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    इंदौर जल त्रासदी: पानी में एसिड, बदबू और बीमारी’: इंदौर में प्रशासनिक लापरवाही बनी जानलेवा

    Indore Water Tragedy:2025 में इंदौर शहर में पानी की गुणवत्ता से जुड़ी 266 शिकायतें दर्ज हुईं।भागीरथपुरा शामिल जोन-4 में 23 औपचारिक शिकायतें दर्ज की गईं।मेयर हेल्पलाइन के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले एक साल में 16 पानी-प्रदूषण मामलों को असिस्टेंट इंजीनियर योगेश जोशी को सौंपा गया।इनमें से सिर्फ 5 मामलों का समाधान हुआ, जबकि 7 मामलों को बिना समाधान के ‘पूर्ण’ दिखाकर बंद कर दिया गया।

    नगर निगम के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, एक साल पहले ही नई नर्मदा पाइपलाइन बिछाने की फाइल तैयार हो चुकी थी।12 नवंबर 2024 को फाइल बनी,
    30 जुलाई 2025 को टेंडर निकला,लेकिन काम का अंतिम आदेश 26 दिसंबर 2025 को दिया गया — ठीक उसी समय जब मौतें सामने आने लगीं।भागीरथपुरा के पार्षद कमल वाघेला ने पुष्टि की कि नई पाइपलाइन की मांग पिछले साल उठाई गई थी, लेकिनउनका आरोप है कि फाइल को करीब सात महीने तक जानबूझकर लंबित रखा गया

    31 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे पत्र में वाघेला ने कहा कि“बार-बार फॉलोअप के बावजूद अधिकारियों का जवाब सिर्फ ‘प्रक्रिया में है’ रहता था।”उन्होंने इसे प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि आपराधिक लापरवाही बताया और लिखा कि यह“जनस्वास्थ्य को जानबूझकर खतरे में डालने का मामला है।”

    अधिकारियों की सफाई

    निलंबित असिस्टेंट इंजीनियर योगेश जोशी ने कहा,
    “मैं तीन जोन संभाल रहा हूं, यह अकेले संभव नहीं है। स्थानीय स्टाफ ने पहले ही स्थिति की जानकारी दी थी। हेड ऑफिस को भी पता था कि पाइपलाइन एक साल से खराब है। टेंडर तो निकला था, लेकिन वर्क ऑर्डर दो-तीन दिन पहले ही मिला।”

    नगर निगम का पक्ष

    अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया ने आरोपों को खारिज किया।उन्होंने कहा कि मरम्मत कार्य चल रहा था और इसे AMRUT 2.0 योजना से जोड़ा गया था।

    उनके अनुसार,
    “अगर एक तरफ योजना के तहत काम चल रहा हो और दूसरी तरफ टेंडर से, तो यह वित्तीय गड़बड़ी मानी जाएगी।”सिसोनिया ने बताया कि इलाके में दो मुख्य लाइनों का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका था और
    26 दिसंबर को तीसरी लाइन पर काम शुरू किया गया।

    जांच में यह सामने आया कि एक छोटी पुलिस चौकी मुख्य पाइपलाइन के ऊपर बनी थी,जिसमें बिना सेफ्टी टैंक वाला शौचालय था।उसी के नीचे टूटी हुई पाइपलाइन से पानी दूषित हुआ,जिससे डायरिया जैसी बीमारियां फैलीं।

    ये भी पढ़ें: आरएसएस की तारीफ कर बुरे फसें दिग्गी राजा : जानिए दिग्विजय सिंह के बयान से क्यों कटा बबाल

    पत्रकारो का उमड़ा हुजूम …शर्मशार हुई पत्रकारिता…क्या दिया जा रहा है भविष्य का संकेत

