More
    Home Blog Page 13

    मध्य प्रदेश में बिजली महंगी होने की तैयारी, 10% तक बढ़ सकता बिल

    0

    भोपाल। मध्य प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। राज्य में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की तैयारी चल रही है। मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टैरिफ पिटीशन मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग में दायर की है। इसमें दावा किया गया है कि बिजली कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए यह बढ़ोतरी करना चाह रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने तीनों डिस्कॉम की ओर से 30 नवंबर से पहले यह पिटीशन आयोग को सौंप दी है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कंपनियों ने अनुमानित घाटे की भरपाई के लिए बिजली की दरों में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की अनुमति आयोग से मांगी है।

    बताया जा रहा है कि नियामक आयोग ने पिटीशन को स्वीकार कर लिया है और अब इस पर जल्द ही सार्वजनिक सूचना जारी कर जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी। जनसुनवाई के बाद आयोग यह तय करेगा कि बिजली के भावों में कितनी प्रतिशत वृद्धि या कमी की जाए।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह वृद्धि लागू होती है तो घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक सभी को इसका असर पड़ेगा। उपभोक्ता संगठनों ने भी कहा है कि इस मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और जनता को बढ़ोतरी की वजहों के बारे में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।

    यदि नियामक आयोग ने प्रस्तावित वृद्धि को मंजूरी दे दी, तो नई दरें वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगी। इससे उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ सकता है और उद्योगों की उत्पादन लागत में भी इजाफा हो सकता है।

    मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की निगाहें अब नियामक आयोग पर टिकी हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनसुनवाई के बाद दरों में कितनी वृद्धि तय की जाती है।

    NIA का खुलासा: RSS से लिंक और मुखबिरी के शक में माओवादियों ने किया गावड़े का मर्डर

    Dinesh Pusu Gavade Murder Case:राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने महाराष्ट्र के दिनेश पुसु गावड़े हत्याकांड में फरार चल रहे दो माओवादी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एनआईए के मुताबिक, दोनों आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन सीपीआई (माओवादी) के सक्रिय सदस्य हैं। माओवादियों ने गावड़े का अपहरण कर बेरहमी से हत्या कर दी थी, क्योंकि उन्हें शक था कि वह आरएसएस से जुड़ा है और सुरक्षा बलों को नक्सलियों की जानकारी देता है।

    एनआईए की जांच में सामने आया है कि इस हत्या का मकसद सिर्फ एक व्यक्ति को मारना नहीं था, बल्कि इलाके के लोगों में डर पैदा करना था। माओवादी यह संदेश देना चाहते थे कि जो भी आरएसएस से जुड़ा होगा या नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियानों में सुरक्षा बलों से बात करेगा, उसका यही अंजाम होगा।

    तेलंगाना और महाराष्ट्र से जुड़े आरोपी

    गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान तेलंगाना के निजामाबाद जिले के रघु उर्फ प्रताप उर्फ इरपा उर्फ मुद्देला उर्फ सैलू और महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले के शंकर महाका के रूप में हुई है। दिनेश पुसु गावड़े की नवंबर 2023 में गढ़चिरोली जिले में माओवादियों ने हत्या कर दी थी।

    ग्रामीणों में दहशत फैलाने की साजिश

    जांच एजेंसी के अनुसार, गावड़े पर पुलिस मुखबिर होने और आरएसएस से जुड़े होने का संदेह था। इसी शक के आधार पर यह जघन्य अपराध किया गया। माओवादियों की साजिश थी कि इस हत्या के जरिए स्थानीय ग्रामीणों को डराया जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति नक्सली गतिविधियों से जुड़ी जानकारी सुरक्षा बलों को न दे।

    NIA रही है पूरी साजिश की जांच

    एनआईए ने अक्टूबर 2024 में गढ़चिरोली पुलिस से इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले एजेंसी चार अन्य आरोपियों—डोबा वड्डे, रवि पल्लो, सत्तू महाका और कोमाटी महाका—के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। यह मामला आरसी-03/2024/एनआईए/एमयूएम के तहत दर्ज है।

