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    भोपाल के एक्सीलेंस कॉलेज में छात्रों के साथ मारपीट, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

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    भोपाल — राजधानी भोपाल के एक्सीलेंस कॉलेज से जुड़ा एक मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ बाहरी युवक छात्रों के साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये युवक कॉलेज के छात्र नहीं थे और बाहर से आए थे।

    वायरल वीडियो में कॉलेज परिसर के पास अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है। कुछ छात्र खुद को बचाने की कोशिश करते दिखते हैं, जबकि कुछ के साथ मारपीट की जा रही है। घटना के बाद कॉलेज के छात्रों में दहशत और नाराजगी देखी जा रही है।

    सोशल मीडिया पर उठे सवाल

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। छात्र संगठनों और आम लोगों द्वारा इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

    जांच की मांग

    फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की मांग की जा रही है छात्र यह जानना चाहते हैं कि बाहरी लोग कॉलेज परिसर तक कैसे पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था क्यों नाकाम रही।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने का बड़ा आदेश दिया

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    नई दिल्ली:
    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड उपलब्ध कराएं। अदालत ने इस आदेश को मेंस्ट्रुअल हेल्थ यानी मासिक धर्म स्वास्थ्य के अधिकार के तहत संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा बताया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें वरिष्ठ न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन शामिल थे, ने कहा कि अगर सरकारें स्कूलों में टॉयलेट और मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने में विफल रहती हैं, तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।

    प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी

    अदालत ने स्पष्ट किया कि प्राइवेट स्कूलों को भी समान नियमों का पालन करना होगा। अगर वे लड़कियों और लड़कों के लिए अलग शौचालय और सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं, तो उनकी स्कूल मान्यता रद्द की जा सकती है।

    अलग शौचालय और दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं

    सुप्रीम कोर्ट ने सभी स्कूलों में महिला और पुरुष छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालय और दिव्यांग छात्रों के लिए अनुकूल टॉयलेट सुविधाएं सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया। यह आदेश 10 दिसंबर, 2024 को जया ठाकुर द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र सरकार की ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ पूरे भारत में लागू की जाए।

    सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश शैक्षणिक संस्थानों में लैंगिक समानता और स्वास्थ्य अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    अब टिकट बुक करेगा आपका ब्राउज़र! गूगल क्रोम में आ रहा है नया AI फीचर

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    utility news:
    वेबसाइट पर जाकर टिकट बुक करना या लंबा फॉर्म भरना अक्सर लोगों को बोरिंग काम लगता है। अगर ये सारे काम आपका ब्राउज़र खुद कर दे, तो कैसा हो? अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। गूगल क्रोम ब्राउज़र में जल्द ही एक नया और एडवांस फीचर आने वाला है, जिसे जेमिनी एआई से जोड़ा जा रहा है।

    इस नए अपडेट के साथ क्रोम ब्राउज़र अब एक एजेंटिक वेब ब्राउज़र के रूप में काम करेगा। यानी अब क्रोम सिर्फ सर्च करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूज़र के निर्देश पर टिकट बुक करना, ऑनलाइन फॉर्म भरना और अन्य वेब-आधारित काम अपने आप कर सकेगा। इसके लिए गूगल की ओर से ATLAS नाम के एजेंटिक सिस्टम को और अधिक विकसित किया जा रहा है।

    शुरुआती दौर में यह फीचर ट्रायल बेस पर उपलब्ध होगा। फिलहाल इसका उपयोग केवल चुनिंदा यूज़र्स ही कर पाएंगे। ट्रायल सफल रहने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से सभी के लिए जारी किया जाएगा।

    प्राइवेसी रहेगी पूरी तरह सुरक्षित

    इस फीचर को लेकर सबसे बड़ा सवाल यूज़र्स की प्राइवेसी का है। कंपनी के अनुसार, ब्राउज़र कोई भी काम यूज़र की अनुमति के बिना नहीं करेगा। फॉर्म भरने या टिकट बुक करने जैसे कार्यों पर पूरा कंट्रोल यूज़र के हाथ में रहेगा।

