Indore Water Tragedy:2025 में इंदौर शहर में पानी की गुणवत्ता से जुड़ी 266 शिकायतें दर्ज हुईं।भागीरथपुरा शामिल जोन-4 में 23 औपचारिक शिकायतें दर्ज की गईं।मेयर हेल्पलाइन के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले एक साल में 16 पानी-प्रदूषण मामलों को असिस्टेंट इंजीनियर योगेश जोशी को सौंपा गया।इनमें से सिर्फ 5 मामलों का समाधान हुआ, जबकि 7 मामलों को बिना समाधान के ‘पूर्ण’ दिखाकर बंद कर दिया गया।
नगर निगम के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, एक साल पहले ही नई नर्मदा पाइपलाइन बिछाने की फाइल तैयार हो चुकी थी।12 नवंबर 2024 को फाइल बनी,
30 जुलाई 2025 को टेंडर निकला,लेकिन काम का अंतिम आदेश 26 दिसंबर 2025 को दिया गया — ठीक उसी समय जब मौतें सामने आने लगीं।भागीरथपुरा के पार्षद कमल वाघेला ने पुष्टि की कि नई पाइपलाइन की मांग पिछले साल उठाई गई थी, लेकिनउनका आरोप है कि फाइल को करीब सात महीने तक जानबूझकर लंबित रखा गया।
31 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे पत्र में वाघेला ने कहा कि“बार-बार फॉलोअप के बावजूद अधिकारियों का जवाब सिर्फ ‘प्रक्रिया में है’ रहता था।”उन्होंने इसे प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि आपराधिक लापरवाही बताया और लिखा कि यह“जनस्वास्थ्य को जानबूझकर खतरे में डालने का मामला है।”
अधिकारियों की सफाई
निलंबित असिस्टेंट इंजीनियर योगेश जोशी ने कहा,
“मैं तीन जोन संभाल रहा हूं, यह अकेले संभव नहीं है। स्थानीय स्टाफ ने पहले ही स्थिति की जानकारी दी थी। हेड ऑफिस को भी पता था कि पाइपलाइन एक साल से खराब है। टेंडर तो निकला था, लेकिन वर्क ऑर्डर दो-तीन दिन पहले ही मिला।”
नगर निगम का पक्ष
अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया ने आरोपों को खारिज किया।उन्होंने कहा कि मरम्मत कार्य चल रहा था और इसे AMRUT 2.0 योजना से जोड़ा गया था।
उनके अनुसार,
“अगर एक तरफ योजना के तहत काम चल रहा हो और दूसरी तरफ टेंडर से, तो यह वित्तीय गड़बड़ी मानी जाएगी।”सिसोनिया ने बताया कि इलाके में दो मुख्य लाइनों का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका था और
26 दिसंबर को तीसरी लाइन पर काम शुरू किया गया।
जांच में यह सामने आया कि एक छोटी पुलिस चौकी मुख्य पाइपलाइन के ऊपर बनी थी,जिसमें बिना सेफ्टी टैंक वाला शौचालय था।उसी के नीचे टूटी हुई पाइपलाइन से पानी दूषित हुआ,जिससे डायरिया जैसी बीमारियां फैलीं।
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