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    घर खरीदारों की सोसायटी को झटका, दिवालिया प्रक्रिया में दखल पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

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    सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट से जुड़े दिवालिया मामलों में एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि जब कोई बैंक या वित्तीय संस्था किसी डेवलपर के खिलाफ IBC के सेक्शन-7 के तहत कार्यवाही शुरू करती है, तो रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या कोई सोसायटी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया केवल लेनदार और कर्जदार के बीच की होती है।

    थर्ड पार्टी को न ट्रायल में अधिकार, न अपील में

    जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि सेक्शन-7 के तहत शुरू हुई कार्यवाही में RWA जैसी थर्ड पार्टी को न तो पहली अदालत में और न ही अपील के स्तर पर सुनवाई का अधिकार है। कोर्ट के मुताबिक, RWA न तो खुद कर्ज देने वाली संस्था है और न ही कानून उसे खरीदारों का अधिकृत प्रतिनिधि मानता है।

    खुद कर्जदार होने पर ही दावा संभव

    अदालत ने स्पष्ट किया कि घर खरीदारों को IBC के तहत वित्तीय लेनदार माना गया है, लेकिन यह दर्जा किसी सोसायटी या एसोसिएशन को तब तक नहीं मिल सकता, जब तक वह स्वयं कर्जदार न हो। कोर्ट ने कहा कि एक सोसायटी अपने सदस्यों से अलग एक कानूनी इकाई होती है और बिना प्रत्यक्ष वित्तीय दावे के वह लेनदार नहीं बन सकती।

    कानून का दायरा बढ़ने की आशंका

    सुप्रीम कोर्ट ने चेताया कि यदि RWA को शुरुआत में ही दखल की अनुमति दी गई, तो इससे कानून का दायरा अनावश्यक रूप से बढ़ जाएगा। इससे डेवलपर अपनी समस्याओं को टालने के लिए सामूहिक हितों का बहाना बना सकते हैं। कोर्ट ने बताया कि दिवालियापन प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही घर खरीदारों का सामूहिक प्रतिनिधित्व अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से होता है।

    खरीदारों के हित सुरक्षित रहेंगे

    हालांकि RWA की सीधी दखलंदाजी सीमित कर दी गई है, लेकिन कोर्ट ने जोर देकर कहा कि IBC के तहत घर खरीदारों के हितों की पूरी सुरक्षा की जाती है। भविष्य में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अदालत ने कुछ दिशानिर्देश भी जारी किए, जिनमें सूचना ज्ञापन में सभी अलॉटीज का विवरण देना और परिसमापन की सिफारिश के लिए ठोस कारण दर्ज करना शामिल है।

    क्या है मामला

    यह फैसला गुजरात के अहमदाबाद स्थित ‘तक्षशिला एलेगना’ परियोजना से जुड़े मामले में आया। डेवलपर ने ईसीएल फाइनेंस से करीब 70 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। चूक के बाद यह ऋण एडेलवाइस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया, जिसने IBC की धारा-7 के तहत दिवालिया कार्यवाही शुरू की। एनसीएलटी से राहत न मिलने पर एनसीएलएटी ने CIRP शुरू करने का आदेश दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।

    वोटिंग के बाद हिंदी से हिचके आमिर खान, “ये महाराष्ट्र है भाई” कहने पर विवाद

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    bollywood desk:
    मुंबई में 15 जनवरी 2026 को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव हुए। बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां मतदान के लिए पोलिंग बूथ पर पहुंचीं। अक्षय कुमार, हेमा मालिनी, गुलजार और सौम्या टंडन के साथ आमिर खान भी वोट डालने पहुंचे। वोटिंग के बाद जब आमिर बाहर निकले तो मीडिया ने उन्हें घेर लिया। बातचीत के दौरान आमिर मराठी भाषा में जवाब देने लगे।

    “ये महाराष्ट्र है भाई” – एक लाइन से शुरू हुआ विवाद

    इसी दौरान एक पत्रकार ने उनसे हिंदी में बोलने का अनुरोध किया। इस पर आमिर ने चौंकते हुए कहा, “हिंदी में? ये महाराष्ट्र है भाई!” बस यही एक लाइन सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और आमिर नए विवाद में घिर गए। कुछ लोगों ने इसे मराठी भाषा के सम्मान के रूप में देखा, जबकि कई लोगों का कहना था कि हिंदी फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता को हिंदी में बोलने से हिचकिचाना नहीं चाहिए था।

