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    Four Stars of Destiny’ विवाद: जनरल नरवणे की किताब लीक, दिल्ली पुलिस जांच में जुटी

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    पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब ‘Four Stars of Destiny’ को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक किताब की प्री-प्रिंट कॉपी सोशल मीडिया, कुछ वेबसाइट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सर्कुलेट हो रही थी, जबकि इस किताब को प्रकाशित करने के लिए अभी आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली थी।

    कैसे सामने आया लीक मामला

    दिल्ली पुलिस को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और न्यूज़ फोरम से जानकारी मिली कि किताब की टाइप-सेट PDF कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध है। जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर पब्लिशर द्वारा तैयार की गई कॉपी कुछ वेबसाइट्स पर शेयर हो रही थी और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किताब का कवर ऐसे दिखाया जा रहा था जैसे वह बिक्री के लिए उपलब्ध हो।

     किस आधार पर दर्ज हुई FIR

    पब्लिकेशन की मंजूरी से पहले किताब का बाहर आना नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में FIR दर्ज की गई है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    आगे क्या हो सकता है

    जांच में यह पता लगाया जाएगा कि किताब की कॉपी किसने और कैसे लीक की। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इसमें किसी अंदरूनी या बाहरी नेटवर्क की भूमिका तो नहीं थी। अगर नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

    कानपुर मे एक महिला बैंक कर्मी की ठकुराइस का नमूना…विपक्ष का आरोप यू.पी मे ठाकुरों की सरकार

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    कानपुर के पनकी स्थित HDFC बैंक शाखा में एक महिला कर्मचारी आस्था सिंह और एक ग्राहक के बीच हुई तीखी बहस
    का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो में आस्था सिंह को ग्राहक के साथ दुर्व्यवहार करते हुए और “ठाकुर हूं मैं, बकचोदी मत करना मुझसे” जैसे जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए देखा गया है। इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश पैदा किया है, जिसमें कई लोगों ने इसे जातिवादी और असंवेदनशील व्यवहार बताया है । घटना का विवरण यह विवाद एक सामान्य बैंकिंग मुद्दे, जैसे चेकबुक में देरी, से शुरू हुआ और दोनों पक्षों के बीच चिल्लाने तक बढ़ गया। वीडियो में आस्था सिंह को ग्राहक पर चिल्लाते हुए और लैपटॉप उठाकर धमकी देते हुए देखा गया है। उनके सहयोगी स्थिति को शांत करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं, लेकिन बहस जारी रहती है । बैंक की प्रतिक्रिया HDFC बैंक ने इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, आस्था सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और बैंक ने इस मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है । सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर इस घटना की व्यापक निंदा हो रही है। कई उपयोगकर्ताओं ने HDFC बैंक को टैग करते हुए आस्था सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि वीडियो में ग्राहक द्वारा पहले की गई बदसलूकी नहीं दिखाई गई है, जिससे पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है ।

    ईरान की खुली चेतावनी: इजराइल पर बैलिस्टिक हमले का संकेत, मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर

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    world news:ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच इजराइल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान ने इजराइल को सीधी धमकी दी है। तेहरान के फिलिस्तीन स्क्वायर में एक बड़ा बैनर लगाया गया, जिसे इजराइल पर संभावित बैलिस्टिक हमले की चेतावनी माना जा रहा है।

    बैनर में लिखा था — “You start… We finish it” यानी “तुम शुरू करोगे, खत्म हम करेंगे”। साथ ही इसमें इजराइल के केंद्रीय हिस्से का मैप भी दिखाया गया है, जिसमें संभावित हमले के टारगेट बताए गए हैं। इसमें बेन-गुरियन हवाई अड्डा, तेल अवीव में IDF का मुख्यालय और हर्ज़लिया के पास ग्लिलोट में खुफिया निदेशालय जैसे प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना दिखाया गया है।

    ईरान ने यह भी संकेत दिया कि पहले दिन वह इजराइल की किन-किन जगहों को निशाना बना सकता है। हिब्रू भाषा में बैनर पर लिखा था — “यह छोटा क्षेत्र है जहां मिसाइलों की बारिश होगी।”बैनर में एक सैन्य कमांड डेस्क, एक लाल “FIRE” बटन, एक लड़ाकू जेट और दो बैलिस्टिक मिसाइलों की तस्वीर भी शामिल थीं।

