देवास पीपलरावां। नारी की सुरक्षा व सम्मान सम्पूर्ण समाज का उत्तरदायित्व है इस कार्य में कानून व पुलिस सदैव आपके साथ है। आपराधिक गतिविधियों की सूचना हमें देकर आप पुलिस मित्र बने। यह बात सशिम में आयोजित विद्यार्थी संवाद व रक्षाबन्धन उत्सव में टीआई कमलसिंह गेहलोत ने कही।
टीआई ने बच्चों को सोशल मीडिया के उपयोग, सायबर क्राइम, बाल एवम महिला सुरक्षा कानून की जानकारी देते हुए बच्चों द्वारा पूछे प्रश्नों के रोचक जवाब दिए। । कन्या भारती की बहिनों ने पुलिस तथा अतिथियों को रक्षासूत्र बांधे। प्राचार्य चिंतेश नागर ने अतिथि परिचय दिया। कार्यक्रम के अंत मे कक्षा 9 से 12 तक की बहिनों ने भैयाओं को तिलक लगाकर राखियाँ बांधी। महिला आरक्षक शीतल ठाकुर व पूजा विश्वकर्मा सहित आचार्य परिवार मौजूद था। संचालन अनिल राठौर ने किया।
ई खबर मीडिया के लिए देवास से विष्णु शिंदे की रिपोर्ट
केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की मंशा है कि कृषि का लाभ का धंधा बने। इसके लिए शासन द्वारा किसान हितैषी कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं का लाभ पाकर कृषक बड़ी संख्या में फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, वहीं अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। किसानों की अच्छी आय होने से कृषक आर्थिक तौर पर भी सुदृढ़ हो रहे हैं। इन्हीं किसानों में विकासखण्ड टोंकखुर्द के ग्राम चिड़ावद के किसान श्री राकेश सिसोदिया है, जिन्होंने उद्यानिकी विभाग की महत्ती योजना का लाभ लिया है।
किसान श्री राकेश सिसोदिया पहले पारंपरिक रूप से प्याज की खेती करते थे, जिसमें प्रति हेक्टर 150-200 क्विंटल प्याज फसल का उत्पादन प्राप्त होता था। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से जुड़कर उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत अनुदान पर ड्रिप संयंत्र लगाया है। प्याज फसल की खेती में ड्रिप के उपयोग से पानी की बचत होती है एवं प्याज का उत्पादन भी 300-350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त हो रहा है, प्याज की फसल में प्रति हेक्टेयर लागत 1.50 से 02 लाख आती है तथा बाजार में उचित मूल्य प्राप्त होने पर प्रति हेक्टेयर 07 से 08 लाख रूपये की आय प्राप्त हो रही है।
किसान हितैषी योजनाऐं संचालित करने के लिए और योजना का लाभ मिलने पर किसान श्री राकेश प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को हृदय से धन्यवाद दे रहे है।
ई खबर मीडिया के लिए देवास से विष्णु शिंदे की रिपोर्ट
राज्य शासन द्वारा संचालित म.प्र. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत विवाह सहायता योजना जो कि गरीब एवं मजदूर वर्ग के कल्याण के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गरीब एवं मजदूर वर्ग को अधिक से अधिक शासन की लाभान्वित योजनाओं का लाभ मिले। इन्हीं योजनाओं में श्रम विभाग अंतर्गत मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल की विवाह सहायता योजना में श्रमिक वर्ग के व्यक्तियों को लाभ मिल रहा है। इस योजना के माध्यम से देवास निवासी श्रमिक श्री मोईनुद्दीन पिता अब्दुल गनी है, जिन्हें अपनी बेटी मतंशा की शादी/निकाह के लिए 51 हजार रूपये की सहायता राशि प्राप्त हुई है। जिससे वे तथा उनका पूरा परिवार बहुत खुश है तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को