    सोशल मीडिया पर बंटी राय

    आमिर के वीडियो पर सोशल मीडिया में तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने लिखा कि लोग उनके व्यंग्य को समझ नहीं पाए और उन्होंने मजाकिया अंदाज़ में बात कही थी। वहीं, कई लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि “हिंदी से ही घर चलता है” और “अगर मराठी ही बोलनी है तो फिर हिंदी फिल्में क्यों बनाते हो?” इस तरह आमिर के बयान को लेकर समर्थन और विरोध, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    महाराष्ट्र में भाषा को लेकर पहले से संवेदनशील माहौल

    महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी भाषा को लेकर माहौल पहले से ही संवेदनशील रहा है, खासकर चुनावी समय में यह मुद्दा और ज्यादा गरम हो जाता है। कई संगठन चाहते हैं कि राज्य में मराठी को प्राथमिकता दी जाए और उसे सम्मान मिले। बीते समय में जबरन मराठी बोलने से जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आ चुके हैं। ऐसे माहौल में आमिर का यह बयान और ज्यादा चर्चा में आ गया।

    44 साल की उम्र में सीखी थी मराठी

    आमिर खान पहले भी बता चुके हैं कि उन्होंने 44 साल की उम्र में मराठी भाषा सीखी थी। उनका कहना रहा है कि इससे उन्हें राज्य की संस्कृति और लोगों को बेहतर समझने में मदद मिली।

    अब आमिर का यह बयान महज एक मजाक था या कोई गहरा संदेश—इस पर बहस तेज़ हो चुकी है। लेकिन इतना साफ है कि भाषा का मुद्दा एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति और समाज के केंद्र में आ गया है।

    अगर भारत में आरएसएस नहीं होती तो हिन्दू नहीं बचते” – धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान

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    MP News: मशहूर कथावाचक और बागेश्वर धाम के पीठाधीश धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आरएसएस को लेकर बड़ा बयान दिया है। छतरपुर के बड़ामलहरा में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की खुलकर सराहना की।उन्होंने कहा कि, “अगर भारत में आरएसएस नहीं होती, तो आज हिन्दू नहीं बचते।”
    शास्त्री ने हिंदू एकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि समाज को संगठित रहना होगा।

    शताब्दी वर्ष में संघ के योगदान की सराहना

    हिंदू सम्मेलन के दौरान उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि आरएसएस ने देश और समाज के लिए ऐतिहासिक योगदान दिया है।
    उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का ज़िक्र करते हुए चिंता जताई और कहा कि अगर आज हम नहीं जागे, तो कल हमारी हालत भी वैसी हो सकती है।

    जातिवाद छोड़ने की अपील

    हजारों लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा,
    “हमें जातिवाद छोड़कर एकजुट होना होगा। हिंदू समाज को बंटने से बचाना ही समय की सबसे बड़ी जरूरत है।”

    उन्होंने कहा कि हिंदू तभी सुरक्षित रह सकते हैं जब वे संगठित और जागरूक होंगे।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। उनके लाखों अनुयायी हैं, जो उनकी बातों को गंभीरता से सुनते और अपनाते हैं।

    मध्यप्रदेश को AI हब बनाने का विजन पेश करेंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव, भोपाल में बड़ा सम्मेलन

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    MP Regional AI Impact Conference–2026: मध्यप्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शासन और विकास का मजबूत आधार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। गुरुवार को भोपाल के ताज लेकफ्रंट होटल में “मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026” का आयोजन होगा। इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होकर एआई आधारित शासन और आर्थिक विकास को लेकर प्रदेश का रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम की थीम “AI-enabled Governance for an eMPowered Bharat” रखी गई है, जो डिजिटल और तकनीकी रूप से सशक्त भारत की परिकल्पना को दर्शाती है।

    एआई से सशक्त शासन की दिशा

    कॉन्फ्रेंस का आयोजन मध्यप्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इंडिया एआई मिशन के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें आईआईटी इंदौर नॉलेज पार्टनर और आईआईटीआई-दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन प्रदर्शनी भागीदार के रूप में शामिल होंगे।
    प्रारंभिक सत्र में इंडिया एआई के सीईओ अभिषेक सिंह और आईआईटी इंदौर के निदेशक सुहास एस. जोशी विचार रखेंगे। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस” विषय पर प्रदेश का एआई विजन प्रस्तुत करेंगे, जबकि मुख्य सचिव अनुराग जैन भी सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