    क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला संदेश

    इस सार्वजनिक प्रदर्शन का उद्देश्य इजराइल और अमेरिका को यह संदेश देना है कि यदि ईरान पर हमला किया गया, तो वह गंभीर प्रतिशोध करेगा। इससे पहले भी, अक्टूबर 2024 में, ईरान ने इजराइल पर लगभग 200 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिससे दोनों देशों के तनाव में तेज बढ़ोतरी हुई थी।

    क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा

    इस बैनर के जरिए ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति मध्य-पूर्व क्षेत्र की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बढ़ा विवाद: किसान संगठनों का विरोध, आंदोलन की चेतावनी

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    India US Trade Deal:
    भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर देश में राजनीतिक और आर्थिक बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार का कहना है कि इस डील में किसानों और श्रमिकों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है, लेकिन किसान संगठनों का मानना है कि यह समझौता लंबे समय में भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी के विरोध में किसान संगठनों ने 12 फरवरी से प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी है और जरूरत पड़ने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

    नॉन-टैरिफ बाधाएं हटाने पर सबसे ज्यादा विवाद

    किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि समझौते के तहत भारत अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों पर नॉन-टैरिफ बाधाएं हटाने को तैयार हुआ है। किसान संगठनों का कहना है कि इससे ऐसे अमेरिकी उत्पाद भी भारतीय बाजार में आ सकते हैं जिन्हें पहले आयात की अनुमति नहीं थी। उनका डर है कि सस्ते अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में भर सकते हैं, जिससे घरेलू किसानों की कमाई प्रभावित होगी।

    सरकार का दावा — किसानों और श्रमिकों के हित सुरक्षित

    केंद्र सरकार का कहना है कि डेयरी, पोल्ट्री और मसालों जैसे संवेदनशील सेक्टर को इस डील से बाहर रखा गया है। सरकार के अनुसार, जिन उत्पादों को भारत पहले से आयात करता है, केवल उन्हीं को सीमित और शर्तों के साथ बाजार में आने की अनुमति दी जाएगी।
    सरकार ने यह भी कहा है कि कुछ आयातित उत्पादों का बेस प्राइस तय किया जाएगा ताकि वे भारतीय उत्पादों से सस्ते न पड़ें और किसानों को नुकसान न हो।

    अमेरिकी सब्सिडी मॉडल से बढ़ी चिंता

    किसान नेताओं का कहना है कि अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है, जिसके कारण वे बहुत कम कीमत पर अनाज और दूध बेच पाते हैं। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका में दूध लगभग 32 रुपये प्रति लीटर और गेहूं करीब 18–20 रुपये प्रति किलो के आसपास निर्यात किया जाता है, जबकि भारत में यही उत्पाद काफी महंगे हैं। किसानों को डर है कि यदि ये उत्पाद किसी भी रूप में भारतीय बाजार में आए तो स्थानीय किसानों की आय पर असर पड़ेगा।

    प्रोसेस्ड फूड के जरिए बैकडोर एंट्री का डर

    हालांकि सरकार ने दूध और गेहूं के सीधे आयात से इनकार किया है, लेकिन किसान संगठनों को डर है कि प्रोसेस्ड फूड के जरिए इन उत्पादों की एंट्री हो सकती है। इससे बाजार में अप्रत्यक्ष रूप से विदेशी कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।

    500 बिलियन डॉलर आयात योजना भी विवाद में

    समझौते के अनुसार, भारत अगले पांच साल में अमेरिका से करीब 500 बिलियन डॉलर के उत्पाद आयात करेगा। इसमें रक्षा उपकरण, विमान पार्ट्स, तकनीक और कुछ कृषि उत्पाद शामिल हैं। किसानों को डर है कि कई कृषि उत्पादों पर टैक्स कम या खत्म होने से विदेशी उत्पाद सस्ते हो सकते हैं।

    किसान नेताओं की चेतावनी — डील रद्द नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन

    किसान संगठनों का कहना है कि यह समझौता देश के करोड़ों किसान परिवारों को प्रभावित कर सकता है। उनका आरोप है कि अमेरिका सब्सिडी वाले सस्ते उत्पादों से भारतीय बाजार पर कब्जा करना चाहता है। किसान नेताओं ने साफ कहा है कि अगर सरकार ने इस डील पर दोबारा विचार नहीं किया तो देशभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

