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    रफ्तार कम हुई, मजबूरी नहीं: गिग वर्कर्स बोले—जमीन पर कुछ नहीं बदला

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    न्यूज़ डेस्क, भोपाल: केंद्र सरकार द्वारा क्विक कॉमर्स कंपनियों को 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटाने के निर्देश के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि गिग वर्कर्स को राहत मिलेगी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। दिल्ली समेत कई शहरों में काम कर रहे डिलीवरी एजेंट्स का कहना है कि इस फैसले से उनकी ज़िंदगी में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। उनकी कमाई अब भी ज्यादा डिलीवरी करने पर निर्भर है, इसलिए तेज़ी से काम करने का दबाव पहले जैसा ही बना हुआ है। कई एजेंट्स ने यह भी बताया कि उन्हें कंपनियों की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई औपचारिक सूचना तक नहीं मिली है।

    डिलीवरी एजेंट्स के अनुसार प्रति डिलीवरी भुगतान ₹15 से ₹25 के बीच होता है। रोज़ 35 से 40 डिलीवरी करने के बाद ही ₹1,200 से ₹1,500 की कमाई हो पाती है, जबकि लगभग 15 घंटे काम करने पर यह राशि ₹1,500 से ₹1,600 तक पहुंचती है। एजेंट्स का कहना है कि ज्यादा कमाई और इंसेंटिव पाने के लिए उन्हें कई बार गलत साइड में वाहन चलाना पड़ता है और अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

    कंपनियां भले ही यह दावा करें कि अब किसी तय समय सीमा में डिलीवरी की बाध्यता नहीं है, लेकिन गिग वर्कर्स का कहना है कि इंसेंटिव सिस्टम ही असली दबाव बन चुका है। उनकी रेटिंग और अतिरिक्त कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि वे कितनी जल्दी और कितनी ज्यादा डिलीवरी करते हैं। कई बार इंसेंटिव दिन में दो-तीन बार बदल जाते हैं, जो मांग, मौसम और त्योहारों पर निर्भर होते हैं। अगर किसी दिन ऑर्डर कम हुए तो कई घंटे काम करने के बावजूद कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलता।

    एक डिलीवरी पार्टनर का कहना है, “अच्छा है कि सरकार हमारी आवाज़ सुन रही है, लेकिन यह काफी नहीं है। जब तक सुरक्षित और तय भुगतान व्यवस्था नहीं बनती, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।” Amazon India Workers Union के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने भी सरकार के कदम का स्वागत किया, लेकिन साफ कहा कि इससे कंपनियों का बिज़नेस मॉडल नहीं बदलता। उनके मुताबिक अब भी न न्यूनतम वेतन है, न बीमा और न ही सुरक्षा की ठोस व्यवस्था। वर्कर्स को बेहतर रेटिंग और इंसेंटिव के लालच में 10 से 12 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।

    कुल मिलाकर, 10 मिनट डिलीवरी का टैग हटना एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन गिग वर्कर्स के लिए असली राहत तब मिलेगी, जब उन्हें न्यूनतम वेतन, बीमा और स्थायी आय की गारंटी मिलेगी। फिलहाल उनके लिए दबाव और जोखिम दोनों पहले जैसे ही बने हुए हैं।

    यश की फिल्म ‘Toxic’ का टीज़र विवादों में, सेंसर बोर्ड तक पहुँचा मामला

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    यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups का टीज़र रिलीज़ होते ही विवादों में घिर गया है। इसके कुछ सीन को लेकर कंट्रोवर्सी शुरू हो गई है। एक सोशल एक्टिविस्ट ने इस मामले में सेंसर बोर्ड (CBFC) में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि टीज़र में दिखाए गए कुछ दृश्य नैतिकता की सीमाओं को पार करते हैं।

    इंटिमेट सीन पर विवाद

    फिल्म के टीज़र में एक इंटिमेट सीन दिखाया गया है, जो कार के अंदर फिल्माया गया है। इसमें यश को एक महिला के साथ नज़दीकी पलों में दिखाया गया है, इसके बाद कब्रिस्तान में लोगों पर गोली चलाते हुए भी दिखाया गया है।

    सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली ने इस पर आपत्ति जताते हुए CBFC में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने टीज़र में मौजूद “अश्लील, यौन रूप से स्पष्ट और नैतिक रूप से आपत्तिजनक” दृश्यों को लेकर नाराज़गी जाहिर की है।

    शिकायत में कहा गया है कि टीज़र में ऐसे दृश्य हैं जो “बेहद अश्लील और यौन रूप से स्पष्ट” हैं। कल्लाहल्ली ने लिखा, “यह ट्रेलर सोशल मीडिया पर बिना किसी प्रभावी रोक के फैल रहा है, जिससे आम जनता—खासकर नाबालिग और युवा—ऐसे कंटेंट के संपर्क में आ रहे हैं जो कानूनी रूप से अवैध और सामाजिक रूप से हानिकारक है।”

    फिल्म के बारे में

    “Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups” साल 2026 की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है, जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतज़ार है। इसमें यश के साथ नयनतारा, रुक्मिणी वसंत, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है, जिन्होंने यश के साथ मिलकर इसकी कहानी भी लिखी है। यश इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं। यह फिल्म 19 मार्च 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है।

    MP में मूर्ति विवाद: टंट्या मामा की ‘मेटल’ की जगह लगी फाइबर प्रतिमा, भ्रष्टाचार के आरोप

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    MP में मूर्ति विवाद:
    खरगोन के बिस्टान नाका चौराहे पर स्थापित क्रांति सूर्य टंट्या मामा भील की प्रतिमा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आदिवासी गौरव के प्रतीक टंट्या मामा की मूर्ति संगमरमर या धातु की होनी थी, लेकिन जांच में वह फाइबर (FRP) की निकली। मामला सामने आते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।

    कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश

    जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि मूर्ति निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने नगर पालिका के सीएमओ को ठेकेदार, सहायक यंत्री और उपयंत्री को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आदेश दिया गया है कि ठेकेदार अपने खर्च पर मापदंडों के अनुसार नई मूर्ति स्थापित करेगा।

    2022 में घोषणा, 2025 में लोकार्पण

    दिसंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बिस्टान नाका चौराहे का नाम टंट्या मामा भील के नाम पर करने और वहां प्रतिमा लगाने की घोषणा की थी। इसके तहत 15 नवंबर 2025 को जनजातीय गौरव दिवस पर नगर पालिका द्वारा मूर्ति का लोकार्पण किया गया और चौराहे को आधिकारिक रूप से ‘टंट्या मामा चौराहा’ नाम दिया गया।

    कार्यक्रम बचाने के लिए लगाई गई मूर्ति

    नगर पालिका सीएमओ कमला कौल ने बताया कि 13 नवंबर को ठेकेदार द्वारा लाई गई मूर्ति पहली नजर में संगमरमर जैसी लग रही थी। 15 नवंबर का कार्यक्रम पहले से तय था, इसलिए आयोजन में व्यवधान न आए, इस कारण मूर्ति स्थापित कर दी गई। बाद में तकनीकी जांच में इसके फाइबर की होने की पुष्टि हुई।

    कांग्रेस का आरोप, आंदोलन की चेतावनी

    ठेकेदार ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है और भुगतान न लेने की बात कही है। वहीं कांग्रेस ने इसे बड़े भ्रष्टाचार का मामला बताया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक का आरोप है कि PIC बैठक में पत्थर या धातु की मूर्ति लगाने का निर्णय हुआ था, फिर भी करीब 9.90 लाख रुपये की बताई जा रही मूर्ति फाइबर की निकली। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    हाईकोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग पर सख्ती: 102 विवादित लिंक हटाने के आदेश

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    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो का सोशल मीडिया पर गलत इस्तेमाल होने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने 102 विवादित यूआरएल लिंक 48 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी।

    क्या है पूरा मामला

    जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी, विदित शाह और डॉ. विजय बजाज की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें बताया गया कि हाईकोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मीम्स और शॉर्ट्स बनाकर डाले जा रहे हैं।
    याचिका में कहा गया कि अदालत की कार्यवाही के छोटे-छोटे हिस्से काटकर उन्हें सनसनीखेज तरीके से पेश किया जाता है, जिससे न्यायालय की गरिमा प्रभावित होती है।