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    वाह री पत्रकारिता…

    Bhopal press confrence: पत्रकारिता और पत्रकारो का स्तर दिन पे दिन गिरता जा रहा है..यह बात तो गाहे- बगाहे चर्चा मे आती रही है लेकिन पिछले दिनो मोहन सरकार के दो साल पूरे होने पर जो दृश्य देखा या  दिखाया गया वह वाकई मे पत्रकारिता के घिनौने भविष्य को इंगित कर रहा है…मै ये नही लिखना चाहता कि पत्रकारिता आगे आने वाले समय मे इस दृष्य का अनुसरण करती रहेगी…लेकिन पत्रकारो के ही द्वारा जो कृत्य किया जा रहा है उसके बारे मे कम से कम यह  तो कहा ही जा सकता है कि आने वाले समय मे पीत पत्रकारिता भी स्वस्थ पत्राकारिता के मिसाल के तौर पर देखी जायेगी..जी हां अलग अलग विभागो के मंत्रियो द्वारा मोहन सरकार के दो साल के काम काज का बखान करने के लिये प्रेस कांफ्रेस का आयोजन किया गया…स्थान भी अलग अलग थे…मगर भोपाल मे होने वाली प्रेस काफ्रेस मे चेहरे एक जैसे थे….हां कुछ सोचने समझने और उसे पाठको तक परोसने वाले प्राणी भी थे मगर कांफ्रेन्स मे उमड़े हुजूम मे वे ओझल हो गये…खुसपुसाहट तो इस बात की भी हो रही है कि विभाग के ही अफसरो द्वारा ठेके पर पत्रकार भी न्यौते गये थे लेकिन अगर ऐसा था तो प्रेस कांफ्रेन्स करवाने की जिम्मेवारी के ओहदे पर बैठे हुक्मरान क्या कर रहे थे..हालांकि मै उस जगह उपस्थित नही था,,,,हां पिछले कई सालों से इस आदर्श काम के लिये मै जा भी नही रहा हूं…लेकिन जो फुटेज देखने को मिले उससे मै खुद शर्मशार  हो गया अगर चालीस साल पहले इस बात का जरा सा भी आभास होता कि आने वाले समय मे पत्रकारो का यह रुप भी देखने को मिलेगा तो शायद मेरा रास्ता ही कुछ और होता….खैर  जब सवाल ही नहीं हुए तो जबाब खोजना बेमानी होगा….हां जो देखने को मिला उसके लिये….थू…थू…एक थैले के लिये इतना मारा मारी….यह तो दक्षिण के फिल्मो वाला दृष्य था जब नेता अभिनेता गरीब बस्तियो मे राहत सामाग्री वितरण करने जाते है  तो इस तरह के भगदड़ होने के दृष्य फिल्माये जाते है…..अन्त  मे यह लिखने से भी गुरेज नही है ….अब तो बस…बस..बस…

     

    अभिनेत्री खुशी मुकर्जी ने सूर्य कुमार यादव पर लगाया सनसनीखेज आरोप…यादव करते थे मैसेज

    बयान से मची हलचल

    खुशी मुखर्जी ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान दावा किया कि सूर्यकुमार यादव कभी उन्हें मैसेज किया करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ सूर्यकुमार ही नहीं, बल्कि कई अन्य क्रिकेटर्स भी उनके संपर्क में रहने की कोशिश कर चुके हैं। इस बयान के वायरल होते ही फैंस के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। फिलहाल इस मामले पर सूर्यकुमार यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    कौन हैं खुशी मुखर्जी?

    खुशी मुखर्जी का जन्म 24 नवंबर 1996 को कोलकाता में हुआ था। बंगाल में जन्मीं खुशी ने बेहद कम उम्र में ही अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था। बचपन से ही फिल्मों में काम करने का सपना देखने वाली खुशी ने अपने इसी जुनून को आगे बढ़ाते हुए साउथ फिल्म इंडस्ट्री का रुख किया।

    साउथ फिल्मों से करियर की शुरुआत

    खुशी मुखर्जी ने साल 2013 में एक तमिल फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने तेलुगु सिनेमा में भी काम किया, जहां अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। समय के साथ वह टीवी शोज़ और वेब सीरीज का भी हिस्सा बनीं।

    विवादों से पुराना नाता

    खुशी मुखर्जी अपने काम के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपने बोल्ड और अतरंगी लुक्स को लेकर भी कई बार विवादों में रह चुकी हैं। उनके फैशन सेंस और बयानों को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ती रही है। अब सूर्यकुमार यादव को लेकर दिए गए बयान ने एक बार फिर उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चाओं का विषय बना हुआ है और हर कोई खुशी मुखर्जी की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को लेकर जानने में दिलचस्पी दिखा रहा है।

    आरएसएस की तारीफ कर बुरे फसें दिग्गी राजा : जानिए दिग्विजय सिंह के बयान से क्यों कटा बबाल

