य जीव-जंतु सीधे पानी में गिर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले टैंक में कभी भी कोई कुत्ता, बिल्ली या अन्य जानवर गिर सकता है, जिससे पूरे इलाके में गंभीर जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा है।
चार साल पहले गिर चुकी है बिल्ली, फिर भी नहीं जागा प्रशासन
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले इसी टैंक में एक बिल्ली गिर गई थी, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो गया था। उस समय भी शिकायतें की गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। भूमिगत होने के कारण टैंक की नियमित सफाई भी नहीं हो पा रही है। वर्तमान में कई घरों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है, जिसे बिना छाने या उबाले पीना लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

भूकंप से जर्जर टंकी के नीचे चल रहा पंप हाउस
कॉलोनी की जल आपूर्ति के लिए बनी मुख्य पानी की टंकी लगभग 40 साल पुरानी है। वर्ष 1997 के भीषण भूकंप के बाद से यह टंकी जर्जर हालत में है। सुरक्षा कारणों से इसमें पानी भरना बंद कर दिया गया है, लेकिन इसके ठीक नीचे बना पंप हाउस आज भी संचालित है। नागरिकों का कहना है कि जर्जर टंकी को गिराने का प्रस्ताव पास हो चुका है, इसके बावजूद नगर निगम द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
पांच हजार लोग मजबूर, पानी भी मिल रहा एक समय
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के करीब पांच हजार नागरिक इसी खुले और असुरक्षित टैंक से मिलने वाला पानी पीने को मजबूर हैं। पानी की आपूर्ति भी दिन में केवल एक बार की जा रही है। पंप हाउस कर्मचारियों का कहना है कि मोटर में पर्याप्त प्रेशर नहीं बन पा रहा है।
नगर निगम का दावा, अमृत योजना का इंतजार
इस पूरे मामले पर नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (जल) कमलेश श्रीवास्तव का कहना है कि टैंक की समय-समय पर सफाई कराई जाती है। उन्होंने बताया कि अमृत योजना 2.0 के तहत क्षेत्र में नई पानी की टंकी स्वीकृत की जा चुकी है और निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो गया है। नई टंकी के बन जाने के बाद ही जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार संभव होगा।
सर्वे रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने दिसंबर 2025 में जारी केंद्रीय सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि जबलपुर में केवल 54.3 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर में सप्लाई हो रहा लगभग आधा पानी दूषित है। इसकी बड़ी वजह पिछले दो दशकों से नालियों के भीतर से गुजर रही पुरानी पाइपलाइनें हैं, जिनमें बार-बार लीकेज होने से पेयजल प्रदूषित हो रहा है। मंच ने महापौर और निगमायुक्त को पत्र लिखकर इन पाइपलाइनों को तत्काल हटाने की मांग की है।