    एनआईए का कहना है कि वह इस हत्या के पीछे की पूरी साजिश का खुलासा करने और बाकी फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026: सूर्यकुमार के हाथों में कमान, अक्षर उपकप्तान; गिल–जितेश बाहर

    0

    T20 World Cup 2026:टी20 विश्व कप 2026 को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने शुक्रवार, 20 दिसंबर को 15 सदस्यीय भारतीय टीम का ऐलान कर दिया। इसी के साथ न्यूजीलैंड दौरे के लिए भी टीम की घोषणा हुई है। खास बात यह है कि दोनों सीरीज के लिए चुनी गई टीम एक ही है। फॉर्म से जूझ रहे सूर्यकुमार यादव को एक बार फिर टीम इंडिया की कमान सौंपी गई है, जबकि ऑलराउंडर अक्षर पटेल को उपकप्तान बनाया गया है।टीम चयन से पहले मुंबई में चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर, चयन समिति के अन्य सदस्यों और कप्तान सूर्यकुमार यादव के बीच अहम बैठक हुई।इसके बाद बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने आधिकारिक तौर पर टीम की घोषणा की।

    ईशान किशन की दमदार वापसी, रिंकू को भी मौका
    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 में शानदार प्रदर्शन करने वाले ईशान किशन को उनके बेहतरीन फॉर्म का इनाम मिला है। लंबे समय बाद ईशान की टी20 टीम में वापसी हुई है। वहीं, अपने फिनिशिंग रोल से लगातार प्रभावित कर रहे रिंकू सिंह को भी टीम में जगह दी गई है।

    गिल और जितेश बाहर, चयन पर मची चर्चा
    टीम चयन में सबसे बड़ा झटका शुभमन गिल को लगा है। खराब फॉर्म के चलते उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा विकेटकीपर बल्लेबाज जितेश शर्मा का भी चयन नहीं हुआ है। इन दोनों खिलाड़ियों के बाहर होने से क्रिकेट गलियारों में चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    अक्षर पटेल पर चयनकर्ताओं का भरोसा
    अक्षर पटेल को एक बार फिर उपकप्तान बनाए जाने से साफ है कि चयनकर्ता उन्हें टीम के सीनियर और भरोसेमंद खिलाड़ी के तौर पर देख रहे हैं। गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने वाले अक्षर आने वाले बड़े टूर्नामेंट में टीम इंडिया के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में यह टीम टी20 विश्व कप 2026 और न्यूजीलैंड दौरे पर कैसा प्रदर्शन करती है।

    पूरी टीम इस प्रकार है
    सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, हार्दिक पंड्या, तिलक वर्मा, अक्षर पटेल (उपकप्तान), शिवम दुबे, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, रिंकू सिंह

    हेट स्पीच पर कर्नाटक सरकार का कड़ा प्रहार, अब 7 साल तक की जेल का प्रावधान

    हेट स्पीच के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कर्नाटक सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कर्नाटक विधानसभा ने गुरुवार को हेट स्पीच से जुड़ा विधेयक पारित कर दिया। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, वहीं भाजपा विधायकों ने बिल का जोरदार विरोध किया।

    कैबिनेट से लेकर विधानसभा तक का सफर
    इस विधेयक को 4 दिसंबर को राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी मिली थी। इसके बाद 10 दिसंबर को गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इसे कर्नाटक विधानसभा में पेश किया। सरकार का दावा है कि बढ़ते नफरत भरे भाषणों और भड़काऊ बयानों पर रोक लगाने के लिए यह कानून बेहद जरूरी हो गया था।

    सजा में किया गया बदलाव
    गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सदन को बताया कि विधेयक के शुरुआती मसौदे में बार-बार हेट स्पीच करने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, सदन में हुई चर्चा और सुझावों के बाद सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए अधिकतम सजा को घटाकर 7 साल कर दिया है। इसके साथ ही आर्थिक दंड का भी प्रावधान किया गया है।