    विरोध प्रदर्शन का पूरा प्लान तैयार

    किसान संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन की योजना बनाई है।

    • 12 फरवरी — दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन

    • 15 फरवरी — इंदौर में विरोध कार्यक्रम

    • 18 फरवरी — मुरादाबाद में प्रदर्शन

    • 23 मार्च — हरियाणा में पंचायत और प्रदर्शन

    किसान संगठन सरकार से इस ट्रेड डील पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज करने की तैयारी है।

    रूस तेल आयात पर सस्पेंस: क्या भारत संतुलन बना रहा है या बढ़ रहा है अमेरिका का दबाव?

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    क्या भारत सरकार धीरे-धीरे करके रूस से तेल आयात करना बंद कर रही है? तो क्या डोनाल्ड ट्रम्प आखिरकार कामयाब हुए? ऐसे में यही कहा जा सकता है कि अमेरिका भारत पर दबाव बनाने में कामयाब हो रहा है और अमेरिका के मंसूबे पूरे हो रहे हैं। ये सब आशंका है लेकिन वर्तमान जो स्थिति बनी हुई है उसे देखकर तो ऐसा लगना लाजिमी हो जाता है। क्यों? वो इसलिए क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प ने कुछ दिन पहले कहा था कि भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा और रूस से तेल खरीदना बंद करेगा।

    अमेरिकी बयान, विपक्ष की प्रतिक्रिया और डील पर सियासत

    अमेरिका के राष्ट्रपति के बयान के बाद राहुल गांधी ने भी मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि ये डील होगी और मोदी जी उनकी बात मानेंगे। जब डील हुई तो विपक्ष इसको लेकर सरकार पर निशाना साधने लगा। हालाँकि डील में रूस से तेल आयात पर रोक की खबर अब नहीं आई है और ना ही डील में ऐसी कोई बात हुई है। लेकिन पैटर्न है जिसके कारण ऐसा लग रहा है।

    आंकड़े क्या बताते हैं? रूस से तेल आयात में गिरावट का ट्रेंड

    पिछले 37 महीनों में रूस से तेल आयात घटा है। दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से 2.7 अरब डॉलर का तेल आयात किया जो कि फरवरी के बाद से किसी भी महीने में सबसे कम है। आंकड़ों के मुताबिक भारत ने रूस से नवंबर के महीने में 3.7 अरब डॉलर का और 2024 दिसंबर में 3.2 अरब डॉलर का आयात हुआ था। अगर अब इन आंकड़ों को देखें तो ऐसा ही लगता जैसे भारत पर दबाव का असर दिख रहा है।

    रूस और भारत की आधिकारिक स्थिति क्या है?

    हालाँकि ये स्पष्ट करना बेहद जरूरी है कि रूस की ओर से ये कहा गया था कि उन्हें भारत की तरफ से तेल आयात पर रोक की कोई जानकारी नहीं आई है। और ना ही अभी तक भारत की ओर से ऐसी कोई घोषणा की गई है। कुछ लोग ये भी बोल रहे हैं कि ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं।

    ऊर्जा नीति में संतुलन और भविष्य की संभावनाएँ

    भारत इस समय संतुलन की नीति अपना रहा है और अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाकर किसी एक देश पर निर्भरता कम करना चाहता है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करना और अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत रखना है। साथ ही यह भी संभव है कि आने वाले कुछ महीनों में हालात और कीमतों के हिसाब से रूस से तेल आयात में फिर से वृद्धि देखने को मिले।

    संसद में हंगामा पड़ा भारी, स्पीकर ओम बिरला ने गिनाया बर्बाद हुआ समय

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    Parliament Budget Session:
    संसद का बजट सत्र चल रहा है। सत्र में विपक्ष सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। शुक्रवार के दिन संसद भारी हंगामे के चलते स्थगित कर दी गई। संसद के अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पर नाराजगी व्यक्त की।