ह्दय से धन्यवाद दे रहे हैं। श्री मोईनुद्दीन ने बताया कि वे श्रमिक होकर भवन निर्माण कार्य में मजदूरी करते है तथा जो मजदूरी प्राप्त होती है उससे अपने पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रहे है। उन्हें बेटी की शादी/निकाह की चिंता सताई जा रही थी, लेकिन प्रदेश सरकार की श्रम विभाग अंतर्गत मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत विवाह सहायता योजना से 51 हजार रूपये की राशि प्रदान की गई। इसके लिए मैं तथा मेरा पूरा परिवार बहुत खुश हैं। इसके लिए शासन को बहुत-बहुत धन्यवाद।
ई खबर मीडिया के लिए देवास से विष्णु शिंदे की रिपोर्ट
जयपुर से 300 किलोमीटर दूर है हनुमानगढ़ का मंदरपुरा गांव। दिल्ली से करीब 16 घंटे सफर कर मैं यहां पहुंची। तंग गली के आखिर में बड़े से दरवाजे का एक मकान। मैं काफी देर दरवाजा खटखटाती रही, लेकिन कोई बाहर नहीं आया। मैंने आसपास के लोगों से पूछा- ‘घर के अंदर लोग तो हैं न, फिर कोई दरवाजा क्यों नहीं खोल रहा।’ एक शख्स ने बताया- ‘घर के अंदर लोग तो हैं, लेकिन उनकी जिंदगी खालीपन से भर गई है। बहुत नाउम्मीद हो गए हैं। हाल ही में इन लोगों ने जवान बेटा खोया है। अब ये लोग किसी से बात नहीं करते, बेटे के बारे में तो बिल्कुल नहीं।’ ये घर कन्हैया लाल पारीक का है। वही कन्हैया, जिन्होंने दिसंबर 2022 में रीट पेपर लीक होने पर कीटनाशक पीकर जान दे दी थी। उसने सुसाइड लेटर में उसने लिखा था, ‘सॉरी पापा, मैं आप लोगों के लिए कुछ नहीं कर सका। लव स्नेहा’ फरवरी 2020 में जब में कोरोना महामारी पैर पसार रही थी, उसी दौरान कन्हैया और स्नेहा की शादी हुई थी। कन्हैया अपनी पत्नी से कहा करता था, ‘अभी मेहनत का समय है। एक बार हमारी सरकारी नौकरी हो जाए, फिर हम खुलकर अपनी जिंदगी जिएंगे।’ शादी को एक साल ही बीता था कि कन्हैया ने जिंदगी से हार मान ली। जब उसकी डेड बॉडी गांव पहुंची, तो स्नेहा कई बार रोते हुए बेहोश हुई, जागी, और फिर बेहोश हुई। अगले 2 महीनों तक बीमार रही। परिवार से स्नेहा की ऐसी हालत देखी नहीं जा रही थी। इसी साल फरवरी-मार्च में परिवार ने कन्हैया के फुफेरे भाई से स्नेहा की दूसरी शादी करा दी। स्नेहा का दूसरा पति भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है।
कन्हैया का शव घर से थोड़ी दूर पर सिंचाई विभाग के खंडहर क्वार्टर के पास मिला था।
कन्हैया के परिवार से मिलने के लिए 2 दिन पहले मैंने भाई मदनलाल से फोन पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि कोई भी कन्हैया के बारे में बात नहीं करना चाहता, मैं उनसे मिलने न आऊं। पर मैं आ गई। जब घर पर किसी ने दरवाजा नहीं खोला, तो गांव के सरपंच और परिवार के एक करीबी नरेंद्र तिवारी से मिली। उनसे कहा कि वे मदनलाल और उनके परिवार से मेरी बात करा दें। आखिरकार दरवाजा खुला। कन्हैया के चाचा प्रेमसुख ने मुझे अंदर बिठाया। बीच-बीच में कन्हैया की दादी कमरे में झांककर देखतीं कि कौन आया है। उनके अलावा कोई और मिलने नहीं आया। कन्हैया के पिता ने कैमरे पर आने और बात करने से साफ मना कर दिया। मैंने चाचा से कहा, ‘आप कहिए तो शायद वो राजी हो जाएं।’ इस पर चाचा ने नाराज होते हुए जवाब दिया, ‘जब 25 साल के बेटे की लाश बाप कंधे पर रखकर चलता है तो कुछ कहने को बाकी नहीं रहता।’ मैंने मदनलाल से बात करने की कोशिश की। पहला सवाल पूछा, ‘आपको भाई की कौन सी बात सबसे ज्यादा याद आती है।’
