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    छह माह पहले भस्म हुआ यूका का जहरीला कचरा, अब 900 टन राख हमेशा के लिए जमीन में दफन

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    Indore News: भोपाल गैस कांड से जुड़ी यूनियन कार्बाइड फैक्टरी की जहरीली राख को इंदौर के पास पीथमपुर में लैंडफिल कर दिया गया है। यह वही राख है जो छह माह पहले विषैले कचरे को जलाने के बाद बची थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर करीब 900 टन राख को सुरक्षित रूप से जमीन में दफन किया गया।

    आधा किलोमीटर दूर है आबादी

    प्रशासन के अनुसार जिस परिसर में यह राख दफन की गई है, वह आबादी क्षेत्र से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित है। इससे पहले भी यहां 30 टन से अधिक जहरीला कचरा लैंडफिल किया जा चुका है।

    ग्रामीणों की चिंता बरकरार

    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले किए गए लैंडफिल के बाद गांव की नदी का पानी काला हो गया था। उस पानी से फसलें खराब हो जाती हैं और पशु बीमार पड़ जाते हैं। इसी कारण वे अब इस पानी का उपयोग नहीं करते। नई राख के दफन से लोगों में फिर से चिंता गहरा गई है।

    त्रासदी की यादें अब भी जिंदा

    42 साल पहले भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से रिसी जहरीली गैस ने हजारों लोगों की जान ली थी। गर्भवती महिलाओं और उनकी संतानों तक पर इसका असर पड़ा। उस हादसे के अवशेष अब राख के रूप में खत्म किए जा रहे हैं, लेकिन पीड़ितों की पीड़ा और भय आज भी लोगों के मन में जीवित है।

    यह लैंडफिल प्रक्रिया प्रशासन के लिए एक कानूनी दायित्व जरूर है, लेकिन पीथमपुर और आसपास के गांवों के लिए यह भविष्य को लेकर एक नई आशंका भी बन गई है।

    विश्वविद्यालयों के नामकरण पर सियासी घमासान: सीएम के बयान पर भूरिया का पलटवार, बोले– आदिवासी इतिहास से हो रहा खिलवाड़

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    MP news: मध्यप्रदेश में नए विश्वविद्यालयों के नामकरण को लेकर राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा तात्या टोपे और रानी अवंतीबाई लोधी को “जनजातीय नायक” बताए जाने पर आदिवासी कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी का कहना है कि इससे न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी हो रही है, बल्कि आदिवासी पहचान को भी कमजोर किया जा रहा है।

    सीएम ने क्या कहा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि प्रदेश में तीन नए विश्वविद्यालय—

    • क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय (खरगोन)

    • क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय (गुना)

    • रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय (सागर)

    जनजातीय नायकों की स्मृति में स्थापित किए गए हैं। उन्होंने इसे शिक्षा के विस्तार और जनजातीय समाज के सम्मान से जोड़ा।

    भूरिया बोले– इतिहास से खिलवाड़

    आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री के बयान पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तात्या टोपे मराठा समाज से थे और रानी अवंतीबाई लोधी ओबीसी वर्ग से थीं। ऐसे में उन्हें आदिवासी नायक बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
    भूरिया ने आरोप लगाया कि गैर-आदिवासी नायकों के नाम पर जनजातीय स्मृति गढ़ी जा रही है, जो आदिवासी समाज के इतिहास और पहचान—दोनों के साथ अन्याय है।

    असली जनजातीय नायकों को सामने लाने की मांग

    भूरिया ने सरकार से मांग की कि यदि वास्तव में आदिवासी समाज को सम्मान देना है, तो बिरसा मुंडा, भीमा नायक, राजा शंकर शाह–रघुनाथ शाह और रानी दुर्गावती जैसे जनजातीय नायकों को आगे लाया जाए।
    उन्होंने कहा कि यह केवल प्रचार का विषय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक ईमानदारी का सवाल है, जिसे सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए।

    उज्जैन में UGC के नए कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, ‘काला कानून’ वापस लेने की उठी मांग

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    mp news:
      उज्जैन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। टॉवर चौक पर सवर्ण समाज और छात्रों ने सड़कों पर उतरकर इस कानून को “काला और विभाजनकारी” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की।

    समाज के नेताओं की आपत्ति

    प्रदर्शन के दौरान पं. सुरेंद्र चतुर्वेदी (अ.भा. ब्राह्मण समाज अध्यक्ष) और पं. महेश शर्मा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अ.भा. पुजारी महासंघ) ने UGC नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि समानता के नाम पर लाया गया कोई भी कानून यदि असमानता का भय पैदा करता है, तो उस पर पुनर्विचार आवश्यक है। 21वीं सदी जातिवाद के अंत का समय है और हिंदू समाज की एकता बनाए रखना जरूरी है।