    Digvijaya rss remark-debate:कांग्रेस के सीनियर लीडर दिग्विजय सिंह एक बार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। कारण उनका बयान, जिसमें उन्होंने आरएसएस और पीएम मोदी को लेकर जमकर तारीफ की थी। मामला तूल पकड़ता देख उन्हें सफाई तक देनी पड़ी। चलिए बात करते हैं उनके उस बयान की, जिसने सियासी मैदान में खूब बवाल काटा।

    शनिवार के दिन दिग्विजय सिंह ने एक पोस्ट शेयर की थी। पोस्ट एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर थी, जिसमें पीएम मोदी और लाल कृष्ण आडवाणी दिखाई दे रहे थे। तस्वीर में पीएम मोदी, लाल कृष्ण आडवाणी के पैर के पास नीचे ज़मीन पर बैठे थे। ये तस्वीर उन दिनों की थी, जब मोदी का कद महज एक राजनीतिक कार्यकर्ता का था। दिग्विजय सिंह ने तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा,
    ‘RSS का जमीनी स्वयंसेवक और बीजेपी का जमीनी कार्यकर्ता नीचे बैठकर सीएम और पीएम बना… यह संगठन की शक्ति है।’

    बयान पर देनी पड़ी सफाई

    मामला तूल पकड़ता देख उन्होंने माफ़ी मांगनी पड़ी। उन्होंने कहा मैंने आरएसएस के संगठन की तारीफ की थी। मैं शुरू से आरएसएस और मोदी का कट्टर आलोचक हूँ। मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

    इन नेताओं ने दी प्रतिक्रिया
    जयराम रमेश ने कहा कि यह दिग्विजय सिंह का व्यक्तिगत बयान है, पार्टी की आधिकारिक राय नहीं।
    सचिन पायलट ने साफ किया कि कांग्रेस का आरएसएस पर रुख पहले जैसा ही है।
    इमरान प्रतापगढ़ी ने बयान से दूरी बनाते हुए इसे निजी विचार बताया।

    बीजेपी की प्रतिक्रिया

    संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता ने आरएसएस की ताकत मान ली।
    अमित मालवीय ने तंज कसते हुए कहा कि सच्चाई खुद कांग्रेस के नेता स्वीकार कर रहे हैं।
    रिपोर्ट एवं लेखन : प्रियांशु झारिया
    ये खबर भी पढ़ें: अरावली खनन विवाद: सरकार के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला”

    सत्ता से पहले सादगी: जब अटल बिहारी वाजपेयी साइकिल से करते थे सफर

    आज 25 दिसंबर है। देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहा है। मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक, सभाओं, संगोष्ठियों और सोशल मीडिया श्रद्धांजलियों का दौर जारी है। देश उन्हें एक कुशल प्रधानमंत्री, ओजस्वी वक्ता और संवेदनशील कवि के रूप में याद कर रहा है।
    लेकिन अटल जयंती पर एक सवाल बार-बार मन में उठता है—क्या अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ दिल्ली की राजनीति के नेता थे?

    इस सवाल का जवाब साफ है—नहीं।
    अटल सिर्फ सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले नेता नहीं थे, बल्कि उनकी राजनीतिक चेतना, सोच और संस्कार मध्यप्रदेश की मिट्टी में गहरे धंसे हुए थे।

    ग्वालियर: जहां अटल का सिर्फ जन्म नहीं, दृष्टि भी गढ़ी गई

    25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी के लिए यह शहर केवल जन्मस्थान नहीं था। यह उनकी राजनीतिक सोच की पहली प्रयोगशाला था।
    ग्वालियर की सामाजिक विविधता, सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक माहौल ने अटल को भीड़ से अलग नेता बनाया। यहां उन्होंने सीखा कि राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि समाज को समझने की कला है।

    बहुत कम लोग जानते हैं कि अटल ने शुरुआती दौर में ग्वालियर और चंबल अंचल में जनसंघ को खड़ा करने के लिए लगातार यात्राएं कीं—बिना संसाधन, बिना संगठन और बिना सत्ता।
    कई बार तो वे साइकिल पर गांव-गांव घूमते रहे। उस समय उनके पास न पद था, न पहचान—था तो सिर्फ विचार और प्रतिबद्धता।