    कैसे करेगा काम

    अब तक एजेंटिक टूल्स किसी फॉर्म या बटन के अंदर मौजूद जानकारी को खुद से समझने में सक्षम नहीं थे। लेकिन नए अपडेट के बाद क्रोम ब्राउज़र खुद उस बॉक्स पर क्लिक कर जानकारी भर सकेगा। इसके लिए यूज़र को सिर्फ एक सरल प्रॉम्प्ट देना होगा।

    बेहतर होगा ब्राउज़िंग अनुभव

    इस फीचर के आने से ब्राउज़िंग अनुभव पहले से कहीं अधिक आसान और तेज़ हो जाएगा। इससे समय की बचत होगी और ऑनलाइन कामकाज ज्यादा प्रोडक्टिव बन सकेगा।

    देश की निचली अदालतों में आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व: आधे से ज्यादा राज्यों में बड़ी हिस्सेदारी

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    राज्यसभा में सरकार ने पेश किया ब्योरा
    नई दिल्ली: देशभर की निचली अदालतों (जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय) में ओबीसी, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के जजों की संख्या को लेकर केंद्र सरकार ने ताजा आंकड़े पेश किए हैं। राज्यसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि इस समय देश में कुल 20,833 जज निचली अदालतों में कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 46 प्रतिशत जज आरक्षित वर्गों से हैं।

    तमिलनाडु में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व
    आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु निचली अदालतों में आरक्षित वर्गों के जजों की हिस्सेदारी के मामले में देश में शीर्ष पर है। राज्य में कुल 1,234 जजों में से 1,205 यानी 97.6 प्रतिशत जज ओबीसी, एससी और एसटी श्रेणियों से आते हैं। इसका अर्थ है कि तमिलनाडु में जिला और अधीनस्थ अदालतों में लगभग हर 100 में से 98 जज आरक्षित वर्ग से हैं।

    पुडुचेरी और मेघालय भी आगे
    तमिलनाडु के बाद केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 88.5 प्रतिशत और मेघालय में 95 प्रतिशत जज आरक्षित वर्गों से हैं। कर्नाटक (88 प्रतिशत), तेलंगाना (69 प्रतिशत) और आंध्र प्रदेश (64 प्रतिशत) में भी आरक्षित वर्गों की भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक है।

    दिल्ली में सबसे कम अनुपात
    राजधानी दिल्ली में निचली अदालतों में आरक्षित वर्गों के जजों का अनुपात सबसे कम है। यहां केवल 13 प्रतिशत जज ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों से हैं। इसी तरह गुजरात और हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जाति-आधारित आंकड़े नहीं
    कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए किसी जाति या वर्ग के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है। इसी कारण इन दोनों स्तरों पर जजों के जाति-आधारित प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़े केंद्र सरकार के पास उपलब्ध नहीं हैं।

    2018 के बाद से सामाजिक पृष्ठभूमि का रिकॉर्ड
    हालांकि 2018 से यह व्यवस्था लागू है कि हाई कोर्ट के जज पद के लिए सिफारिश किए गए उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि की जानकारी एक तय फॉर्मेट में ली जाती है। 2018 से अब तक इस प्रक्रिया के तहत नियुक्त 847 जजों में 104 ओबीसी, 33 अनुसूचित जाति, 17 अनुसूचित जनजाति और 46 अल्पसंख्यक वर्ग से हैं। इसी अवधि में 130 महिलाओं को भी हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।

    निचली अदालतों में आरक्षित वर्गों के जजों का प्रतिशत (चयनित राज्य)

