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    इकोनॉमिक सर्वे में AI का नया प्लान: UPI जैसी ‘AI-OS’, बच्चों के लिए कमाई के साथ पढ़ाई, IT सेक्टर को चेतावनी


    इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा विज़न पेश किया है। इसमें कहा गया है कि भारत में ‘AI-OS’ बनाया जाए, जो UPI और आधार की तरह एक पब्लिक गुड होगा।
    इस योजना के तहत सरकार AI इंफ्रास्ट्रक्चर में हिस्सेदार बनेगी और IndiaAI मिशन के अंतर्गत एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनेगा, जहाँ डेवलपर्स, स्टूडेंट्स और कंपनियाँ मिलकर कोड शेयर कर सकेंगी और नई तकनीक बना सकेंगी।

    महंगे बड़े मॉडल नहीं, छोटे और काम के मॉडल

    सर्वे ने सलाह दी है कि भारत को बड़े और बहुत महंगे AI मॉडल बनाने की दौड़ में नहीं पड़ना चाहिए। इसके बजाय ऐसे छोटे AI मॉडल बनाए जाएँ, जो किसी एक काम के लिए हों – जैसे खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा या व्यापार।
    ये मॉडल मोबाइल और कंप्यूटर पर भी चल सकेंगे, जिससे छोटे शहरों और गाँवों तक AI पहुँचेगा।

    नीचे से ऊपर की रणनीति

    भारत के लिए “बॉटम-अप” तरीका बेहतर बताया गया है, यानी AI का विकास धीरे-धीरे हर सेक्टर तक पहुँचे। इससे ज्यादा बिजली, भारी खर्च और विदेशी हार्डवेयर पर निर्भरता से बचा जा सकेगा।
    सर्वे के अनुसार, भारत के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी AI-जानकार वर्कफोर्स है।

    छात्रों के लिए ‘कमाओ और सीखो’ मॉडल

    सर्वे में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव सुझाया गया है।
    अब कक्षा 11 से ही छात्र पढ़ाई के साथ काम कर सकेंगे

    • उन्हें इंडस्ट्री में काम करने का मौका मिलेगा

    • इसके बदले उन्हें वेतन भी मिलेगा

    • और वही अनुभव उनकी डिग्री में क्रेडिट के रूप में जुड़ेगा

    इससे छात्रों को नौकरी के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी और देश की युवा शक्ति सही दिशा में लगेगी।

    नए रोजगार के रास्ते

    सर्वे कहता है कि सिर्फ ऑफिस वाली नौकरियों पर ध्यान न देकर उन क्षेत्रों को भी मजबूत करना होगा जहाँ कुशल लोगों की भारी कमी है।
    जैसे –

    • नर्सिंग और बुजुर्गों की देखभाल

    • रसोई और होटल से जुड़े हुनर

    • सर्जरी, फिजियोथेरेपी

    • एडवांस इलेक्ट्रिशियन

    • छोटे बच्चों की शिक्षा

    इन क्षेत्रों में आने वाले समय में लाखों नई नौकरियाँ बन सकती हैं।

    IT सेक्टर के लिए चेतावनी

    रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के कारण भारत का IT सेक्टर खतरे में पड़ सकता है।
    पहले विदेशी कंपनियाँ अपना काम भारत को देती थीं, लेकिन अब वही काम AI खुद कर सकता है।
    अगर भारत ने समय रहते खुद को नहीं बदला, तो IT सेक्टर की ताकत कमजोर हो सकती है।

    भारत की चुनौतियाँ

    सर्वे बताता है कि –

    • दुनिया के AI ट्रेनिंग डेटा में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2% है

    • 70% डेटा सेंटर अमीर देशों में हैं, भारत में केवल 3%

    • AI के लिए जरूरी GPU और हार्डवेयर विदेशों पर निर्भर हैं

    इससे भारत की AI क्षमता सीमित हो सकती है।

    AI में संतुलन जरूरी

    सर्वे कहता है कि भारत को कई बातों में संतुलन बनाना होगा –

    • बड़े मॉडल बनाना या काम के छोटे मॉडल

    • मशीनों से काम कराना या लोगों की नौकरियाँ बचाना

    • खुला AI या बंद सिस्टम

    • ज्यादा कंप्यूटर ताकत या संसाधनों की बचत

    • आज़ादी से नवाचार या नियम-कानून

    • आत्मनिर्भरता या दुनिया से जुड़ाव

    साफ संदेश यह है कि भारत को अपनी जरूरतों और संसाधनों के हिसाब से अपना खुद का AI मॉडल बनाना होगा, न कि अंधाधुंध दुनिया की नकल करनी होगी।

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