उन्होंने बगैर मेरी ओर देखे जवाब दिया, ‘बस भाई ही याद आता है।’
मैंने अगला सवाल पूछने की कोशिश की उससे पहले ही वो उठकर खड़े हो गए, ‘प्लीज फोटो वीडियो मत लीजिए। हम इस हालत में नहीं हैं। हमारी ओर से चाचा जी ही आपसे बात करेंगे।’ परिवार के इस रवैये में मैंने एक बेबसी महसूस की। कन्हैया का जिक्र भी पूरे परिवार के लिए कोई ताजा जख्म कुरेदने जैसा था। परिवार अब तक इस सदमे से उबरा नहीं है। न ही किसी के मन से सरकार के खिलाफ गुस्सा कम हुआ है। कन्हैया के चाचा प्रेमसुख पारीक कहते हैं, ‘हमें इस बात का अंदाजा नहीं था कि वो ऐसा कदम उठा लेगा। अंदाजा होता तो हम उसे सरकारी नौकरी से हटा लेते (सरकारी नौकरियों की तैयारी से रोक लेते)। जमीन संभालने या कोई प्राइवेट नौकरी करने के लिए कहते। उसने हमें पता ही नहीं लगने दिया कि वो इस हद तक डिप्रेशन में है। उस पर तो टीचर बनने का जुनून सवार था। उसे पढ़ने और पढ़ाने दोनों का बहुत शौक था। इसके अलावा उसने कोई शौक नहीं पाला।’ बात करते करते प्रेमसुख भावुक हो जाते हैं। बेचैन होकर कहते हैं, ‘दुनिया की कोई खुशी हमारे घर आ जाए, लेकिन हम एक पल के लिए कन्हैया को नहीं भूलते। हम लोग उसके बारे में कोई बात ही नहीं करते। शुरू से लेकर आखिर तक वो क्लास में पहले नंबर पर आया। कोई खास शौक नहीं रहा उसे। न खेलने का न घूमने का। बस पढ़ाई, पढ़ाई। कन्हैया बचपन से लेकर आज तक हमारा हर सपना पूरा करता चला गया। दसवीं, बारहवीं और B.Ed में अव्वल आया, लेकिन जब उसके सपने की बारी आई तो सिस्टम उसे खा गया।’ एक बार फिर चाचा का गला भर आता है। कुछ देर रुककर फिर कहते हैं, ‘REET के पेपर में उसके 150 में से 135 नंबर तक थे। उसने 10-15 नंबर का ही छोड़ा था। रिजल्ट आता तो उसका सिलेक्शन पक्का था, लेकिन दुर्भाग्य था कि पेपर लीक हो गया। उससे पहले साल में वनपाल का पेपर भी दिया था जो क्लियर हो गया था, लेकिन वो पेपर भी लीक हो गया। लगातार दो साल पेपर लीक से डिप्रेशन में चला गया था।’ कन्हैया की मौत के दो महीने के बाद ही गम में उसके दादा की भी मौत हो गई थी। परिवार में अब एक अजीब ही खामोशी है। घर एकदम सूना लगता है, कोई आवाज नहीं, सब अपने कमरे में, सिर्फ पंखा चलने की आवाज आती है। मैंने कन्हैया के घर से बाहर निकलकर कुछ गांववालों से बातचीत की। पता चला कि यहां सरकारी नौकरी का गजब ही आकर्षण है। गांव में सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के विज्ञापन के बोर्ड भरे पड़े हैं, लेकिन कन्हैया की मौत के बाद गांव वालों का सरकारी नौकरी के प्रति मोहभंग हो गया है। वे कहते हैं कि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। गांव की चौपाल पर आए तो ताऊ लोग पत्ते खेलने में व्यस्त हैं। इन्हीं में कन्हैया के दादा के सगे भाई राम विलास पारीक भी हैं। वह कहते हैं- ‘पेपर लीक होने की वजह से कन्हैया डिप्रेशन में था। वो सरकार से निवेदन करते हैं कि पेपर लीक के खिलाफ कड़ा कानून बने, ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।’ गांव वाले बताते हैं कि कन्हैया पढ़ाई में इतना तेज था कि गांव में हर किसान अपनी फसल का हिसाब, बीमा का हिसाब उसी से करवाता था। वो मिनटों में जो हिसाब बनाकर देता था, बीमे की उतनी ही रकम अकाउंट में आती थी। गांव के स्कूल में गणित का टीचर नहीं था, इसलिए कन्हैया वहां फ्री में पढ़ाता भी था। गांव में किसी का कुछ ट्यूबवेल या बिजली का कुछ खराब हो जाए तो कन्हैया जाकर ठीक कर देता था। गांव के पूर्व सरपंच हेमराज शर्मा बताते हैं कि गांव में उन्होंने एक युवा ब्रिगेड बना रखी थी जिसमें अक्सर कन्हैया आया करता था। गांव के किसी भी घर का कोई काम हो, गांव में किसी बेटी की शादी हो, 26 जनवरी या 15 अगस्त हो, गांव के कार्यक्रमों में सबसे आगे रहता था। हेमराज शर्मा बताते हैं, ‘जिस दिन कन्हैया की बॉडी गांव में आई, उस दिन पूरे गांव में चूल्हा नहीं जला था। उसकी मौत के बाद सबकी जुबान पर एक ही बात है कि पेपर लीक ने परिवार को बर्बाद कर दिया।’ एक बुजुर्ग ग्रामीण मदनलाल कहते हैं, ‘दो साल तक बच्चा तैयारी करता है, मां बाप पैसे खर्च करते हैं, लेकिन अंत कैसा होता है। कन्हैया की मौत के जिम्मेदार जो हैं, उन्हें पकड़ना चाहिए, उन्हें सजा होनी चाहिए।’
टीवी एक्ट्रेस दलजीत कौर ने हाल ही में पति निखिल पटेल के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई थी, जो केन्या के एक बिजनेसमैन हैं। तलाक की खबरों के बीच एक्ट्रेस लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। अब एक्ट्रेस ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया है कि केन्या में उनके मामले की पहली सुनवाई हुई थी। हालांकि भरे कोर्ट में निखिल ने ये मानने से तक इनकार कर दिया है कि दलजीत उनकी आधिकारिक पत्नी हैं। निखिल के इस बयान पर अब दलजीत कौर ने भड़कते हुए सवाल किया है कि अगर वो पत्नी नहीं थीं, तो क्या वो एक मिस्ट्रेस थीं।
दलजीत कौर ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट के स्टोरी सेक्शन पर लिखा है, जो भी इस बारे में जानना चाहते थे मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि आज कोर्ट में मेरी पहली सुनवाई हुई है। उनका वकील पूरे समय बस यही साबित करता रहा कि हमारी कभी शादी ही नहीं हुई। जब मैंने शिकायत दर्ज करवाई तब इंडियन पुलिस ने मुझसे कहा था कि ट्रेडिशन्स और चश्मदीद ही उसे सलाखों के पीछे करवाने के लिए काफी हैं। अगर वो शादी से इनकार करता है, तो देखा जाएगा कि आगे क्या करना है। लेकिन उसके परिवार को ये कहते हुए शर्म आनी चाहिए कि कोई शादी ही नहीं है।
आगे दलजीत कौर ने केन्या की एक कंपनी को मेंशन कर लिखा है, जब आपने अपने सभी बड़े लीडर्स को कल्चरल इवेंट में बुलाया तो क्या आप लोगों ने सभी लोगों की पत्नियों को गेट-टुगेदर के लिए नहीं बुलाया? या फिर मैं कोई मिस्ट्रेस थी, जिसे आपने बुलाया था? अपनी पोस्ट में दलजीत ने आगे लिखा है, मुझे ये जानकर शर्मिंदगी हो रही है कि तुम ये साबित कर रहे हो कि हमारी शादी नहीं हुई। तुम्हें ये बात मुझे करवाचौथ के दिन बतानी थी, जब मैं रात के साढ़े 11 बजे तक अपने पति के लिए भूखी रही थी। मुझे उस दिन खाना खा लेना था। तुम्हें शर्म आनी चाहिए निखिल।
बताते चलें कि टीवी एक्ट्रेस दलजीत कौर ने 2009 में एक्टर शालीन भानोट से शादी की थी, जिससे उन्हें एक बेटा जॉर्डन है। ये शादी 2015 में टूट गई थी, जिसके बाद दलजीत ने 2023 में केन्या बेस्ड बिजनेसमैन निखिल पटेल से दूसरी शादी की थी।