    • देशभर में: 46%

    • तमिलनाडु: 97.6%

    • मेघालय: 95%

    • पुडुचेरी: 88.5%

    • कर्नाटक: 88%

    • तेलंगाना: 69%

    • आंध्र प्रदेश: 64%

    • छत्तीसगढ़: 63%

    • केरल: 59%

    • उत्तर प्रदेश: 54%

    • मध्य प्रदेश: 49%

    • राजस्थान: 45%

    • पंजाब: 40%

    • गुजरात: 29%

    • हिमाचल प्रदेश: 29%

    • दिल्ली: 13%

    यह आंकड़े देश की निचली न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व की मौजूदा स्थिति को सामने रखते हैं और राज्यों के बीच बड़े अंतर को भी उजागर करते हैं।

    भोपाल में इंसानियत शर्मसार: जहरीला खाना खिलाकर पांच स्ट्रीट डॉग्स की हत्या, पिल्ला भी बना शिकार


    भोपाल के शाहपुरा इलाके से मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। लक्ष्मी कैंपस क्षेत्र में अज्ञात लोगों ने जहरीला भोजन खिलाकर पांच स्ट्रीट डॉग्स को मौत के घाट उतार दिया, जिनमें एक मासूम पिल्ला भी शामिल है। यह घटना न सिर्फ पशु क्रूरता की भयावह तस्वीर पेश करती है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।

    घटना के सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय रहवासियों और पशु प्रेमियों ने इस कृत्य को अमानवीय बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।

    बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना 25 जनवरी की है, लेकिन चार दिन बाद 28 जनवरी की रात पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला जानबूझकर जहर दिए जाने का प्रतीत होता है और हर एंगल से जांच की जा रही है।

    चार दिन बाद हुआ मामले का खुलासा

    शाहपुरा थाना प्रभारी लोकेन्द्र सिंह ठाकुर के अनुसार, 25 जनवरी के बाद कॉलोनी में रहने वाले स्ट्रीट डॉग्स अचानक नजर नहीं आए। जब स्थानीय लोगों ने उनकी तलाश शुरू की तो पास के एक सुनसान मैदान में झाड़ियों के पीछे पहले दो कुत्ते मृत अवस्था में मिले। आगे खोज करने पर दो अन्य कुत्ते और एक पिल्ला भी मिले, जो गंभीर हालत में थे।

    अस्पताल पहुंचने से पहले और इलाज के दौरान मौत

    स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों की मदद से सभी कुत्तों को पशु चिकित्सालय पहुंचाया गया, लेकिन तब तक तीन कुत्तों की मौत हो चुकी थी। शेष दो कुत्तों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि की कि सभी कुत्तों को जहरीला पदार्थ खिलाया गया था, जिससे उनके अंग धीरे-धीरे फेल हो गए।

    सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की तलाश

    पुलिस ने घटनास्थल की ओर जाने वाले सभी रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का शक है कि इस वारदात के पीछे किसी असामाजिक तत्व का हाथ हो सकता है। पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान कर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

    पशु प्रेमियों में गुस्सा, सख्त कार्रवाई की मांग

    पशु प्रेमी बिंदू रमाकांत ने बताया कि कॉलोनी के निवासी स्ट्रीट डॉग्स की नियमित देखभाल करते थे। अचानक उनके गायब होने से लोगों को शक हुआ और तलाश के दौरान यह भयावह सच्चाई सामने आई। पशु प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह की घटनाओं पर कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में कोई इस तरह की क्रूरता करने की हिम्मत न कर सके।

    सतना जिले के नागौद में बीजेपी मंडल अध्यक्ष पर मारपीट का गंभीर आरोप, सीसीटीवी वीडियो आया सामने

    मध्य प्रदेश के सतना जिले के नागौद कस्बे में भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष पुलकित टंडन पर कानून तोड़ने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने एक युवती को कस्टमर बनकर अपने गोदाम पर बुलाया और वहां उसके साथ मारपीट की। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें धक्का-मुक्की साफ तौर पर दिखाई दे रही है।

    पीड़िता के मुताबिक वह ब्यूटी पार्लर संचालित करती है। आरोप है कि पुलकित टंडन के नौकर आरके नामदेव ने उसे फोन कर बताया कि एक कस्टमर ब्यूटी पार्लर की सेवा लेना चाहता है और गोदाम पर मौजूद है। जब युवती वहां पहुंची तो उसे कोई कस्टमर नहीं मिला। इसके बजाय पुलकित टंडन गोदाम के अंदर शराब पीते हुए बैठे थे।