    सरकार की दलील
    सरकार का कहना है कि हेट स्पीच समाज में तनाव, हिंसा और विभाजन को बढ़ावा देती है। ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई से सामाजिक सौहार्द, शांति और कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी विशेष वर्ग या विचारधारा के खिलाफ नहीं, बल्कि नफरत फैलाने वाले हर तरह के भाषण पर लगाम लगाने के लिए है।

    विपक्ष का विरोध
    विधानसभा में भाजपा विधायकों ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और असहमति की आवाजों को दबाने के लिए कर सकती है।

    आगे क्या?
    विधानसभा से पास होने के बाद अब इस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में कर्नाटक देश के उन राज्यों में शामिल होगा, जहां हेट स्पीच पर सबसे सख्त कानून लागू होगा।

    सरकार और विपक्ष के बीच जारी इस बहस के बीच इतना तय है कि हेट स्पीच को लेकर कर्नाटक का यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

    Delhi Blast Case: एनआईए के शिकंजे में व्हाइट कॉलर मॉड्यूल का एक और आतंकी, शोपियां का यासिर डार दिल्ली से गिरफ्तार

    दिल्ली विस्फोट मामले में को बड़ी कामयाबी मिली है। एनआईए ने व्हाइट कॉलर मॉड्यूल से जुड़े एक और आतंकी यासिर डार को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी यासिर डार दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यह गिरफ्तारी दिल्ली में हुए विस्फोट की साजिश की कड़ियां जोड़ने में बेहद अहम मानी जा रही है।

    पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी
    गिरफ्तारी के बाद एनआईए ने यासिर डार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने उसे 26 दिसंबर तक एनआईए रिमांड पर भेज दिया है। एजेंसी अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि विस्फोट के पीछे की पूरी साजिश, नेटवर्क और फंडिंग से जुड़े तथ्यों का खुलासा किया जा सके।

    व्हाइट कॉलर मॉड्यूल पर फोकस
    जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक आतंकी हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित ‘व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल’ काम कर रहा था। यह मॉड्यूल पढ़े-लिखे युवाओं, फर्जी पहचान, डिजिटल लेनदेन और तकनीकी संसाधनों के जरिए आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में शामिल रहा है।

    कश्मीर से दिल्ली तक नेटवर्क
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यासिर डार का संपर्क कश्मीर में बैठे आतंकी आकाओं से था और वह दिल्ली में सक्रिय स्लीपर सेल के लिए काम कर रहा था। एनआईए को शक है कि आरोपी ने लॉजिस्टिक सपोर्ट, सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन में अहम भूमिका निभाई।

    पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
    एनआईए इससे पहले भी दिल्ली विस्फोट मामले में कई संदिग्धों को गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी का मानना है कि यासिर डार की गिरफ्तारी से इस पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।

    जांच तेज, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
    दिल्ली विस्फोट को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं। एनआईए, दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां मिलकर इस मामले की जांच कर रही हैं। एजेंसी का दावा है कि देश की सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे को समय रहते नाकाम किया जाएगा।

    दिल्ली ब्लास्ट केस में यह गिरफ्तारी साफ संकेत है कि जांच एजेंसियां आतंक के हर नेटवर्क तक पहुंचने के लिए पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हैं।

    पाकिस्तान की यूनिवर्सिटी में संस्कृत की एंट्री, महाभारत–गीता तक पहुंचेगा पाठ्यक्रम

    Pakistan Sanskrit Course launch: भारत-पाक बंटवारे के बाद पहली बार पाकिस्तान के किसी विश्वविद्यालय में संस्कृत का औपचारिक पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (LUMS) ने संस्कृत का चार क्रेडिट का कोर्स लॉन्च किया है। यह फैसला न सिर्फ शैक्षणिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है, बल्कि इसे दक्षिण एशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत को समझने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।