    टॉवर चौक पर नारेबाजी

    टॉवर चौक पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। “काला कानून वापस लो” के नारे लगाए गए। बटुकों और समाज के सदस्यों ने तख्तियां व बैनर लेकर UGC के नए कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया।

    छात्रों का उग्र विरोध

    छात्रों ने हाथों में पोस्टर लेकर धरना दिया और “UGC रोल बैक” के नारे लगाए। उन्होंने नए बिल को ‘विभाजनकारी’ बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा का निजीकरण और छात्रों के बीच बंटवारा बढ़ेगा। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि बिल जल्द वापस नहीं लिया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

    क्या है UGC का नया रेगुलेशन?

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 15 जनवरी 2026 से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू किए हैं। इसका उद्देश्य कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकना और सभी वर्गों के लिए सुरक्षित व सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना बताया गया है।

    नए कानून में क्या बदला?

    पहले जातिगत भेदभाव की शिकायतें मुख्य रूप से एससी-एसटी तक सीमित मानी जाती थीं। नए नियमों में ओबीसी वर्ग को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अब ओबीसी छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत आधिकारिक तौर पर दर्ज करा सकेंगे। यही प्रावधान विरोध का मुख्य कारण बन गया है।

    बजट 2026 से पहले पीएम मोदी का विज़न: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार आत्मनिर्भर भारत

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    national desk:
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सर्वे से पहले संसद को संबोधित करते हुए कहा कि देश का ध्यान केंद्रीय बजट पर केंद्रित होना स्वाभाविक है, क्योंकि यही बजट देश की आर्थिक दिशा और विकास की प्राथमिकताएं तय करता है। लेकिन सरकार की पहचान केवल बजट तक सीमित नहीं रही है। बीते वर्षों में सरकार ने ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ की नीति के जरिए देश के विकास को नई गति दी है।

    ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

    पीएम मोदी ने कहा कि अब भारत सुधारों की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह यात्रा केवल सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद के सभी सदस्यों के सकारात्मक सहयोग से इसे मजबूती मिल रही है। उन्होंने सांसदों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश अब पुरानी समस्याओं से निकलकर स्थायी और दूरगामी समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    भारत–ईयू एफटीए को बताया आत्मनिर्भरता की राह

    प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता देश के उज्ज्वल भविष्य और युवाओं के लिए नई संभावनाएं लेकर आएगा। पीएम ने इसे “महत्वाकांक्षी भारत, आकांक्षी युवाओं और आत्मनिर्भर राष्ट्र के लिए मुक्त व्यापार” करार दिया।

    विकसित भारत 2047 का रोडमैप

    पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का पहला चौथाई हिस्सा पूरा हो चुका है और अब अगले चरण की शुरुआत हो रही है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आने वाले 25 साल बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इसी नए दौर का पहला बजट जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा।

    निर्मला सीतारमण रचेंगी इतिहास

    प्रधानमंत्री ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करने जा रही हैं। उन्होंने इसे संसदीय इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया और कहा कि यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती को दर्शाता है।

    राष्ट्रपति के अभिभाषण का उल्लेख

    पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और विश्वास की अभिव्यक्ति है, खासकर युवाओं की उम्मीदों का। उन्होंने भरोसा जताया कि संसद के सभी सदस्य इस संदेश को गंभीरता से लेंगे।

    UGC विवाद पर केंद्र सरकार का बयान, बोले शिक्षा मंत्री– किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा

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    नई दिल्ली।
    यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (UGC) के नए नोटिफिकेशन को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार आधिकारिक बयान दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र या शिक्षक के साथ भेदभाव या उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।

    शिक्षा मंत्री का आश्वासन:
    मीडिया से बातचीत के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कोई भी कानून या नियम किसी के खिलाफ दुरुपयोग के लिए नहीं बनाया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चाहे UGC हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार—किसी स्तर पर भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।

    संविधान के दायरे में होंगे सभी फैसले:
    शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो भी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, वे पूरी तरह संविधान की सीमा में हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह पूरा विषय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और सरकार सभी पक्षों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है।

    क्या है UGC का नया नियम:
    UGC ने ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026’ लागू किए हैं। इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में Equity Committees और Equity Squads के गठन, 24×7 हेल्पलाइन, SC-ST छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण और नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला:
    UGC के नियम 3(सी) को लेकर आरोप लगाए गए हैं कि इसमें अनारक्षित वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को नजरअंदाज किया गया है। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि जाति आधारित भेदभाव केवल SC-ST-OBC तक सीमित मानना सही नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल मंदिर में वीआईपी दर्शन याचिका खारिज की