    पीड़िता का कहना है कि यह दृश्य देखकर वह वहां से लौटने लगी, इसी दौरान पुलकित टंडन ने उसे रोक लिया और जमीन पर पटक दिया। इसके बाद गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। शोर सुनकर युवती की मां और भाई मौके पर पहुंचे, जिनके साथ भी आरोपी ने कथित तौर पर हाथापाई की। आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने पीड़िता का मोबाइल फोन भी तोड़ दिया।

    घटना के बाद पीड़िता ने नागौद थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने बीजेपी मंडल अध्यक्ष पुलकित टंडन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, हालांकि आरोपी अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताया जा रहा है।

    इस घटना को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि प्रदेश में कानून का नहीं, बल्कि ‘गुंडा राज’ चल रहा है।

    वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए पुलकित टंडन को नोटिस जारी किया है। पार्टी ने वायरल वीडियो को लेकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है।

    मदर ऑफ ऑल ट्रेड’ बड़ी कामयाबी: व्यापार में भारत की छलांग, लेकिन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए कड़ी परीक्षा

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    EU–भारत व्यापारिक समझौते को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड’ नाम दिया गया है। इस डील के तहत कई अहम समझौते हुए हैं, जिससे भारत को वैश्विक व्यापार में नए अवसर मिलेंगे। हालांकि, इस समझौते के बाद कुछ सेक्टरों में पहले से स्थापित उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। इनमें सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दिखेगा, जहाँ विदेशी और घरेलू कंपनियों के बीच सीधा मुकाबला होगा।

    महंगी विदेशी कारें होंगी सस्ती

    अभी भारत में यूरोप से आने वाली कारों पर 70 से 110 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है, इसी वजह से BMW, Mercedes और Volkswagen जैसी कारें आम खरीदार की पहुंच से बाहर रहती हैं। EU–India ट्रेड डील के बाद इस टैक्स को चरणबद्ध तरीके से घटाकर लगभग 10 प्रतिशत तक लाने की योजना है। इससे विदेशी कारों की कीमतों में सीधी कमी आएगी और बाजार में उनकी उपलब्धता बढ़ेगी।

    ग्राहक को मिलेगा सीधा फायदा

    टैक्स कम होने से कार खरीदने वालों को बड़ा लाभ होगा। छोटी और मिड-रेंज लग्ज़री कारें 10–20 प्रतिशत तक सस्ती हो सकती हैं, जबकि हाई-एंड कारों की कीमतों में 20–30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड ज्यादा लोगों के बजट में आएंगे और ग्राहकों को बेहतर सेफ्टी, नई टेक्नोलॉजी और अधिक विकल्प मिलेंगे।

    घरेलू कंपनियों के लिए असली चुनौती

    अब तक भारी टैक्स के कारण विदेशी कारें महंगी थीं और Tata, Maruti व Mahindra जैसी घरेलू कंपनियों का बाजार सुरक्षित था। लेकिन कीमतें घटते ही ग्राहक विदेशी कारों की ओर भी रुख करेंगे। इससे घरेलू कंपनियों पर अपनी गुणवत्ता, फीचर और कीमत में तेजी से सुधार करने का दबाव बढ़ेगा। जो कंपनियाँ समय रहते खुद को नहीं बदलेंगी, उनका बाजार हिस्सा घटने का खतरा रहेगा।

    यह डील उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है, लेकिन भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए यह असली परीक्षा साबित होने वाली है।
    ये भी पढ़ें: इकोनॉमिक सर्वे में AI का नया प्लान: UPI जैसी ‘AI-OS’, बच्चों के लिए कमाई के साथ पढ़ाई, IT सेक्टर को चेतावनी