    क्यों पढ़ाई जा रही है संस्कृत?
    यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि संस्कृत किसी एक धर्म या देश तक सीमित भाषा नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सभ्यतागत धरोहर है। इसे अकादमिक रूप से समझना जरूरी है, ताकि इतिहास, दर्शन, साहित्य और समाजशास्त्र के कई पहलुओं पर गहराई से शोध किया जा सके।

    विश्वविद्यालय के मुताबिक पाकिस्तान में संस्कृत से जुड़े कई अहम लेकिन अब तक उपेक्षित अकादमिक दस्तावेज मौजूद हैं, जिन पर पर्याप्त शोध नहीं हो पाया है। स्थानीय स्तर पर संस्कृत की पढ़ाई शुरू होने से इन स्रोतों का वैज्ञानिक और अकादमिक अध्ययन संभव हो सकेगा।

    ताड़पत्र पांडुलिपियों पर होगा शोध
    सूत्रों के अनुसार, पंजाब यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में संस्कृत की सैकड़ों दुर्लभ ताड़पत्र पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। अब तक भाषा विशेषज्ञों की कमी के कारण इन पर गंभीर शोध नहीं हो सका। LUMS का मानना है कि संस्कृत का कोर्स शुरू होने से इन पांडुलिपियों का अध्ययन, अनुवाद और संरक्षण आसान होगा।

    प्रोफेसर शाहिद रशीद की अहम भूमिका
    इस पहल के पीछे समाजशास्त्र के प्रोफेसर शाहिद रशीद की भूमिका को अहम माना जा रहा है। उन्होंने संस्कृत को एक अकादमिक और ऐतिहासिक भाषा के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। उनका तर्क था कि दक्षिण एशिया के इतिहास और संस्कृति को समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान बेहद जरूरी है।

    महाभारत और भगवद् गीता पर भी आएगा कोर्स
    विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में महाभारत और भगवद् गीता जैसे प्राचीन ग्रंथों पर भी विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। इन ग्रंथों को धार्मिक नहीं, बल्कि दार्शनिक, सामाजिक और साहित्यिक दृष्टिकोण से पढ़ाया जाएगा।

    शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज
    पाकिस्तान की यूनिवर्सिटी में संस्कृत की पढ़ाई शुरू होने की खबर ने शैक्षणिक और बौद्धिक जगत में चर्चा तेज कर दी है। इसे एक ऐसे प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जो राजनीति से अलग हटकर साझा इतिहास और संस्कृति को समझने की कोशिश करता है।

    संस्कृत एक सेतु बन सकती है
    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत और पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संवाद का एक नया सेतु बन सकती है। भाषा और ज्ञान की दुनिया में यह कदम यह संदेश देता है कि सभ्यताएं सीमाओं से बड़ी होती हैं और उनका अध्ययन आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है।

    रिटायरमेंट की दहलीज पर ‘ज्यूडिशियल छक्के’ क्यों? CJI सूर्यकांत ने जताई गहरी चिंता

    न्यायिक शुचिता और जवाबदेही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए जजों के आचरण पर सख्त सवाल उठाए हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि रिटायरमेंट से ठीक पहले कुछ जजों द्वारा असामान्य तेजी से आदेश पारित करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्यायपालिका के लिए चिंताजनक संकेत है।

    यह टिप्पणी उस समय आई, जब सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश के एक प्रधान जिला न्यायाधीश की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जज ने अपने सस्पेंशन को चुनौती दी थी, जो उनकी रिटायरमेंट से महज 10 दिन पहले किया गया था। आरोप है कि सस्पेंशन उनके द्वारा पारित किए गए दो न्यायिक आदेशों से जुड़ा था।

    ‘छक्के मारने’ वाली प्रवृत्ति पर नाराजगी
    CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिटायरमेंट से ठीक पहले जजों द्वारा एक के बाद एक बड़े आदेश पारित करना एक “दुर्भाग्यपूर्ण चलन” बनता जा रहा है। CJI ने टिप्पणी की,
    “याचिकाकर्ता ने रिटायरमेंट से ठीक पहले छक्के मारना शुरू कर दिया। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है, जिस पर ज्यादा बोलना भी उचित नहीं।”