    मध्यप्रदेश इनोवेशन एक्सपो का उद्घाटन

    कार्यक्रम के दौरान “मध्यप्रदेश इनोवेशन एक्सपो” का उद्घाटन किया जाएगा। इसमें इंडिया एआई पवेलियन, मध्यप्रदेश पवेलियन, स्टार्टअप शोकेस, हैकाथॉन एरिना और स्टार्टअप प्रतियोगिता शामिल रहेंगी।
    यह एक्सपो प्रदेश के युवाओं, नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप्स को अपनी तकनीकी क्षमताएं दिखाने का मंच देगा। इसके माध्यम से सरकार और उद्योग जगत के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और नए निवेश के रास्ते खुलेंगे।

    तीन प्रमुख सत्रों में होगी व्यापक चर्चा

    कॉन्फ्रेंस में तीन मुख्य सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें टेक्नोलॉजी आधारित शासन, आर्थिक विकास व सामाजिक कल्याण में एआई की भूमिका और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर व नवाचार जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
    इन सत्रों में डिजिटल इंडिया-भाषिणी, यूआईडीएआई, एनईपीडी, विभिन्न राज्य सरकारों के प्रतिनिधि और गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, डिलोट्टी व ईवाई जैसे अग्रणी संगठनों के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। इससे नीति-निर्माताओं को एआई के व्यावहारिक उपयोगों की स्पष्ट दिशा मिलेगी।

    स्टार्टअप्स और नवाचार को मिलेगा बड़ा मंच

    सम्मेलन में एमपी इनोटेक स्टार्टअप पिच कंटेस्ट और उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन के विजेताओं की घोषणा भी की जाएगी। कार्यक्रम के अंत में नए पोर्टल्स का शुभारंभ, महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर और नवाचार से जुड़ी अहम घोषणाएं की जाएंगी।
    यह कॉन्फ्रेंस न केवल मध्यप्रदेश को तकनीकी रूप से आगे बढ़ाने का रोडमैप तय करेगी, बल्कि प्रदेश को एआई आधारित शासन और विकास के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

    I-PAC रेड मामला: ईडी अफसरों पर FIR पर रोक, ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

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    National desk:
    कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC कार्यालय और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। इस दौरान ईडी और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक ईडी अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की FIR दर्ज नहीं होगी। साथ ही ममता बनर्जी सरकार और राज्य के डीजीपी को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।

    ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

    सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के डीजीपी को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि एजेंसी के काम में इस तरह का दखल स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, CCTV फुटेज और सबूत सुरक्षित रखे जाएं।
    पीठ ने साफ किया कि अगली सुनवाई तक ईडी अधिकारियों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को उसके कानूनी कर्तव्यों से नहीं रोका जा सकता और इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

    कोर्ट रूम को जंतर-मंतर बना दिया गया’

    जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कोलकाता हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अव्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई। ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एएसजी एस.वी. राजू ने बताया कि सुनवाई के दौरान बार-बार माइक बंद किया गया और एजेंसी को अपनी बात रखने में परेशानी हुई।
    ईडी का आरोप है कि कोर्ट रूम में भीड़ जुटाने के लिए बसों और गाड़ियों की व्यवस्था की गई थी। हालात ऐसे हो गए कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को आदेश देना पड़ा कि केवल वकीलों को ही प्रवेश दिया जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “भीड़ ऐसे बुला ली गई थी, जैसे कोई प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर हो।”

    रेड में हस्तक्षेप और दस्तावेज ले जाने का आरोप

    ईडी ने आरोप लगाया कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण व अहम दस्तावेज अपने साथ ले गईं। एजेंसी के मुताबिक, मुख्यमंत्री के साथ राज्य के डीजीपी और बड़ी पुलिस टीम भी मौजूद थी।
    ईडी का दावा है कि पुलिस ने एजेंसी के अधिकारियों के मोबाइल फोन तक छीन लिए, जिससे जांच में बाधा आई और एजेंसी का मनोबल गिरा। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस तरह के हस्तक्षेप में शामिल अधिकारियों को निलंबित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसा उदाहरण दोहराया न जाए।