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    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी दर्शन के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक मामलों का नियमन न्यायिक क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और ऐसे मामलों में मंदिर प्रबंधन के लोग ही निर्णय करें।

    याचिकाकर्ता को निर्देश:
    मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस आर. महादेवन और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी को सुझाव दिया कि वे अपनी बात मंदिर अथॉरिटी के सामने रखें।

    वकील का तर्क:
    वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि नागरिकों के साथ वीआईपी दर्जे के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि या तो सभी भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश का समान अधिकार होना चाहिए या किसी को भी नहीं।

    हाई कोर्ट का आदेश:
    याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें वीआईपी दर्शन के खिलाफ याचिका को खारिज किया गया था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वीआईपी की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है और यह मंदिर प्रबंधन और कलेक्टर के प्रशासनिक विवेक का मामला है।

    कोर्ट का तर्क:
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गर्भगृह में मौलिक अधिकार लागू करने से अनजाने परिणाम हो सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) को गर्भगृह में लागू माना गया, तो अन्य अधिकारों जैसे अनुच्छेद 19 (भाषण की स्वतंत्रता) का भी दावा किया जा सकता है।

    इंदौर: भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड में हाईकोर्ट में सुनवाई, दो मरीज गंभीर


    भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल कांड की मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। नगर निगम को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी और दूषित पानी से हुई मौतों की जानकारी अफसरों को कोर्ट में देनी थी।

    मुख्य सचिव ने वर्चुअली दी जानकारी
    पिछली सुनवाई में मुख्य सचिव वर्चुअली उपस्थित हुए थे और प्रभावित मरीजों के इलाज तथा प्रशासन द्वारा किए गए कदमों की जानकारी दी थी। सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट नहीं किया कि दूषित पानी की समस्या क्यों उत्पन्न हुई।

    मौतों और ICU में भर्ती मरीजों की स्थिति
    अधिकारियों के अनुसार, अब तक 14 मौतें दूषित पानी के कारण हुई हैं, जबकि बाकी मामलों में अन्य बीमारियों की भी पुष्टि है। भागीरथपुरा में कुल 28 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं और आठ मरीज गंभीर हालत में आईसीयू में हैं।

    नई पाइपलाइन और जल आपूर्ति
    नगर निगम ने नई पाइपलाइन बिछाकर बस्ती के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में नर्मदा जल की आपूर्ति शुरू कर दी है। हालांकि, बस्ती में लगभग 50,000 निवासी हैं, लेकिन नई पाइपलाइन से वर्तमान में केवल 5,000 लोगों तक पानी पहुंच पा रहा है।

    राजनीतिक दबाव और कार्रवाई की मांग
    कांग्रेस पार्टी लगातार दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर रही है, जबकि प्रशासन ने अभी तक किसी के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

    MP News: क्या है ‘ग्रीन शिवरात्रि’? कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव की भव्य तैयारी

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    मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम इस वर्ष एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। 14 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक यहां रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसकी थीम इस बार ‘ग्रीन शिवरात्रि’ रखी गई है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश देगा।

    अंतरराष्ट्रीय कथा प्रवक्ता पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित हो रहे इस महोत्सव को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण से जुड़ा एक वैश्विक अभियान बताया जा रहा है। आयोजन समिति के अनुसार, महोत्सव के दौरान आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ पर्यावरण को बचाने और हरियाली बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    महाशिवरात्रि पर लगेगा एक करोड़ पौधों का संकल्प

    महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण 15 फरवरी, महाशिवरात्रि के दिन देखने को मिलेगा। इस दिन विठलेश सेवा समिति के माध्यम से देश-विदेश में एक ही दिन में एक करोड़ पौधारोपण किया जाएगा। इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित भविष्य का संदेश देगी।

    श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं

    कुबेरश्वर धाम में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भव्य पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही निशुल्क भोजन (भंडारा), स्वास्थ्य सेवाएं, एंबुलेंस, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और आयोजन समिति मिलकर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।

    धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण चेतना

    आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि ‘ग्रीन शिवरात्रि’ का उद्देश्य भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ प्रकृति को बचाने का संकल्प लेना है। रुद्राक्ष महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया जाएगा।

    कुल मिलाकर, सीहोर का कुबेरेश्वर धाम इस बार सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल बनने जा रहा है। ‘ग्रीन शिवरात्रि’ की यह पहल देश-दुनिया में एक सकारात्मक संदेश देने का काम करेगी।

    भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक FTA, ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से खुले दो अरब लोगों के लिए नए अवसर

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    भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चली आ रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत आखिरकार अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सोमवार को दोनों पक्षों के बीच इस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया, जिसे वैश्विक स्तर पर ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह समझौता भारत और यूरोप की करीब दो अरब आबादी के लिए नए आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा।

    यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि भारत और यूरोप ने मिलकर इतिहास रच दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि इस समझौते के साथ दुनिया का एक विशाल मुक्त व्यापार क्षेत्र अस्तित्व में आया है, जिससे दोनों पक्षों को समान रूप से लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में भारत-ईयू के रणनीतिक रिश्ते और मजबूत होंगे।

    पीएम मोदी बोले—दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का बड़ा तालमेल

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-ईयू एफटीए को बेहद अहम बताते हुए कहा कि इस समझौते की चर्चा पूरी दुनिया में ‘मदर ऑफ ऑल डील’ के रूप में हो रही है। उन्होंने कहा कि यह करार भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोपीय देशों की विशाल आबादी के लिए बड़े अवसर लेकर आया है। पीएम मोदी के मुताबिक यह समझौता वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत और ग्लोबल ट्रेड के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

    रक्षा सहयोग को लेकर भी अहम चर्चा

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि रक्षा सहयोग को लेकर भी बातचीत तेज हुई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूरोपीय संघ की विदेश एवं सुरक्षा मामलों की प्रमुख काजा कालास के बीच हुई बैठक में रक्षा क्षेत्र में सप्लाई चेन को जोड़ने, भरोसेमंद रक्षा इकोसिस्टम तैयार करने और भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं के विकास पर चर्चा हुई। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं।

    हैदराबाद हाउस में शुरू हुई उच्चस्तरीय बैठक

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा के साथ हैदराबाद हाउस में बैठक की। यह बैठक भारत-ईयू शिखर सम्मेलन का हिस्सा है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच व्यापक रणनीतिक एजेंडा अपनाने पर सहमति बनने की उम्मीद है।

    2007 में शुरू हुई थी बातचीत

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए को लेकर बातचीत पहली बार साल 2007 में शुरू हुई थी। हालांकि कई कारणों से यह प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही। बाद में 2022 में वार्ता को दोबारा शुरू किया गया और अब 2026 में इसे अंतिम रूप दे दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत और यूरोप के आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई

    Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर ‘कोल्ड डेजर्ट वॉरियर’, पहली बार परेड में उतरे मंगोलियाई ऊंट

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    77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर एक अनोखा नजारा देखने को मिला। परेड में पहली बार दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट शामिल किए गए, जिन्हें मंगोलियाई ऊंट भी कहा जाता है। ये ऊंट अब भारतीय सेना की ताकत बन चुके हैं।

    सेना की ताकत बने बैक्ट्रियन ऊंट

    भारतीय सेना आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक तरीकों को भी अपना रही है। पूर्वी लद्दाख की कठिन परिस्थितियों में भारी सामान ढोने और पेट्रोलिंग के लिए इन ऊंटों को शामिल किया गया है। जहां वाहन नहीं पहुंच पाते, वहां ये ऊंट सेना के काम आ रहे हैं।

    माइनस 40 डिग्री में भी अडिग

    बैक्ट्रियन ऊंट 15,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर काम कर सकते हैं। ये 150 से 200 किलो तक वजन उठा लेते हैं और माइनस 40 डिग्री तापमान में भी बिना किसी परेशानी के सक्रिय रहते हैं।

    लद्दाख में हो रहा इस्तेमाल

    पिछले दो वर्षों से ये ऊंट पूर्वी लद्दाख के दुर्गम इलाकों में सेना की मदद कर रहे हैं। पहले चरण में एक दर्जन से अधिक ऊंटों को शामिल किया गया है, जिन्हें हुंडर गांव में पाला जा रहा है।

    क्यों कहलाते हैं ‘कोल्ड डेजर्ट वॉरियर’

    इन ऊंटों की बनावट उन्हें भीषण ठंड से बचाती है। ये बिना पानी और भोजन के कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं। कठिन हालातों में यही खासियत इन्हें सेना का भरोसेमंद साथी बनाती है।

    भारत में कहां मिलते हैं

    भारत में बैक्ट्रियन ऊंट मुख्य रूप से लद्दाख और कोल्ड डेजर्ट इलाकों में पाए जाते हैं। यहां तापमान माइनस में चला जाता है, तेज हवाएं चलती हैं और ऑक्सीजन कम रहती है, फिर भी ये ऊंट आसानी से काम करते हैं।