    रिटायरमेंट, सस्पेंशन और उम्र बढ़ने का पेच
    जिला जज को मूल रूप से 30 नवंबर को रिटायर होना था, लेकिन विवादित आदेशों के बाद 19 नवंबर को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि जज का रिटायरमेंट एक साल के लिए टाल दिया जाए, क्योंकि राज्य सरकार ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष कर दी थी।

    इस पर CJI ने तंज कसते हुए सवाल किया कि जब संबंधित ज्यूडिशियल ऑफिसर ने वे दो आदेश पारित किए, तब क्या उसे यह जानकारी थी कि उसकी रिटायरमेंट की उम्र एक साल बढ़ने वाली है?

    हाई कोर्ट क्यों नहीं गए?
    बेंच ने यह भी सवाल उठाया कि सस्पेंशन को चुनौती देने के लिए जिला जज सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए, जबकि आमतौर पर ऐसे मामलों में हाई कोर्ट का रुख किया जाता है।
    जज के वकील ने दलील दी कि चूंकि सस्पेंशन पूरे कोर्ट के फैसले के तहत हुआ था, इसलिए निष्पक्ष सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना बेहतर विकल्प समझा गया।

    अनुशासन बनाम बेईमानी
    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सिद्धांत भी रेखांकित किया। बेंच ने कहा कि सिर्फ गलत आदेश पारित करने के आधार पर किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई या सस्पेंशन नहीं किया जा सकता। लेकिन साथ ही सवाल भी उठाया—
    “अगर आदेश प्रथम दृष्टया बेईमानी या दुर्भावनापूर्ण मंशा से दिए गए हों, तो क्या स्थिति वही रहेगी?”

    न्यायपालिका के लिए चेतावनी
    CJI की यह टिप्पणी केवल एक मामले तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे न्यायपालिका के भीतर आत्ममंथन की जरूरत के रूप में देखा जा रहा है। रिटायरमेंट से पहले ‘फैसलों की बाढ़’ पर सवाल उठाकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि न्यायिक पद की गरिमा से कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

    दिल्ली में ग्रैप-III के उपाय लागू, AQI 400 पार पहुंचा, इन कामों पर लगा बैन

    दिल्ली की हवा का स्तर बेहद खराब स्तर तक पहुंच गया है। लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। ऐसे में प्रशासन ने ग्रैप-III के उपाय लागू किए हैं।दिल्ली में हवा का स्तर बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया है। इससे निपटने के लिए ग्रैप-III के उपाय लागू कर दिए गए हैं। शनिवार सुबह दिल्ली का एक्यूआई 390 दर्ज किया गया। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है। इसके बाद ग्रैप-III के उपाय लागू किए गए। सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण के स्तर के आधार पर दिल्ली और आसपास के एनसीआर में जीआरएपी के तहत प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। हालांकि, सर्दी के दौरान दिल्ली की औसतन बेहद खराब रहती है। डॉक्टरों के अनुसार इससे फेफड़ों और हृदर को गंभीर नुकसान हो सकता है।

    जीआरएपी के चार चरण
    जीआरएपी वायु गुणवत्ता को चार चरणों में वर्गीकृत करता है। चरण 1 (खराब, एक्यूआई 201-300), चरण 2 (बहुत खराब, एक्यूआई 301-400), चरण 3 (गंभीर, एक्यूआई 401-450) और चरण 4 (गंभीर से भी अधिक, एक्यूआई 450 से ऊपर)। एक्यूआई की मात्रा बढ़ने के साथ ग्रैप के उपाय बढ़ते जाते हैं और कई तरह के कामों में बैन लग जाता है।

    इन कामों पर लगी रोक
    जीआरएपी-3 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों में गैर-जरूरी निर्माण और विध्वंस कार्यों के साथ-साथ पत्थर तोड़ने और खनन गतिविधियों पर रोक शामिल है। इसके अंतर्गत दिल्ली में पुराने डीजल मालवाहक वाहनों पर प्रतिबंध है, जबकि कक्षा 5 तक के स्कूल हाइब्रिड मोड में स्थानांतरित हो गए हैं और दिल्ली-एनसीआर में कार्यालय 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम कर सकते हैं।