शादी भारत में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी, जिसके बाद दलजीत बेटे जॉर्डन के साथ केन्या शिफ्ट हो गई थीं, हालांकि 8 महीने बाद ही वो भारत लौट आईं। भारत आकर दलजीत ने पति पर धोखाधड़ी और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के आरोप लगाए, जिससे वो सुर्खियों में आ गईं। इसके बाद से ही दलजीत लगातार पति पर सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगा रही थीं, जिसके बाद निखिल ने उनका सामान घर से फेंकने की धमकी देते हुए बताया कि उन्होंने दलजीत से कभी रजिस्टर्ड मैरिज नहीं की थी। लंबे विवाद के बाद 4 अगस्त को दलजीत ने निखिल के खिलाफ अगरीपाड़ा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई थी। दलजीत के बाद निखिल ने भी केन्या में दलजीत के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसकी सुनवाई 22 अगस्त को हुई है।
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन आज यानी 23 अगस्त सेंसेक्स 33 अंक की तेजी के साथ 81,086 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 11 अंक की तेजी रही, ये 24,823 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 15 में तेजी और 13 में गिरावट रही। निफ्टी के 50 शेयरों में से 22 में तेजी और 28 में गिरावट रही। निफ्टी ऑटो छोड़कर सभी सेक्टर में गिरावट रही।
अनिल अंबानी शेयर बाजार से 5 साल के लिए बैन
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने फंड की हेराफेरी के मामले में इंडस्ट्रियलिस्ट अनिल अंबानी को शेयर बाजार से 5 साल के लिए बैन कर दिया है। अंबानी पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। उनके किसी भी लिस्टेड कंपनी में डायरेक्टर रहने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
एशियाई बाजार में आज मिलाजुला कारोबार रहा
एशियाई बाजार में जापान के निक्केई में 0.40% की तेजी और हॉन्गकॉन्ग के हैंगसेंग में 0.16% की गिरावट रही। चीन का शंघाई कंपोजिट 0.20% चढ़ा और कोरिया के कोस्पी में 0.22% गिरा।
NSE के डेटा के अनुसार, विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 23 अगस्त को ₹1,371.79 करोड़ के शेयर खरीदे। इस दौरान घरेलू निवेशकों (DIIs) ने भी ₹2,971.80 करोड़ के शेयर खरीदे।
गुरुवार को अमेरिकी बाजार का डाओ जोंस 0.43% गिरकर 40,712 के स्तर पर बंद हुआ। नैस्डैक भी 1.67% गिरा, ये 17,619 के स्तर पर बंद हुआ। S&P500 0.89% की गिरावट के साथ 5,570 के स्तर पर बंद हुआ।
ओरिएंट टेक्नोलॉजीज के IPO के लिए बोली लगाने का आखिरी दिन
ओरिएंट टेक्नोलॉजीज के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO के लिए आज बोली लगाने का आखिरी दिन है। यह IPO 21 अगस्त को ओपन हुआ था। दो दिन में ओरिएंट टेक्नोलॉजीज का IPO टोटल 17.51 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। रिटेल कैटेगरी में IPO 25.62 गुना, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) में 0.16 गुना और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) कैटगरी में 21.75 गुना सब्सक्राइब हुआ।
बांग्लादेश के दिग्गज ऑलराउंडर शाकिब अल हसन पर हत्या का केस दर्ज किया गया है। इस मामले में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, एक्टर फिरदौस अहमद और ओबैदुल कादर और 154 अन्य लोगों पर भी आरोप हैं। इसके अलावा करीब 400 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। मौजूदा समय में शाकिब अल हसन पाकिस्तान दौरे पर हैं। वह बांग्लादेश की टेस्ट टीम का हिस्सा हैं और अभी रावलपिंडी में सीरीज का पहला टेस्ट मैच खेल रहे हैं।