    अदालत ने क्या कहा

    हाईकोर्ट ने साफ कहा कि अदालत की लाइव स्ट्रीम सामग्री को संपादित करना, उसमें छेड़छाड़ करना या गलत तरीके से इस्तेमाल करना नियमों के खिलाफ है। न्यायाधीशों की बातों को “मिर्च-मसाला” लगाकर फैलाना अवमानना की श्रेणी में आता है।

    48 घंटे का अल्टीमेटम

    याचिकाकर्ता की ओर से 102 ऐसे यूआरएल लिंक पेश किए गए थे, जिनमें आपत्तिजनक वीडियो मौजूद हैं। कोर्ट ने इन सभी लिंक को 48 घंटे में हटाने का आदेश दिया है।
    साथ ही सुझाव दिया गया कि यूट्यूब के बजाय वेबेक्स जैसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म से लाइव स्ट्रीमिंग की जाए और रजिस्ट्रार आईटी इन गतिविधियों पर निगरानी रखें।
    इस आदेश से साफ है कि हाईकोर्ट अपनी गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता से किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।

    महाराष्ट्र रैली में ओवैसी का तीखा प्रहार: संघ और बीजेपी को घेरा

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    महाराष्ट्र में एक जनसभा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने संघ और भाजपा पर जमकर निशाना साधा। जनसभा के दौरान ओवैसी ने संघ पर सवाल उठाते हुए कहा,
    “क्या आज तक संघ का कोई नेता अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए जेल गया है? हेडगेवार जेल गए थे, लेकिन वे खिलाफ़त आंदोलन के समर्थन में गए थे। आज ये लोग मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं।”
    इस तरह उन्होंने संघ की भूमिका पर सवाल खड़े किए।

    मोदी और बीजेपी पर साधा निशाना

    असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा,
    “इस क्षेत्र में कोई भी बांग्लादेशी घुसपैठिया नहीं है। अगर कोई है भी, तो वह सरकार की असफलता है। हिंदुत्व की आड़ में सरकार अपनी नाकामियों को छुपा रही है।”

    क्या था खिलाफ़त आंदोलन

    ख़िलाफ़त आंदोलन 1919 से 1924 के बीच चला एक मुस्लिम आंदोलन था। यह तुर्की के ख़लीफ़ा की सत्ता बचाने और ओटोमन साम्राज्य के टूटने के विरोध में शुरू हुआ था। इसका नेतृत्व अली बंधुओं — मोहम्मद अली और शौकत अली — ने किया। महात्मा गांधी और कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया, जिससे यह देशव्यापी आंदोलन बना।

    ओवैसी ने सरकार को कैसे घेरा

    एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा,
    “आरएसएस हमें देशभक्ति सिखाता है, लेकिन क्या उनके किसी नेता ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए कुर्बानी दी?”
    उन्होंने कहा कि ‘भारत छोड़ो’ और ‘साइमन गो बैक’ जैसे नारे यूसुफ मेहरअली ने दिए थे, लेकिन आज इतिहास को नजरअंदाज कर मुसलमानों को बांग्लादेशी कहा जाता है।

    ओवैसी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इतनी एजेंसियां होने के बाद भी बांग्लादेश सीमा पर बाड़ पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने कहा,
    “चीन और आईएसआई बांग्लादेश तक पहुंच चुके हैं और यहां सिर्फ ‘बांग्लादेश-बांग्लादेश’ कहा जा रहा है।”

    उन्होंने लोगों से चुनाव में ज्यादा से ज्यादा वोट डालने की अपील भी की।

    डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड पर सख्ती: केंद्र ने बनाई हाई-लेवल कमेटी, आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

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    नई दिल्ली।
    देश में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” साइबर फ्रॉड को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों गंभीर हो गए हैं। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) का गठन किया है, जो इस पूरे फर्जीवाड़े के हर पहलू की जांच करेगी।