    संसद से पहले मध्यप्रदेश बना अटल का कर्मक्षेत्र

    1957 में संसद पहुंचने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने मध्यप्रदेश को अपना राजनीतिक प्रयोगक्षेत्र बनाया।
    यहीं उन्होंने राजनीति को भाषणों से नहीं, व्यवहार से सिखाया। कार्यकर्ताओं को आदेश से नहीं, उदाहरण से जोड़ा।

    राजनीतिक इतिहासकार मानते हैं कि अगर आज भाजपा एक कैडर-बेस्ड पार्टी है, तो उसकी नींव अटल युग में मध्यप्रदेश से ही पड़ी।

    भोपाल के भाषण और गरिमामय राजनीति की पाठशाला

    भोपाल में दिए गए अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण आज भी राजनीतिक संवाद की मिसाल माने जाते हैं।
    यहीं उन्होंने कहा था—
    “विरोध भी गरिमा के साथ होना चाहिए।”

    कम ही लोग जानते हैं कि भोपाल में उनके भाषणों की भाषा, लय और भाव को स्थानीय बुद्धिजीवियों के साथ बैठकर तराशा गया। वही शैली आगे चलकर संसद में उनकी पहचान बनी—कटाक्ष में भी शालीनता और विरोध में भी मर्यादा।

    नेतृत्व गढ़ने की प्रयोगशाला बना मध्यप्रदेश

    अटल ने मध्यप्रदेश को कभी सिर्फ वोट बैंक नहीं माना। उन्होंने यहां नेतृत्व तैयार किया।
    कुशाभाऊ ठाकरे को संगठन की कमान देना, सुंदरलाल पटवा और कैलाश जोशी जैसे नेताओं को वैचारिक संरक्षण देना—ये फैसले बताते हैं कि अटल सत्ता से पहले संगठन को महत्व देते थे।

    उनकी राजनीति व्यक्ति-केंद्रित नहीं, विचार-केंद्रित थी।

    प्रधानमंत्री रहते हुए भी एमपी से भावनात्मक जुड़ाव

    प्रधानमंत्री बनने के बाद भी अटल का मध्यप्रदेश से रिश्ता औपचारिक नहीं रहा।
    नर्मदा परियोजना, आदिवासी पुनर्वास और बुंदेलखंड जैसे मुद्दों पर वे सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहे।
    अफसरों के मुताबिक,
    “अटल जी जमीन की सच्चाई देखना चाहते थे, सिर्फ नोटशीट नहीं।”

    कवि अटल की रचनाओं में भी बसता है मध्यप्रदेश

    अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं में जो करुणा, मौन और आत्मसंघर्ष दिखाई देता है, उसका बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश के सामाजिक अनुभवों से उपजा माना जाता है।
    ग्वालियर की संस्कृति, भोपाल का बौद्धिक माहौल और विंध्य-बुंदेलखंड का संघर्ष—इन सबकी छाप उनकी कविताओं में साफ दिखती है।

    अटल जयंती पर आत्ममंथन का समय

    आज अटल जयंती पर जहां कार्यक्रम हो रहे हैं, वहीं मध्यप्रदेश के लिए यह आत्ममंथन का भी अवसर है।
    क्या आज की राजनीति अटल जैसी संयमित है?
    क्या संवाद में वही गरिमा बची है?

    कहना होगा कि अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थे, वे राजनीति की एक संस्कृति थे—और उस संस्कृति की सबसे गहरी जड़ें मध्यप्रदेश में थीं।

    मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का आखिरी मौका, इस दिन तक दर्ज करा सकते हैं नाम, जानें फॉर्म भरने का सही तरीका

    चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद अब पात्र नागरिक नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    कैसे देखें मतदाता सूची

    मतदाता अपने मतदान केंद्र पर जाकर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर सकते हैं या फिर घर बैठे ऑनलाइन मतदाता सूची देख सकते हैं। यदि सूची में नाम नहीं है, तो फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाया जा सकता है। नाम हटाने या संशोधन के लिए भी संबंधित फॉर्म के जरिए आवेदन किया जा सकता है।