क्या है पूरा मामला? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सभी पर कपड़े की दुकान में काम करने वाले रुबेल नाम के शख्स की हत्या का आरोप है। 5 अगस्त को रुबेल ने एडबोर में रिंग रोड पर एक विरोध मार्च में हिस्सा लिया था। रैली के दौरान किसी ने सुनियोजित साजिश के तहत भीड़ पर गोलियां चला दी। इस गोलीबारी में रुबेल को छाती और पीठ में गोलियां लगी। इसकी वजह से 7 अगस्त को हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
शाकिब और फिरदौस इसी साल बने थे सांसद शाकिब और फिरदौस इस साल जनवरी में आवामी लीग के टिकट पर सांसद चुने गए थे। हालांकि, प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद उनकी सांसदी भी छीन गई।
विवादों से शाकिब का गहरा नाता बांग्लादेश का यह स्टार ऑलराउंडर अक्सर मैदान और मैदान के बाहर विवादों के चलते चर्चा में बना रहता है। इस साल अप्रैल महीने में उन्होंने ग्राउंड स्टाफ के साथ हाथापाई की थी। उसका फोन छीनने की कोशिश की थी और उसे हथप्पड़ मारने की धमकी भी दी थी। इसके अलावा वह मैदान पर विपक्षी टीम के खिलाड़ियों और अंपायर्स से भी कई बार भीड़ चुके हैं।
जन्माष्टमी के 3 दिन पहले मथुरा में तेज बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। रेस्क्यू करने के लिए नगर निगम को जेसीबी मशीनें लगानी पड़ीं। कई जगह सड़कें भी धंस गईं। त्रिपुरा में पिछले 5 दिनों में भारी बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण 17 लाख लोग प्रभावित हैं। 22 लोगों की मौत हो चुकी है। सेना ने 330 लोगों को बचाया। 65 हजार लोग 450 रिलीफ कैंप में हैं। उत्तर प्रदेश के 10 जिलों के 80 से ज्यादा गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। बलिया में गंगा और बाराबंकी में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राजस्थान में आज 26 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।
त्रिपुरा में 5 दिनों में 1900 लैंडस्लाइड
त्रिपुरा में पिछले 5 दिनों में 1900 से ज्यादा लैंडस्लाइड हुई हैं। असम राइफल्स की राइफलवुमन बचाव कार्यों का नेतृत्व कर रही हैं। पूरे राज्य से अब तक 750 से अधिक लोगों को निकाला जा चुका है।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी त्रिपुरा CM को फोन करके राज्य में बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया और उन्हें केंद्र की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। शाह ने बताया कि NDRF की 4 टीमें त्रिपुरा पहुंची हैं।
रूस और यूक्रेन में ढाई साल से जारी जंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को यूक्रेन पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। दोनों नेता यूक्रेन नेशनल म्यूजियम पहुंचे, जहां उन्होंने जंग में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी। इससे पहले मोदी 10 घंटे की ट्रेन यात्रा करने के बाद भारतीय समय के मुताबिक सुबह 10 बजे कीव पहुंचे। वे यहां 7 घंटे बिताएंगे। कीव में भारतीय समुदाय के लोगों ने मोदी का स्वागत किया। PM ने फोमिन बोटैनिकल गार्डन में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यूक्रेन के दौरे पर जाने वाले PM मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद यूक्रेन की स्थापना हुई थी। तब से लेकर आज तक कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री यूक्रेन नहीं गया था। PM मोदी का ये दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि 24 फरवरी 2022 को रूस के हमले के बाद से अब तक नाटो देशों के अलावा किसी अन्य देश के नेता ने यूक्रेन का दौरा नहीं किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कुछ महीने पहले PM मोदी को यूक्रेन आने का न्योता दिया था।