    क्या है डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड

    डिजिटल अरेस्ट में साइबर ठग खुद को पुलिस, CBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल या वीडियो कॉल करते हैं। वे डराकर कहते हैं कि व्यक्ति किसी केस में फंस चुका है और उसे “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” किया गया है। भयभीत लोग अपनी जमा-पूंजी ठगों को सौंप देते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

    सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पहले ही CBI को जांच के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा था कि इस समस्या से निपटने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इसी के जवाब में सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है।

    कमेटी में कौन-कौन शामिल

    इस हाई-लेवल कमेटी की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) कर रहे हैं। इसमें शामिल हैं—

    • IT मंत्रालय (MeitY)

    • टेलीकॉम विभाग (DoT)

    • विदेश मंत्रालय

    • वित्तीय सेवा विभाग

    • RBI

    • CBI, NIA

    • दिल्ली पुलिस

    • I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर)

    कमेटी का काम कानूनों की खामियां पहचानना, सुधार सुझाना और कोर्ट के निर्देशों पर अमल सुनिश्चित करना है।

    टेक कंपनियों से भी चर्चा

    जनवरी 2026 में सरकार ने Google, WhatsApp, Telegram और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ भी बैठक की। इसमें साइबर ठगी रोकने के तकनीकी उपायों पर चर्चा हुई।

    सरकार ने मांगा एक महीना

    केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से एक महीने का और समय मांगा है, ताकि सभी विभागों से सुझाव लेकर एक ठोस और संयुक्त रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी जा सके।

    इस पूरी कवायद से साफ है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर अपराधों पर अब सरकार और न्यायपालिका मिलकर कड़ा शिकंजा कसने की तैयारी में हैं।

    मोबाइल से दूरी, मिशन पर फोकस: अजित डोभाल का खास अंदाज

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    Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026:
    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने खुलासा किया है कि वह अपने रोजमर्रा के काम में न तो मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं और न ही इंटरनेट का। उन्होंने कहा कि फोन का उपयोग केवल पारिवारिक जरूरतों या विदेशों में मौजूद लोगों से जरूरी बातचीत के लिए करते हैं।

    ‘संवाद के और भी तरीके हैं’
    नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के उद्घाटन सत्र में डोभाल ने कहा, “मैं इंटरनेट का उपयोग नहीं करता और फोन भी सामान्य कामों के लिए नहीं रखता। काम के लिए संवाद के और भी कई माध्यम हैं, जिनके बारे में लोग नहीं जानते।”

    अफवाहों पर भी दी सफाई
    डोभाल के नाम से सोशल मीडिया पर कई तरह की पोस्ट और दावे वायरल होते रहते हैं। उन्होंने इशारों में कहा कि इनमें से कई बातें मनगढ़ंत होती हैं। बीते साल PIB फैक्ट-चेक ने पाकिस्तान से साइबर हमले की चेतावनी वाली एक फर्जी फेसबुक पोस्ट को झूठा बताया था और साफ किया था कि अजित डोभाल का कोई आधिकारिक फेसबुक अकाउंट नहीं है।

    सुरक्षा तंत्र में लंबा अनुभव
    1945 में उत्तराखंड में जन्मे अजित डोभाल 1968 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं। 1989 में पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। वह यह सम्मान पाने वाले इकलौते पुलिस अधिकारी हैं।

    देश की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका
    2014 में NSA बनने के बाद डोभाल ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक और डोकलाम गतिरोध जैसे अहम फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाई। उनकी यह सादगी भरी लेकिन सख्त कार्यशैली देश की सुरक्षा व्यवस्था में उनकी अलग पहचान बनाती है।

    इंदौर में पानी बना जानलेवा: भागीरथपुरा में 20वीं मौत, संकट गहराया

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    indore news:
    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैल रही बीमारी अब और भयावह होती जा रही है। रविवार रात नयापुरा बस्ती की रहने वाली एक महिला जिसका नाम कमला बाई था की मौत हो गई। उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस मौत के साथ ही इलाके में मरने वालों की संख्या 20 तक पहुंच गई है।