    वजीरपुर की हालत सबसे खराब
    शनिवार की सुबह, राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। वजीरपुर की हालत सबसे खराब रही। यहां का एक्यूआई 443 था। जहांगीरपुरी में 439 और विवेक विहार में 437 एक्यूआई दर्ज किया गया। अन्य क्षेत्रों में आनंद विहार (435), बुराड़ी क्रॉसिंग (415), चांदनी चौक (419), गाजीपुर (435), जहांगीरपुरी (442), आरके पुरम (404) और रोहिणी (436) ऐसे केंद्र रहे, जहां एक्यूआई 400 से ज्यादा रहा।

    कहीं आप भी तो नहीं खा रहे जहरीले मोमो? ज्यादा मात्रा में मिलाया जा रहा अजीनोमोटो, अवैध प्लांट कराया गया बंद

    मध्य प्रदेश के इंदौर में मोमो में ज्यादा मात्रा में अजीनोमोटो मिलाया जा रहा है। जांच में बात सही पाए जाने पर एक अवैध मोमो के प्लांट को बंद भी करवाया गया है।इंदौर: मोमो खाना भारत में एक आम बात है। बड़ी संख्या में देशवासी मोमो खाते हैं और इसका मार्केट बहुत बड़ा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोमो खाना आपके घर में मौजूद गर्भवती महिला और 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नुकसानदेह हो सकता है और इसके पीछे की वजह है मोमो में होने वाली अवैध मिलावटखोरी। दरअसल तमाम जगहों पर मोमो में तय मात्रा से ज्यादा अजीनोमोटो मिलाया जा रहा है।

    क्या है पूरा मामला?
    ताजा मामला मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आया है। यहां मिलावट के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत मंगलवार को मोमो के एक अवैध प्लांट को बंद कराया गया है। अधिकारियों ने बताया है कि इस प्लांट में जो मोमो तैयार किए जा रहे थे, उनमें तय सीमा से ज्यादा अजीनोमोटो होने के खुलासे के बाद कार्रवाई की गई।

    दरअसल इंदौर के खातीपुरा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अलग-अलग तरह के मोमो एक प्लांट में बनाए जा रहे थे। यहां से कई जगहों पर मोमो की आपूर्ति की जा रही थी। लेकिन जब यहां चेकिंग हुई तो पता लगा कि यहां स्वीकृत मात्रा से ज्यादा अजीनोमोटो मिलाया जा रहा है।

    अजीनोमोटो क्या होता है?
    अजीनोमोटो को ‘मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी)’ भी कहते हैं, जो किसी भी खाने की चीज का स्वाद बढ़ा देता है। अगर चाइनीज आइटम्स समेत तमाम व्यंजनों में इसे नहीं डाला जाए तो कई लोगों को तो खाने में स्वाद भी नहीं लगेगा। ऐसे में खाने की चीजों में अजीनोमोटो डालने की एक सीमा तय की गई है लेकिन तमाम लोग नियम का उल्लंघन करते हैं और तय सीमा से ज्यादा अजीनोमोटो डालते हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि अजीनोमोटो का तय मात्रा से ज्यादा इस्तेमाल करने से कुछ लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इनमें गर्भवती महिलाएं और 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे शामिल हैं।

    जिस प्लांट पर कार्रवाई हुई, वहां मिली गंदगी
    अधिकारियों के मुताबिक, मोमो के जिस प्लांट पर कार्रवाई की गई है, उसके परिसर में स्वच्छता का खयाल नहीं रखा गया था और कच्चे माल को सही से स्टोर भी नहीं किया गया था। इसके अलावा प्लांट के पास मोमो बनाने के लिए कोई लीगल लाइसेंस भी नहीं था। ऐसे में इस प्लांट को अगले आदेश तक बंद करवा दिया गया है। मामले की गहराई से जांच की जा रही है। (