    बूथ पर कब और कैसे करें आवेदन

    22 जनवरी तक सोमवार से शुक्रवार के बीच हर मतदान केंद्र पर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक BLO उपलब्ध रहेंगे। आवेदन उन्हें सीधे सौंपे जा सकते हैं या फिर ऑनलाइन माध्यम से भी जमा किए जा सकते हैं। राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को प्रतिदिन अधिकतम 50 फॉर्म जमा करने का अधिकार दिया गया है।

    ऑनलाइन आवेदन के विकल्प

    ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए मतदाता इन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं—

    • Voter Helpline App

    • चुनाव आयोग का पोर्टल: voters.eci.gov.in

    • मध्यप्रदेश मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का पोर्टल: ceoelection.mp.gov.in

    पात्रता और उम्र की शर्त

    1 जनवरी 2026 को जिनकी उम्र 18 वर्ष पूरी हो रही है, वे नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, जिन मतदाताओं के नाम पहले सूची से हट गए थे और वे पात्र हैं, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोबारा फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं।

    अब तक आए आवेदन

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अनुसार, SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले नाम जोड़ने के लिए 42,953 और नाम हटाने के लिए 24,709 आवेदन प्राप्त हुए थे। चूंकि 25 अक्टूबर 2025 के बाद नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया बंद कर दी गई थी, इसलिए इन सभी आवेदनों पर फैसला दावा-आपत्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा।

    BLO और पंजीकरण अधिकारियों से संपर्क

    प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाता होते हैं, जिससे सूची देखना आसान रहता है। नाम न होने पर, हटाने या संशोधन के लिए वहीं फॉर्म भरकर दिया जा सकता है। इसके अलावा, पंजीकरण अधिकारी, अतिरिक्त या सहायक पंजीकरण अधिकारियों को भी सीधे आवेदन सौंपे जा सकते हैं।

    यदि आप आगामी चुनावों में मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो समय रहते अपनी मतदाता स्थिति जांचें और जरूरी होने पर आवेदन जरूर करें।

    6 में निवेश का नया अवसर: सोना–चांदी के बाद कॉपर, प्लैटिनम, शेयर और प्रॉपर्टी में बंपर कमाई

    Business News update:2025 निवेशकों के लिए काफी अच्छा रहा। सोने के दाम आसमान छू रहे थे। वहीं, प्रॉपर्टी और शेयर में भी कई मामलों में यह साल अच्छा रहा। लेकिन अभी साल के अंत में निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल है कि नए साल में क्या होगा। सोना, चांदी या प्रॉपर्टी—किसमें निवेश करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा?तो देर न करते हुए, चलिए जानते हैं खबर जो आपके काम की है

    सोना और चांदी में निवेश जारी रह सकता है

    विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में भी सोने की कीमत में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की संभावना है। वैश्विक मार्केट में सोना $6,000 प्रति औंस तक जा सकता है, यानी भारतीय बाजार में 10 ग्राम का सोना ₹1.90 लाख तक पहुँच सकता है। चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ने से इसकी कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। हालांकि, चांदी में हाई रिटर्न के साथ हाई रिस्क भी जुड़ा है।


    Copper और Platinum में नया जलवा

    2025 में सोने और चांदी की रैली के बाद 2026 में कॉपर और प्लैटिनम निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं। कॉपर की कीमत सप्लाई में रुकावट और मजबूत डिमांड के कारण रिकॉर्ड हाई पर है। जनवरी कॉपर वायदा MCX पर ₹1,181.90 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। प्लैटिनम की कीमतें भी 160% बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि ये धातुएं अगले साल निवेशकों को अच्छी कमाई दे सकती हैं, लेकिन कम लिक्विडिटी के कारण उतार-चढ़ाव भी रहेंगे।

    शेयर बाजार में उम्मीद

    कोटक म्यूचुअल फंड के मार्केट आउटलुक 2026 के अनुसार, ब्याज दरों में नरमी और मजबूत स्ट्रक्चरल ग्रोथ के कारण शेयर बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिल सकती है। बैंकिंग, ई-कॉमर्स, हेल्थकेयर और वाहन सेक्टर के लिस्टेड शेयर में निवेशकों को आकर्षक रिटर्न मिल सकते हैं। FY26 की दूसरी छमाही से कमाई में तेजी आने की उम्मीद है।