    सदन का समय खराब हो रहा है।
    स्पीकर ओम बिरला ने सदन का समय खराब होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सदन का 19 घंटे 13 मिनट खर्च हो चुका है। मेरा प्रयास रहता है कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से हो। प्रश्नकाल माननीय सदस्यों के लिए होता है। आज माननीय राज्यपाल और प्रियंका गांधी जी के प्रश्न हैं। लेकिन आप संसद सुचारु रूप से चलने में बाधा डाल रहे हैं। फिर उन्होंने संसद बर्बाद करने का समय भी गिनवा दिया।

    140 करोड़ की जनता की आपसे अपेक्षा रहती है
    उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की जनता की आपसे अपेक्षा रहती है कि सदन चले और चर्चा हो। देश की जनता ने आपको पोस्टर और नारेबाजी के लिए नहीं भेजा है। आप सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की प्रशांत किशोर की पार्टी को फटकार: लोकप्रियता पाने के लिए अदालत का सहारा नहीं लिया जा सकता

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    national desk:
    सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को बड़ा झटका देते हुए 2025 बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। पार्टी ने राज्य में दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी।

    जन सुराज पार्टी का आरोप क्या था?

    याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये भेजे गए। पार्टी का दावा था कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है और वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

    सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार

    सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि अगर जनता किसी पार्टी को खारिज कर देती है, तो केवल लोकप्रियता पाने के लिए अदालत का सहारा नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी एक पार्टी की शिकायत पर पूरे राज्य का चुनाव रद्द नहीं किया जा सकता।

    पटना हाई कोर्ट जाने की सलाह

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला राज्य स्तर का है, इसलिए याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि चुनाव रद्द करने के लिए हर उम्मीदवार के खिलाफ अलग-अलग ठोस सबूत जरूरी होते हैं।

    चुनाव नतीजों में जन सुराज को नहीं मिली सफलता

    बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने 243 में से 202 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। वहीं विपक्षी गठबंधन को 35 सीटें मिली थीं। जन सुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई और कई उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।

    चुनाव से पहले धन वितरण का आरोप

    याचिका में यह भी कहा गया था कि चुनाव से पहले करीब 15,600 करोड़ रुपये की राशि बांटी गई, जिससे अन्य पार्टियों को बराबरी का मौका नहीं मिला। पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 के तहत कार्रवाई की मांग की थी।

    मनोज बाजपेयी की फिल्म पर विवाद: ‘घूसखोर पंडित’ नाम के कारण मुश्किल में पड़े मेकर्स, जानिए पूरा मामला


    entertainment desk:
    फिल्म घूसखोर पंडित को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। खासतौर पर फिल्म के टाइटल में इस्तेमाल किए गए ‘पंडित’ शब्द पर आपत्ति जताई जा रही है। इसी बीच फिल्म के निर्माता और अभिनेता दोनों ने सामने आकर पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है और लोगों की भावनाओं का सम्मान करने की बात कही है।

    मनोज बाजपेयी बोले – किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं

    मनोज बाजपेयी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि वे लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं और उठाई गई चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के तौर पर वह केवल किरदार और कहानी के माध्यम से जुड़ते हैं। उनके मुताबिक फिल्म एक गलत इंसान और उसके आत्म-बोध की यात्रा की कहानी है, न कि किसी समुदाय पर टिप्पणी।

    नीरज पांडे ने बताया – फिल्म पूरी तरह काल्पनिक कहानी

    फिल्म के निर्माता नीरज पांडे ने स्पष्ट किया कि यह एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है। उन्होंने कहा कि ‘पंडित’ शब्द का इस्तेमाल केवल एक काल्पनिक किरदार के बोलचाल के नाम के रूप में किया गया है। उनका कहना है कि फिल्म का किसी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है और कहानी केवल एक व्यक्ति के फैसलों और उसके परिणामों पर आधारित है।

    ब्राह्मण समुदाय ने जताई नाराजगी

    फिल्म की घोषणा के बाद से कुछ संगठनों और लोगों ने इसे ब्राह्मण समुदाय का अपमान बताते हुए विरोध किया है। इसी विवाद के बीच एफएमसी की ओर से फिल्म के अनऑथराइज्ड टाइटल को लेकर नोटिस भेजे जाने की भी खबर सामने आई है।

    प्रमोशनल सामग्री हटाने का लिया फैसला

    विवाद को देखते हुए मेकर्स ने फिलहाल फिल्म की सभी प्रचार सामग्री हटाने का फैसला लिया है। नीरज पांडे ने कहा कि फिल्म को पूरी कहानी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि केवल टाइटल या प्रमोशनल झलक के आधार पर।