    हरियाणा में 25 लाख 41 हजार वोटों की चोरी हुई, हर 8 में से एक वोटर नकली”, राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप

    वोट चोरी के मुद्दे पर राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और हरियाणा के चुनावों के नतीजों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में 25 लाख 41 हजार वोटों की चोरी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक केंद्रीकृत ऑपरेशन है।नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी के मुद्दे पर बड़ी प्रेस कॉन्फेंस करते हुए वोट चोरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा में वोट चोरी हुई। राहुल ने दावा किया कि उनके पास सबूत हैं कि हरियाणा में 25 लाख मतदाता फर्जी हैं। हरियाणा में हर 8 में से 1 मतदाता फर्जी है।राहुल ने H फाइल्स के जरिए वोट चोरी का आरोप लगाया
    राहुल गांधी ने कहा, “हमारे पास ‘एच’ फाइल्स हैं और यह इस बारे में है कि कैसे एक पूरे राज्य को चुरा लिया गया है। हमें संदेह था कि यह व्यक्तिगत निर्वाचन क्षेत्रों में नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है।”

    राहुल गांधी ने कहा, “हमें हरियाणा में हमारे उम्मीदवारों से बहुत सारी शिकायतें मिलीं कि कुछ गड़बड़ है और काम नहीं कर रहा है। उनकी सारी भविष्यवाणियां उल्टी हो गईं। हमने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में इसका अनुभव किया था, लेकिन हमने हरियाणा पर ध्यान केंद्रित करने और वहां जो कुछ हुआ था, उसके बारे में विस्तार से जानने का फैसला किया।”

    हरियाणा के चुनाव नतीजों का उदाहरण दिया
    राहुल गांधी ने कहा, “सभी एग्जिट पोल हरियाणा में कांग्रेस की जीत की ओर इशारा कर रहे थे। दूसरी बात जो हमारे लिए आश्चर्यजनक थी, वह यह थी कि हरियाणा के चुनावी इतिहास में पहली बार डाक से वोट वास्तविक मतदान से अलग थे। हरियाणा में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। इसलिए, हमने सोचा कि आइए विस्तार से जानें। जब मैंने पहली बार यह जानकारी देखी, जो आप देखने जा रहे हैं, तो मुझे यकीन नहीं हुआ। मैं सदमे में था। मैंने टीम को कई बार क्रॉस-चेक करने के लिए कहा।”

    राहुल ने कहा, “मैं चाहता हूं कि भारत के युवा, जेन-जी इसे स्पष्ट रूप से समझें क्योंकि यह आपके भविष्य के बारे में है। मैं भारत में चुनाव आयोग, लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा हूं, इसलिए मैं इसे 100% सबूत के साथ कर रहा हूं। हमें पूरा यकीन है कि कांग्रेस की भारी जीत को हार में बदलने की योजना बनाई गई थी। कृपया उनके (सीएम नायब सैनी) चेहरे पर मुस्कान और उस ‘व्यवस्था’ पर ध्यान दें, जिसकी वह बात कर रहे हैं।” राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस हरियाणा में 22,779 वोटों से चुनाव हार गई।

    वोटर लिस्ट में ब्राजील की मॉडल की फोटो का इस्तेमाल किया गया: राहुल
    राहुल ने एक लड़की की तस्वीर दिखाकर बताया कि ये लड़की ब्राजील की मॉडल है, जिसका वोटर लिस्ट में कई जगहों पर इस्तेमाल किया और इस फोटो के जरिए हरियाणा में 22 बार अलग-अलग बूथों पर वोट डाला गया। इस फोटो वाली वोटर के कई नाम हैं, जैसे सीमा, स्वीटी और सरस्वती। इसका मतलब है कि यह एक केंद्रीकृत ऑपरेशन है। यह एक स्टॉक फोटो है और वह हरियाणा में ऐसे 25 लाख रिकॉर्डों में से एक है।”