उत्तर प्रदेश/ हरदोई: ग्राम मेढौवा , पोस्ट सुभान खेड़ा, थाना कासिमपुर, तहसील संडीला के निवासी जाकिर हुसैन ने ग्राम प्रधान पिंकी देवी और उनके पति आलोक कुमार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। जाकिर हुसैन का कहना है कि ग्राम प्रधान अवैध तरीके से ग्राम सभा की भूमि पर कब्जा कर रहे हैं और विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
जाकिर हुसैन के अनुसार, उन्होंने 2013 से अब तक कई बार उप जिलाधिकारी, जिलाधिकारी, थाना दिवस, जनता दरबार और 1076 जनसुनवाई में प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन अभी तक कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत जो पैसे ग्राम विकास के लिए आए थे, वे प्रधान और उनके पति के खाते से निकाल लिए गए हैं, जबकि कार्य स्थल पर कोई भी कार्य पूरा नहीं हुआ है। पंचायत घर अधूरा पड़ा है, और तालाब खुदाई, वृक्षारोपण आदि कार्यों में भी सिर्फ कागजों पर ही काम हुआ है।
इसके अलावा, जाकिर हुसैन ने आरोप लगाया कि गांव की पशुचर, कब्रिस्तान, श्मशान घाट और धोबी घाट की जमीनों पर भी अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। हेमनाथ, लालतू, बृजलाल, मुन्नीलाल, राजू आदि लोग इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान लेखपाल आदेश कुमार ने मौके की जांच करने के बजाय प्रधान के घर पर बैठकर कब्जाधारियों के पक्ष में रिपोर्ट तैयार की है।
पीड़ित जाकिर हुसैन ने मीडिया के माध्यम से सरकार से न्याय की गुहार लगाई है और मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर निवेदन किया है कि ग्राम सभा की जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार की जांच उच्च अधिकारियों द्वारा कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री जी के दावों के बावजूद अभी तक किसी भी उच्च अधिकारी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया है।
जाकिर हुसैन ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
क्या है पूरा मामला?
जाकिर हुसैन ने हरदोई में ग्राम प्रधान पर भ्रष्टाचार और अवैध कब्जे के लगाये गंभीर आरोप उत्तर प्रदेश, हरदोई ग्राम महुआ के निवासी जाकिर हुसैन ने ग्राम प्रधान पिंकी देवी और उनके पति आलोक कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हुसैन का कहना है कि प्रधान ने ग्राम सभा की भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है और विकास कार्यों में भ्रष्टाचार किया है। मनरेगा के पैसे प्रधान और उनके पति के खाते से निकाल लिए गए हैं, जबकि कार्य आधे-अधूरे हैं। जाकिर ने मीडिया के माध्यम से सरकार से न्याय की गुहार लगाई है ।
जाकिर ने बताया कि उनके भाई के आवास का पैसा आया था, लेकिन प्रधान और सचिव ज्ञान सिंह ने दूसरे का जॉब कार्ड लगाकर पैसा निकालने की कोशिश की। रिश्वत न देने पर उनसे ₹20,000 की मांग की गई थी। जाकिर ने मीडिया के माध्यम से सरकार से न्याय की गुहार लगाई है और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उचित जांच की मांग की है।