    बंगाल सरकार का पक्ष और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ईडी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केवल प्रतीक जैन का लैपटॉप और निजी आईफोन लेकर गई थीं, क्योंकि उसमें चुनाव से जुड़ा संवेदनशील डेटा था। सिब्बल के अनुसार, रेड में कोई बाधा नहीं डाली गई।
    इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार का यह दावा सही नहीं लगता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि ईडी दस्तावेज जब्त करना चाहती, तो वह ऐसा कर सकती थी। अदालत ने साफ कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की जांच जरूरी है और सरकार नोटिस जारी करने से कोर्ट को नहीं रोक सकती।
    ईडी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अवैध कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में वहां गई थी। एजेंसी के अनुसार, जांच में हवाला चैनल और करीब 20 करोड़ रुपये की नकद लेन-देन के सबूत मिले हैं, जिसके चलते 8 जनवरी को I-PAC से जुड़े 10 ठिकानों पर तलाशी ली गई।

    165 करोड़ की गोल्ड चोरी का मास्टरमाइंड: कौन है प्रीत पनेसर, जिसकी एक्सट्रडिशन की मांग कर रहा है कनाडा

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    Canada Gold Heist:
    कनाडा भारत से प्रीत पनेसर को सोपें जाने की मांग कर रहा है | 2023 में कनाडा में सबसे बड़ी गोल्ड चोरी हुई थी | इस चोरी का मास्टरमाइंड प्रीत पनेसर है | जो की भारतीय मूल का है ,फ़िलहाल वो कनाडा से भाग कर पंजाब में छुपा हुआ है |कनाडा भारत से उसे गिरफ्तार कर कनाडा को सोपने की मांग कर रहा है |

    2023 में हुई थी सबसे बड़ी गोल्ड चोरी

    कनाडा में 2023 में $20 मिलियन (करीब 165 करोड़ रुपये) का सोना चोरी हुआ था। इसे वहां की अब तक की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी माना जाता है। इस मामले में मुख्य आरोपी प्रीत पनेसर है, जिसने बेहद चालाकी से सिस्टम में हेरफेर कर सोने को बाहर निकलवाने की साजिश रची।

    भारत में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

    भारत में इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। ED का आरोप है कि चोरी के बाद प्रीत पनेसर को भारत में हवाला के जरिए 8.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम मिली। यह पैसा सीधे इस्तेमाल न होकर अलग-अलग रास्तों से घुमाया गया।

    फिल्म–म्यूजिक के जरिए पैसा घुमाया गया

    ED के मुताबिक यह रकम कथित तौर पर म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री के माध्यम से सफेद की गई, खासकर पनेसर की पत्नी की फिल्म और उनकी प्रोडक्शन कंपनी के नाम पर। जांच में ऐसे दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि पैसा पहले अलग-अलग खातों में जमा हुआ और फिर उनकी कंपनी Star Makers Entertainment में “निवेश” के रूप में ट्रांसफर किया गया।

    चोरी का मास्टरप्लान

    कनाडा पुलिस के अनुसार, सोना एक विदेशी कंपनी से एयर कार्गो के जरिए Toronto Pearson Airport पहुंचा था। यह सोना एक बड़े कंटेनर में था, जिसे कस्टम और सिक्योरिटी क्लियरेंस के बाद एयरपोर्ट के कार्गो एरिया में रखा गया। उसी समय प्रीत पनेसर Air Canada का कर्मचारी |था और उसे कार्गो सिस्टम की पूरी जानकारी थी। उसने सिस्टम में पहचान कर ली कि कौन-सा कंटेनर सोने से भरा है, फिर रिकॉर्ड में हेरफेर कर उसे “सामान्य माल” दिखाया गया, जिसके बाद उसके साथियों ने उस कंटेनर को आम शिपमेंट की तरह बाहर निकाल लिया। इसी अंदरूनी साजिश से करोड़ों का सोना बिना किसी शोर के एयरपोर्ट से बाहर चला गया।
    ये भी पढ़ें: नई सैन्य रणनीति की ओर भारत: भारतीय सेना बनाएगी विशेष रॉकेट–मिसाइल फोर्स, बढ़ेगी देश की स्ट्राइक पावर

    नई सैन्य रणनीति की ओर भारत: भारतीय सेना बनाएगी विशेष रॉकेट–मिसाइल फोर्स, बढ़ेगी देश की स्ट्राइक पावर

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    भारतीय सेना अब भविष्य की जंग के लिए खुद को नए सिरे से तैयार कर रही है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऐलान किया है कि भारत को एक अलग और विशेष रॉकेट-मिसाइल फोर्स की जरूरत है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव और बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए सेना अपनी युद्ध क्षमता को आधुनिक बना रही है। चीन और पाकिस्तान पहले से ही इस तरह की यूनिट्स बना चुके हैं, ऐसे में भारत भी अब इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ने की तैयारी में है।