    रियल एस्टेट में भी बनेगी रणनीतिक कमाई

    रियल एस्टेट 2026 में निवेशकों की पहली पसंद बना रहेगा। शहरों में बढ़ती मांग, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और HNI/NRI निवेशकों की रुचि प्रॉपर्टी रिटर्न को और मजबूत करेगी। लक्जरी रेजिडेंस, गेटेड विला और बड़े फ्लैट की मांग बढ़ने की उम्मीद है। कमर्शियल रियल एस्टेट में ग्रेड-A ऑफिस, इंडस्ट्रियल वियर्स और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस निवेशकों को आकर्षक अवसर देंगे।

    विशेषज्ञ की सलाह

    विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में निवेशकों को संतुलित पोर्टफोलियो रखना चाहिए। सोना–चांदी में लंबी अवधि निवेश, Copper–Platinum में मध्यम अवधि की उम्मीद, शेयर बाजार में रणनीतिक निवेश और रियल एस्टेट में स्ट्रैटेजिक निवेश से बंपर रिटर्न संभव हैं।

     

    क्रिसमस के मौके पर चर्च पहुंचे पीएम मोदी, देशवासियों को दी बधाई”

    PM Modi at Cathedral Church: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिसमस की सुबह दिल्ली के द कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन में बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय के लोगों के साथ प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। इस अवसर पर दिल्ली के बिशप राइट रेवरेंड पॉल ने पीएम मोदी के लिए विशेष प्रार्थना की।

    कार्यक्रम के हिस्सा बने मोदी

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया X हैंडल पर लिखा कि, “दिल्ली में द कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन में क्रिसमस की सुबह शामिल हुआ। यहां प्यार, शांति और करुणा का शाश्वत संदेश झलका। उम्मीद है कि क्रिसमस की भावना हमारे समाज में सद्भाव और भाईचारा लाएगी।” उन्होंने इस मौके की कुछ झलकियां और एक वीडियो भी साझा किया।

    पीएम मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है जो ईसाई समुदाय से जुड़े हैं। ईस्टर 2023 में वे दिल्ली के सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल में आयोजित ईस्टर कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे। इसके अलावा उन्होंने मंत्री जॉर्ज कुरियन के आवास पर डिनर और CBCI द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी भाग लिया।

     देशवासियों को शुभकामनाएं दीं

    क्रिसमस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त की कि ईसा मसीह की शिक्षाएं समाज में सद्भाव को और मजबूत करती रहेंगी। उन्होंने X पर लिखा, “शांति, करुणा और आशा से भरे आनंदमय क्रिसमस की सभी को शुभकामनाएं। ईसा मसीह की शिक्षाएं हमारे समाज में सद्भाव को सुदृढ़ करें।”
    इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर्व के महत्व और सामाजिक सद्भाव पर जोर देते हुए सभी नागरिकों को मिलजुल कर त्योहार मनाने का संदेश दिया।

    अरावली खनन विवाद: सरकार के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला”

    अरावली खनन विवाद: इन दिनों अरावली नेशनल इशू बनकर उभरी है। चाहे फिर मेनस्ट्रीम मीडिया हो या सोशल मीडिया, हर जगह इस पर बात हो रही है। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की अरावली को लेकर 100 मीटर वाली परिभाषा को स्वीकार कर लिया है। खास बात यह है कि इसी परिभाषा को सर्वोच्च न्यायालय ने 10 साल पहले खारिज कर दिया था।

    क्या था मामला
    अरावली में अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी और सरकार ने परिभाषा दी थी कि किन पहाड़ियों को अरावली माना जाएगा। सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि जमीन के स्तर से 100 मीटर से ऊँचे हिस्से ही अरावली पहाड़ियाँ मानी जाएँ। इस परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अदालत ने भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) को निर्देश दिया था कि वह अदालत की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) और राजस्थान सरकार के सहयोग से राज्य में स्थित पूरी अरावली पर्वत श्रृंखला का सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर आकलन करे।

    अब कोर्ट का नया फैसला
    हाल में सर्वोच्च न्यायालय ने 100 मीटर वाली परिभाषा को मंजूरी दे दी है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा है कि नई खनन लीज़ (Mining Leases) नहीं दी जाएँगी, जब तक एक विस्तृत सतत खनन योजना (Management Plan for Sustainable Mining) तैयार नहीं हो जाती। पुराने वैध खनन जारी रह सकते हैं, लेकिन सख्त पर्यावरण मानकों के तहत।