    जल्द रिलीज को लेकर मेकर्स उत्साहित

    मेकर्स का कहना है कि फिल्म पूरी ईमानदारी से बनाई गई है और इसका मकसद केवल मनोरंजन करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दर्शक फिल्म को खुले मन से देखेंगे और इसकी कहानी को समझेंगे।

    बजट सत्र के दौरान संसद में गतिरोध बरकरार, कई अहम मुद्दों पर नहीं हो सकी चर्चा

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    national desk:
    गुरुवार को संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में एक बार फिर भारी हंगामा देखने को मिला। लगातार शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच स्पीकर ने नाराजगी जताई और कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। हालात को देखते हुए लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

    राज्यसभा में भी गर्म माहौल

    लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी माहौल शांत नहीं रहा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने का मौका नहीं दिया गया। इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय से जोड़कर उठाया गया, जिस पर सत्ता पक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए विरोध किया।

    किरण रिजिजू ने कांग्रेस और विपक्ष पर साधा निशाना

    संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर कांग्रेस प्रधानमंत्री का जवाब नहीं सुनना चाहती तो यह उनका फैसला हो सकता है, लेकिन बाकी सांसद जवाब सुनना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संसद की कार्यवाही नियमों के मुताबिक चलनी चाहिए और अनावश्यक व्यवधान ठीक नहीं है।

    विपक्ष की रणनीति बनाने के लिए बैठक

    सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी नेताओं ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस बैठक में अलग-अलग विपक्षी दलों के नेता मौजूद रहे और सदन में मुद्दों को किस तरह उठाया जाए, इस पर बातचीत हुई।

    धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा जारी

    राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर दोनों सदनों में चर्चा जारी है। सरकार की तरफ से उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस पर जवाब दे सकते हैं, लेकिन लगातार हंगामे की वजह से कार्यवाही प्रभावित हो रही है।

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी टकराव

    विपक्ष ने संसद में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर विस्तार से चर्चा कराने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि इस समझौते के असर को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए

    6 फरवरी को होगा ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’, पीएम मोदी छात्रों से करेंगे सीधा संवाद

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    National desk:
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 फरवरी 2026 को ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के जरिए देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से बातचीत करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शुरू होगा। बोर्ड परीक्षाओं से पहले होने वाला यह वार्षिक संवाद छात्रों को मानसिक रूप से तैयार करने और परीक्षा तनाव कम करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।

    9वां संस्करण, नए प्रारूप में आयोजन
    इस साल ‘परीक्षा पे चर्चा’ का 9वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। पहले यह कार्यक्रम दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होता था, लेकिन पिछले साल से इसके प्रारूप में बदलाव किया गया है। इस पहल के तहत प्रधानमंत्री ‘एग्जाम वॉरियर्स’ मूवमेंट के जरिए टाइम मैनेजमेंट, आत्मविश्वास और बेहतर प्रदर्शन जैसे विषयों पर मार्गदर्शन देते हैं।

    देशभर के छात्रों से जुड़ने की नई पहल
    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, इस बार कार्यक्रम को बड़े और अलग तरीके से आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में देवमोगरा, कोयंबटूर, रायपुर और गुवाहाटी के छात्रों से मुलाकात की। साथ ही कुछ छात्रों को दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर भी उनसे मिलने का अवसर मिला।

    इन प्लेटफॉर्म्स पर देख सकेंगे लाइव प्रसारण
    कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन के DD नेशनल, DD न्यूज और DD इंडिया चैनलों पर होगा। इसके अलावा ऑल इंडिया रेडियो, पीएमओ और शिक्षा मंत्रालय के यूट्यूब चैनल तथा MyGov पोर्टल पर भी लाइव देखा और सुना जा सकेगा।

    रिकॉर्ड 4 करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन
    इस साल ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के लिए रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली है। कार्यक्रम के लिए 1 दिसंबर 2025 से 11 जनवरी 2026 तक रजिस्ट्रेशन हुए, जिसमें 4 करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। इस पहल का उद्देश्य परीक्षा से जुड़े डर और तनाव को कम करना और छात्रों को सही रणनीति के साथ तैयारी में मदद करना है।