    क्यों जरूरी है रॉकेट-मिसाइल फोर्स

    सेना दिवस से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्मी चीफ ने कहा कि आज के आधुनिक युद्ध में रॉकेट और मिसाइल को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। अब जरूरत है कि इन सभी हथियारों को एक ही कमांड के तहत लाया जाए। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान पहले ही अपनी रॉकेट फोर्स बना चुका है और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स उसकी सबसे ताकतवर शाखाओं में गिनी जाती है। ऐसे में भारत के लिए भी यह समय की मांग बन चुकी है कि वह एक समर्पित रॉकेट-मिसाइल फोर्स खड़ी करे, जिससे तेज़ और निर्णायक जवाब दिया जा सके।

    इस फोर्स में क्या होगा खास

    जनरल द्विवेदी के मुताबिक, इस फोर्स में ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम, रॉकेट और मिसाइलों को एक साथ शामिल किया जाएगा। पिनाका रॉकेट सिस्टम की रेंज पहले ही 120 किलोमीटर तक पहुंच चुकी है, जिसे 150 किलोमीटर और भविष्य में 300–450 किलोमीटर तक बढ़ाने की तैयारी है। इसके साथ प्रलय मिसाइल और ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां भी इस फोर्स की ताकत बनेंगी। इसका मकसद दुश्मन के एयरबेस, कमांड सेंटर और रणनीतिक ठिकानों पर तेज़, सटीक और दूर तक असर डालना है, ताकि भारत किसी भी चुनौती का मजबूत जवाब दे सके।

    डिग्री नहीं, हुनर चाहिए: Google खोल रहा है बिना कॉलेज वाले युवाओं के लिए नौकरियों के दरवाज़े

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    newsdeskthajansatta:
    Google अब सिर्फ कॉलेज डिग्री के आधार पर नहीं, बल्कि स्किल्स के दम पर लोगों को नौकरी दे रहा है। कंपनी बिना डिग्री वाले युवाओं को भी अच्छी सैलरी वाली जॉब ऑफर कर रही है। खुद Google के को-फाउंडर सर्गी ब्रिन ने बताया कि बदलते दौर में डिग्री से ज्यादा जरूरी असली टैलेंट और सीखने की क्षमता है। बर्निंग ग्लास इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2022 के बीच Google की डिग्री-आधारित जॉब पोस्टिंग 93% से घटकर 77% रह गई है, यानी बिना डिग्री नौकरी पाने वालों की हिस्सेदारी 16% बढ़ी है।

    क्यों घट रही है डिग्री की अहमियत

    स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों से बातचीत में सर्गी ब्रिन ने कहा कि Google कभी सिर्फ अकादमिक बैकग्राउंड देखकर हायरिंग करने वाली कंपनी नहीं रही। उन्होंने बताया कि कंपनी ने कई ऐसे लोगों को भी नौकरी दी है जिनके पास बैचलर डिग्री नहीं थी, लेकिन वे खुद सीखकर आगे बढ़े। ब्रिन के मुताबिक, आज के दौर में यह ज्यादा मायने रखता है कि कोई व्यक्ति क्या कर सकता है, न कि उसके पास कौन-सी डिग्री है।

    AI ने बदला हायरिंग का तरीका

    एंट्री लेवल जॉब्स पर AI का बड़ा असर पड़ा है। अब कंपनियां डिग्री के बजाय स्किल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। यही वजह है कि Google ही नहीं, बल्कि Microsoft, Apple और Cisco जैसी कंपनियां भी स्किल-बेस्ड हायरिंग की ओर बढ़ रही हैं। सर्गी ब्रिन का मानना है कि युवाओं को डर के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार करियर चुनना चाहिए, क्योंकि आने वाला समय डिग्री से ज्यादा हुनर को पहचान देगा।

    इस बदलाव पर टेस्ला और स्पेसएक्स के फाउंडर एलन मस्क भी अपनी राय रख चुके हैं। उनका मानना है कि AI के दौर में कॉलेज की डिग्री का महत्व धीरे-धीरे कम होता जाएगा। मस्क के मुताबिक, आने वाले समय में मशीनें और AI इंसानों से बेहतर काम करने लगेंगी, यहां तक कि मेडिकल जैसे क्षेत्रों में भी बड़ा बदलाव आएगा। ऐसे में भविष्य उन्हीं युवाओं का होगा जो तेजी से सीखने की क्षमता रखते हैं और खुद को समय के साथ अपडेट कर पाते हैं, क्योंकि अब डिग्री नहीं, बल्कि स्किल ही असली पहचान बन रही है।