    क्या है अरावली विवाद
    अरावली पर्वतमाला को लेकर इस समय विवाद इसलिए चल रहा है क्योंकि हरियाणा और राजस्थान में इसके बड़े हिस्से में खनन, रियल एस्टेट और निर्माण गतिविधियों की अनुमति देने या न देने पर टकराव है। पर्यावरणविदों का कहना है कि अरावली को वन क्षेत्र (Forest Land) का दर्जा मिलना चाहिए, क्योंकि यह दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने, भूजल रिचार्ज और मरुस्थलीकरण से बचाव में अहम भूमिका निभाती है। वहीं, राज्य सरकारें आर्थिक विकास के नाम पर खनन और परियोजनाओं को वैध करने की कोशिश कर रही हैं। इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट, पर्यावरण मंत्रालय और राज्य सरकारों के बीच कानूनी और नीतिगत बहस चल रही है, जिससे अरावली का भविष्य एक बड़ा पर्यावरणीय सवाल बना हुआ है।

    अगर नहीं करवाया ये काम तो रुक जाएगी किसान निधि योजना की क़िस्त, जानिए क्या करें

    PM Kisan Yojana:पीएम किसान निधि की 21 क़िस्त जारी कर दी गई है। 22 क़िस्त जारी होने वाली है। लेकिन अगर आपने ये काम नहीं किये तो शायद हो सकता है कि आप इससे बंचित रह सकते है। इसलिए पूरी खबर को ध्यान से पढ़ें।दरसल सरकार ने इस योजना के लिए नए नियम जारी किये है। जिसके तहत अब किसानो को इस योजना के लिए फॉर्मर आईडी जरुरी कर दी गई है। अब किसानो को इस योजना का लाभ उठाने के लिए आईडी बनानी होगी।

    इसलिए जरुरी है फॉर्मर आईडी

    सरकार का कहना है कि किसानो के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया गया है। जिससे बिना किसी बिचोलिये के इस योजना का लाभ सीधा किसानो तक पहुंच पायेगा।

    फॉर्मर आईडी इनके लिए जरुरी

    सरकार के मुताबिक 14 राज्यों में फार्मर ID जरूरी कर दी गई है। जिन राज्यों में किसान रजिस्ट्री अभी शुरू नहीं हुई है, वहाँ किसान बिना फार्मर ID के रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

    आईडी कैसे बनाएं? (Easy Guide)

    सरकार किसानों के लिए Farmer ID (AgriStack) बना रही है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सके। इसे बनाना अब बहुत आसान है।

    स्टेप 1: जरूरी दस्तावेज रखें तैयार

    सबसे पहले ये कागज अपने पास रखें –

    1. आधार कार्ड
    2. जमीन के कागजात (खतौनी / सर्वे नंबर)
    3. बैंक अकाउंट की जानकारी
    4. मोबाइल नंबर (आधार से लिंक)
    5. पासपोर्ट साइज फोटो

    स्टेप 2: ऑफिशियल पोर्टल पर जाएं

    अपने राज्य के AgriStack Farmer Registry पोर्टल पर जाएं।

    उदाहरण: उत्तर प्रदेश के किसान upfr.agristack.gov.in पर जाएं।

    चाहें तो PM-KISAN पोर्टल से भी प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

    स्टेप 3: रजिस्ट्रेशन / लॉग इन करें

    आधार नंबर डालें।
    मोबाइल पर आए OTP से लॉग इन करें।

    स्टेप 4: e-KYC पूरा करें

    आधार के जरिए पहचान सत्यापन (eKYC) करें।

    स्टेप 5: जरूरी जानकारी भरें

    व्यक्तिगत जानकारी
    जमीन का विवरण (सर्वे नंबर / खसरा)
    बैंक अकाउंट डिटेल

    स्टेप 6: सहमति और e-Sign करें

    सरकार की शर्तों पर सहमति दें।
    आधार से e-Sign करके फॉर्म सबमिट करें।

    स्टेप 7: Farmer ID प्राप्त करें

    आवेदन के बाद आपको Enrollment ID मिलेगी।
    स्टेटस चेक करने के बाद आपकी Farmer ID जारी हो जाएगी।

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