    इकोनॉमिक सर्वे में AI का नया प्लान: UPI जैसी ‘AI-OS’, बच्चों के लिए कमाई के साथ पढ़ाई, IT सेक्टर को चेतावनी


    इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा विज़न पेश किया है। इसमें कहा गया है कि भारत में ‘AI-OS’ बनाया जाए, जो UPI और आधार की तरह एक पब्लिक गुड होगा।
    इस योजना के तहत सरकार AI इंफ्रास्ट्रक्चर में हिस्सेदार बनेगी और IndiaAI मिशन के अंतर्गत एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनेगा, जहाँ डेवलपर्स, स्टूडेंट्स और कंपनियाँ मिलकर कोड शेयर कर सकेंगी और नई तकनीक बना सकेंगी।

    महंगे बड़े मॉडल नहीं, छोटे और काम के मॉडल

    सर्वे ने सलाह दी है कि भारत को बड़े और बहुत महंगे AI मॉडल बनाने की दौड़ में नहीं पड़ना चाहिए। इसके बजाय ऐसे छोटे AI मॉडल बनाए जाएँ, जो किसी एक काम के लिए हों – जैसे खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा या व्यापार।
    ये मॉडल मोबाइल और कंप्यूटर पर भी चल सकेंगे, जिससे छोटे शहरों और गाँवों तक AI पहुँचेगा।

    नीचे से ऊपर की रणनीति

    भारत के लिए “बॉटम-अप” तरीका बेहतर बताया गया है, यानी AI का विकास धीरे-धीरे हर सेक्टर तक पहुँचे। इससे ज्यादा बिजली, भारी खर्च और विदेशी हार्डवेयर पर निर्भरता से बचा जा सकेगा।
    सर्वे के अनुसार, भारत के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी AI-जानकार वर्कफोर्स है।

    छात्रों के लिए ‘कमाओ और सीखो’ मॉडल

    सर्वे में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव सुझाया गया है।
    अब कक्षा 11 से ही छात्र पढ़ाई के साथ काम कर सकेंगे

    • उन्हें इंडस्ट्री में काम करने का मौका मिलेगा

    • इसके बदले उन्हें वेतन भी मिलेगा

    • और वही अनुभव उनकी डिग्री में क्रेडिट के रूप में जुड़ेगा

    इससे छात्रों को नौकरी के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी और देश की युवा शक्ति सही दिशा में लगेगी।

    नए रोजगार के रास्ते

    सर्वे कहता है कि सिर्फ ऑफिस वाली नौकरियों पर ध्यान न देकर उन क्षेत्रों को भी मजबूत करना होगा जहाँ कुशल लोगों की भारी कमी है।
    जैसे –

    • नर्सिंग और बुजुर्गों की देखभाल

    • रसोई और होटल से जुड़े हुनर

    • सर्जरी, फिजियोथेरेपी

    • एडवांस इलेक्ट्रिशियन

    • छोटे बच्चों की शिक्षा

    इन क्षेत्रों में आने वाले समय में लाखों नई नौकरियाँ बन सकती हैं।

    IT सेक्टर के लिए चेतावनी

    रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के कारण भारत का IT सेक्टर खतरे में पड़ सकता है।
    पहले विदेशी कंपनियाँ अपना काम भारत को देती थीं, लेकिन अब वही काम AI खुद कर सकता है।
    अगर भारत ने समय रहते खुद को नहीं बदला, तो IT सेक्टर की ताकत कमजोर हो सकती है।

    भारत की चुनौतियाँ

    सर्वे बताता है कि –

    • दुनिया के AI ट्रेनिंग डेटा में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2% है