    स्पेन को मिलने जा रही है पहली युवा महारानी, 150 साल बाद रचेगा इतिहास

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    स्पेन एक बार फिर इतिहास के नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। करीब 150 वर्षों के बाद देश को फिर से एक महारानी मिलने वाली है। यह गौरव 20 साल की राजकुमारी लियोनोर को मिलने जा रहा है, जो स्पेन के राजा किंग फेलिप छठे और रानी लेटिजिया की बड़ी बेटी हैं। लियोनोर देश की अगली महारानी बनेंगी और आधुनिक स्पेन की पहली महिला शासक होंगी। इससे पहले 19वीं सदी में इसाबेला द्वितीय ने स्पेन की महारानी के रूप में राज किया था।

    कौन हैं प्रिंसेस लियोनोर

    राजकुमारी लियोनोर सिर्फ शाही परिवार की उत्तराधिकारी नहीं हैं, बल्कि वह एक आधुनिक सोच रखने वाली युवा नेता के रूप में उभर रही हैं। वह एक प्रशिक्षित पायलट हैं और कई भाषाओं में दक्ष हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह लगातार अपनी जिम्मेदारियों के लिए खुद को तैयार कर रही हैं, ताकि भविष्य में देश की बागडोर संभाल सकें।

    क्यों खास है उनका राज

    स्पेन में बॉर्बन राजवंश का शासन 1700 के दशक से चला आ रहा है। अब इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लियोनोर देश की कमान संभालेंगी। उनकी ताजपोशी न केवल शाही इतिहास का नया अध्याय होगी, बल्कि यह आधुनिक स्पेन में महिला नेतृत्व की एक मजबूत मिसाल भी बनेगी। कम उम्र, नई सोच और मजबूत तैयारी के साथ प्रिंसेस लियोनोर आने वाली पीढ़ी के लिए बदलाव और उम्मीद की प्रतीक बनकर सामने आएंगी।

    इन-सर्विस डॉक्टरों को पीजी के बाद ग्रामीण सेवा बांड नहीं भरना होगा: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला”

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    मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा है कि राज्य सरकार की सेवा में पहले से कार्यरत इन-सर्विस डॉक्टरों पर पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) के बाद ग्रामीण सेवा बांड लागू नहीं होता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 के प्रवेश नियमों का नियम-11 केवल नए चयनित अभ्यर्थियों पर लागू है, न कि उन डॉक्टरों पर जो पहले से सरकारी सेवा में हैं।

    याचिकाकर्ता का पक्ष

    डा. दीपाली बैरवा ने याचिका दायर कर ग्रामीण सेवा बांड से मुक्त किए जाने और अपने मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र लौटाने की मांग की थी। उन्होंने मार्च 2017 में एनेस्थीसिया में पीजी डिप्लोमा पूरा किया था। उनका तर्क था कि परिणाम घोषित होने के तीन महीने के भीतर उन्हें ग्रामीण सेवा की कोई पदस्थापना नहीं मिली, इसलिए नियमों के अनुसार बांड स्वतः समाप्त माना जाना चाहिए।

    सरकार की दलील

    राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता को दिया गया अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) स्पष्ट शर्तों के साथ था, जिसमें सुपर स्पेशियलिटी/पीजी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद एक वर्ष की अनिवार्य ग्रामीण सेवा का उल्लेख था। साथ ही यह भी बताया गया कि उनके मूल प्रमाण-पत्र पहले ही अंतरिम आदेश के तहत लौटा दिए गए थे।

    कोर्ट की टिप्पणी

    कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता पहले से ही रतलाम में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं और यह महत्वपूर्ण तथ्य उन्होंने याचिका में छिपाया। इस आधार पर याचिका को निरस्त कर दिया गया। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में यह महत्वपूर्ण सिद्धांत स्पष्ट कर दिया कि इन-सर्विस डॉक्टरों पर पीजी के बाद ग्रामीण सेवा बांड का नियम लागू नहीं होता।

    इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए संदेश

    इस फैसले से प्रदेश के उन डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है, जो पहले से सरकारी सेवा में रहते हुए पीजी करते हैं। हाई कोर्ट की यह व्याख्या भविष्य में ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में काम करेगी।