
नई दिल्ली: टैरिफ संकट के समय भारत और अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी अहम बैठक शनिवार को होने जा रही है। यह बैठक दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) करेंगे, जबकि इसमें अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव भी शामिल होंगे।
यह बैठक पिछले दस साल में दूसरी बार आयोजित की जा रही है। पहली बैठक साल 2016 में बहरीन में हुई थी, जिसमें अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग के पांच मुख्य क्षेत्रों की पहचान की गई थी।
बैठक का उद्देश्य
इस बैठक का मुख्य लक्ष्य भारत और अरब देशों के बीच साझेदारी को और गहरा करना है। यह बैठक दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत मंच मानी जाती है। भारत और अरब देशों के बीच औपचारिक साझेदारी की शुरुआत मार्च 2002 में हुई थी, जब भारत और अरब राज्यों की लीग (LAS) ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
महत्वपूर्ण बिंदु:
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इस बैठक में लगभग 15 अरब देशों के विदेश मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है।
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इसमें सीरिया के विदेश मंत्री असाद हसन अल-शायबानी की उपस्थिति भी हो सकती है, जो नई दिल्ली और दमिश्क के बीच पहली मंत्री-स्तरीय बातचीत होगी।
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बैठक के दौरान यमन की स्थिति पर चर्चा भी होने की उम्मीद है, खासकर सऊदी अरब और UAE के बीच बढ़ते मतभेदों के संदर्भ में।
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हाल के महीनों में सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ पश्चिम एशिया से संबंधित मुद्दों पर घनिष्ठता बढ़ाई है, जबकि UAE ने इज़राइल के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है।
कुल मिलाकर, यह बैठक भारत और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में एक अहम कदम साबित हो सकती है।