    • 70% डेटा सेंटर अमीर देशों में हैं, भारत में केवल 3%

    • AI के लिए जरूरी GPU और हार्डवेयर विदेशों पर निर्भर हैं

    इससे भारत की AI क्षमता सीमित हो सकती है।

    AI में संतुलन जरूरी

    सर्वे कहता है कि भारत को कई बातों में संतुलन बनाना होगा –

    • बड़े मॉडल बनाना या काम के छोटे मॉडल

    • मशीनों से काम कराना या लोगों की नौकरियाँ बचाना

    • खुला AI या बंद सिस्टम

    • ज्यादा कंप्यूटर ताकत या संसाधनों की बचत

    • आज़ादी से नवाचार या नियम-कानून

    • आत्मनिर्भरता या दुनिया से जुड़ाव

    साफ संदेश यह है कि भारत को अपनी जरूरतों और संसाधनों के हिसाब से अपना खुद का AI मॉडल बनाना होगा, न कि अंधाधुंध दुनिया की नकल करनी होगी।

    यूजीसी नियम 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी रोक, अगले आदेश तक 2012 वाले नियम ही होंगे लागू

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    UGC RULE 2026:
    सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि अगले आदेश तक वर्ष 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। इन नए नियमों को सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनौती दी गई थी।

    कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने नए नियमों को “अस्पष्ट” बताते हुए कहा कि इनका दुरुपयोग हो सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और स्पष्ट किया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक यूजीसी के नए नियम प्रभावी नहीं होंगे।

    19 मार्च को अगली सुनवाई

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब तलब किया है। अदालत ने संकेत दिया कि नियमों की भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की एक विशेष समिति बनाई जा सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

    “क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं?”

    सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए। क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं?” उन्होंने कहा कि जिन्हें सुरक्षा की जरूरत है, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन नियमों में संतुलन और स्पष्टता जरूरी है।

    याचिकाकर्ताओं की दलील

    याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने अदालत में दलील दी कि नए नियमों के सेक्शन 3C में सामान्य वर्ग को बाहर रखा गया है, जबकि अन्य वर्गों को शामिल किया गया है। उनका कहना है कि इससे यह संदेश जाता है कि सामान्य वर्ग द्वारा ही भेदभाव किया जाता है, जो अपने आप में पक्षपातपूर्ण है।
    इसके अलावा, सेक्शन 18 के तहत गठित इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व का प्रावधान नहीं है। इस पर अदालत ने भी सहमति जताते हुए संतुलित समिति के गठन का सुझाव दिया।

    देशभर में विरोध

    यूजीसी रेगुलेशन, 2026 को 23 जनवरी, 2026 को अधिसूचित किया गया था। इसके बाद देशभर में इन नियमों के खिलाफ आक्रोश देखने को मिला। कई याचिकाकर्ताओं ने इन्हें मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान तथा यूजीसी एक्ट, 1956 के खिलाफ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ये नियम सामान्य वर्गों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल पुराने, यानी 2012 के नियम ही पूरे देश में लागू रहेंगे।

    Ajit Pawar को अंतिम विदाई: बारामती में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

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    महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके राजनीतिक गढ़ बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके पार्थिव शरीर को विद्या प्रतिष्ठान मैदान में ले जाया गया, जहाँ सुबह लगभग 11 बजे अंतिम संस्कार शुरू हुआ। उनके दोनों बेटों पार्थ और जय पवार ने चिता को मुखाग्नि दी।

    जन भावना और राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति

    अंतिम संस्कार के दौरान भारी संख्या में समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग शामिल हुए। अनेक नेताओं ने अंतिम श्रद्धांजलि दी, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे। लोग ‘अजित दादा अमर रहे’ के नारे लगाते दिखे।

    विज्ञान और जांच की प्रगति

    बारामती में बुधवार को हुए Learjet 45 विमान हादसे में Ajit Pawar के साथ चार अन्य लोग भी मारे गए थे। दुर्घटना के बाद विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है और नागरिक उड्डयन मंत्रालय व विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) जांच को लेकर सक्रिय है।

    राज्य में शोक और प्रतिक्रिया

    महाराष्ट्र सरकार ने पवार की मृत्यु पर तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है। देशभर के कई राजनीतिक दलों और नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। पंचायत चुनाव प्रचार के दौरान हुए इस हादसे ने राज्य की राजनीतिक व प्रशासनिक अगुआई में एक बड़ा खालीपन छोड़ दिया है