    महिलाएं ज्यादा प्रभावित, नवजात भी शिकार
    इस बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा महिलाएं आई हैं। अब तक मृतकों में महिलाओं की संख्या अधिक है, जबकि एक नवजात की जान भी जा चुकी है। इससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।

    आईसीयू में 13 मरीज, दर्जनों का इलाज जारी
    डायरिया के कारण अभी 13 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं। वहीं 42 मरीजों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। कुल 427 मरीजों को अब तक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 385 को स्वस्थ होने पर छुट्टी दी जा चुकी है।

    लोगों में डर, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
    डॉक्टरों का कहना है कि मृत महिला पहले से अन्य बीमारियों से पीड़ित थी, इसलिए मौत को सीधे दूषित पानी से जोड़कर नहीं देखा जा रहा। बावजूद इसके, लगातार बढ़ रहे मामलों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। स्थानीय लोग सुरक्षित पेयजल और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

    भारत दौरे पर जर्मन चांसलर मर्ज, पीएम मोदी से आज होगी अहम द्विपक्षीय वार्ता

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    जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर अहमदाबाद पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 12–13 जनवरी 2026 तक चलने वाला यह दौरा मर्ज की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।

    साबरमती आश्रम में श्रद्धांजलि
    प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर मर्ज का साबरमती आश्रम में स्वागत किया। दोनों नेताओं ने महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की, चरखे का अवलोकन किया और आगंतुक पुस्तिका में अपने विचार दर्ज किए।

    पतंग महोत्सव में दिखी सांस्कृतिक झलक
    पीएम मोदी और चांसलर मर्ज एक ही कार में सवार होकर साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे। यहां दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लिया, जहां भारत की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।

    थोड़ी देर में द्विपक्षीय वार्ता
    कुछ ही देर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच अहमदाबाद के महात्मा मंदिर में द्विपक्षीय बैठक होगी। इस वार्ता में भारत–जर्मनी संबंधों, रक्षा सहयोग और व्यापारिक साझेदारी पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    पनडुब्बी सौदे पर टिकी नजरें
    इस दौरे का सबसे अहम एजेंडा भारतीय नौसेना के लिए छह अत्याधुनिक पनडुब्बियों की खरीद है। करीब 52,500 करोड़ रुपये के इस प्रस्तावित सौदे में जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स और भारत की माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के बीच साझेदारी हो सकती है।

    वैश्विक मुद्दों पर भी संवाद संभव
    सूत्रों के अनुसार, वार्ता में द्विपक्षीय विषयों के साथ यूक्रेन संकट, वैश्विक सुरक्षा हालात और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।

    तीसरे चरण में गड़बड़ी से प्रभावित हुआ PSLV-C62 मिशन, जांच में जुटा ISRO

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    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को साल के पहले ही मिशन में झटका लगा है। सोमवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 260 टन वजनी PSLV-C62 रॉकेट का प्रक्षेपण किया गया। इसके जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘अन्वेषा’ समेत 14 अन्य सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित किया जाना था।

    तीसरे चरण में आई तकनीकी गड़बड़ी
    उड़ान के दौरान रॉकेट के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी सामने आई। इसरो के अनुसार, इसी चरण में आई गड़बड़ी के बाद रॉकेट अपने तय रास्ते से भटक गया और मिशन अपने निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका।

    इसरो प्रमुख का बयान, जांच जारी
    इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि तीसरे चरण में असामान्यता दर्ज की गई है। उन्होंने बताया, “पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण किया जा रहा है। तकनीकी समस्या की वजह क्या रही, इसकी गहराई से जांच जारी है।”

    भरोसेमंद PSLV पर सवाल, लेकिन हौसला बरकरार
    पीएसएलवी को इसरो का सबसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यान माना जाता है, जिसने अब तक सैकड़ों उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाए हैं। ऐसे में इस मिशन में आई बाधा को एजेंसी के लिए एक बड़ा सबक माना जा रहा है। इसरो ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद खामियों को दूर किया जाएगा और भविष्य के अभियानों में और अधिक सतर्कता बरती जाएगी। एजेंसी जल्द ही अगला प्रक्षेपण करने की तैयारी में जुटी है।