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    इन्दौर के भागीरथपुरा के बाद मौत मुहाने पर खड़े है जबलपुर के हाउसिंग बोर्ड के वासिंदे

    इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 मौतों की घटना के बाद जबलपुर में भी पेयजल सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है। शहर के कांचघर बीमा अस्पताल के पीछे स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में नागरिकों को जिस भूमिगत टैंक से पानी की आपूर्ति की जा रही है, उसकी स्थिति भयावह बनी हुई है।

    ब्रिटिशकालीन यह भूमिगत टैंक पिछले कई वर्षों से 24 घंटे खुला पड़ा है। टैंक के आसपास गंदगी, कचरा और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है, जिससे कीड़े-मकोड़े और अन्य जीव-जंतु सीधे पानी में गिर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले टैंक में कभी भी कोई कुत्ता, बिल्ली या अन्य जानवर गिर सकता है, जिससे पूरे इलाके में गंभीर जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा है।

    चार साल पहले गिर चुकी है बिल्ली, फिर भी नहीं जागा प्रशासन

    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले इसी टैंक में एक बिल्ली गिर गई थी, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो गया था। उस समय भी शिकायतें की गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। भूमिगत होने के कारण टैंक की नियमित सफाई भी नहीं हो पा रही है। वर्तमान में कई घरों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है, जिसे बिना छाने या उबाले पीना लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

    भूकंप से जर्जर टंकी के नीचे चल रहा पंप हाउस

    कॉलोनी की जल आपूर्ति के लिए बनी मुख्य पानी की टंकी लगभग 40 साल पुरानी है। वर्ष 1997 के भीषण भूकंप के बाद से यह टंकी जर्जर हालत में है। सुरक्षा कारणों से इसमें पानी भरना बंद कर दिया गया है, लेकिन इसके ठीक नीचे बना पंप हाउस आज भी संचालित है। नागरिकों का कहना है कि जर्जर टंकी को गिराने का प्रस्ताव पास हो चुका है, इसके बावजूद नगर निगम द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

    पांच हजार लोग मजबूर, पानी भी मिल रहा एक समय

    हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के करीब पांच हजार नागरिक इसी खुले और असुरक्षित टैंक से मिलने वाला पानी पीने को मजबूर हैं। पानी की आपूर्ति भी दिन में केवल एक बार की जा रही है। पंप हाउस कर्मचारियों का कहना है कि मोटर में पर्याप्त प्रेशर नहीं बन पा रहा है।

    नगर निगम का दावा, अमृत योजना का इंतजार

    इस पूरे मामले पर नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (जल) कमलेश श्रीवास्तव का कहना है कि टैंक की समय-समय पर सफाई कराई जाती है। उन्होंने बताया कि अमृत योजना 2.0 के तहत क्षेत्र में नई पानी की टंकी स्वीकृत की जा चुकी है और निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो गया है। नई टंकी के बन जाने के बाद ही जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार संभव होगा।

    सर्वे रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

    नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने दिसंबर 2025 में जारी केंद्रीय सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि जबलपुर में केवल 54.3 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर में सप्लाई हो रहा लगभग आधा पानी दूषित है। इसकी बड़ी वजह पिछले दो दशकों से नालियों के भीतर से गुजर रही पुरानी पाइपलाइनें हैं, जिनमें बार-बार लीकेज होने से पेयजल प्रदूषित हो रहा है। मंच ने महापौर और निगमायुक्त को पत्र लिखकर इन पाइपलाइनों को तत्काल हटाने की मांग की है।

    संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त का क्रिप्टिक पोस्ट, रिश्तों में ‘मौन को सजा’ बताकर दिया गहरा संदेश

    एक्टर संजय दत्त की बड़ी बेटी त्रिशाला दत्त एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। अमेरिका में मनोचिकित्सक के रूप में काम कर रहीं त्रिशाला ने हाल ही में एक क्रिप्टिक नोट साझा किया है, जिसमें उन्होंने रिश्तों में इमोशनल मैनिपुलेशन और ‘साइलेंट ट्रीटमेंट’ पर खुलकर बात की है।

    अपने पोस्ट में त्रिशाला ने बिना किसी का नाम लिए यह बताया कि कैसे कुछ लोग रिश्तों में बातचीत करने के बजाय चुप्पी को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने लिखा कि इस तरह का मौन सामने वाले को यह एहसास दिलाता है कि उसकी आवाज खतरनाक है और अगर वह बोलेगा तो रिश्ता टूट जाएगा।

    ‘सजा के रूप में मौन दुर्व्यवहार है’

    त्रिशाला दत्त ने साफ शब्दों में कहा कि किसी को दंड देने के लिए चुप रहना भावनात्मक दुर्व्यवहार की श्रेणी में आता है। उन्होंने लिखा,
    “जो रिश्ते सच्चे होते हैं, वे दर्द देकर सबक नहीं सिखाते, बल्कि बातचीत से गलतफहमियां दूर करते हैं।”

    उन्होंने ऐसे हालात से गुजर रहे लोगों को सलाह दी कि वे इस तरह के व्यवहार को स्वीकार न करें और अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें।

    हेल्दी साइलेंस और टॉक्सिक साइलेंस में फर्क बताया

    त्रिशाला ने अपने पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि हर तरह की चुप्पी गलत नहीं होती। उन्होंने हेल्दी साइलेंस और टॉक्सिक साइलेंस के बीच फर्क समझाया। उनके मुताबिक, अगर किसी को शांत होने के लिए समय चाहिए तो उसे पहले ही यह बात साफ तौर पर बता देनी चाहिए।

    उन्होंने लिखा,
    “खुद को संभालने के लिए कुछ घंटों की जरूरत होना ठीक है, ताकि कोई ऐसी बात न कही जाए जिससे सामने वाले को ठेस पहुंचे। लेकिन इसके बाद खुलकर बातचीत जरूरी है।”

    पोस्ट के अंत में दिया गहरा संदेश

    पोस्ट के अंत में त्रिशाला ने बेहद सशक्त लाइन लिखी—
    “जो मौन आपको शांति देता है, वह आत्मसम्मान है। लेकिन जो मौन किसी और को सजा देता है, वह सत्ता का खेल है।”

    हालांकि त्रिशाला ने अपने इस पोस्ट में किसी व्यक्ति या रिश्ते का नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर कयास लगाए जा रहे हैं कि यह इशारा उनके निजी जीवन या पारिवारिक संबंधों की ओर हो सकता है।

    फिलहाल, उनका यह पोस्ट रिश्तों में संवाद की अहमियत और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर संदेश देता नजर आ रहा है।

    अमेरिका पर बढ़ता कर्ज: ट्रंप की कोशिशें नाकाम, हर परिवार पर बढ़ा आर्थिक बोझ


    नई दिल्ली।
    दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहे जाने वाले अमेरिका पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। तमाम सख्त फैसलों और आर्थिक दबावों के बावजूद अमेरिका की फेडरल सरकार का कर्ज अब 38.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। बीते एक साल में ही इसमें 2.3 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, यानी औसतन हर दिन देश पर करीब 6.3 अरब डॉलर का अतिरिक्त कर्ज चढ़ा।

    आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा स्थिति में अमेरिका के हर परिवार पर औसतन 2 लाख 85 हजार डॉलर से ज्यादा का कर्ज आ चुका है। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो अनुमान है कि अगस्त तक यह कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को भी पार कर सकता है। खास बात यह है कि साल 2020 के बाद से अब तक अमेरिका का कुल कर्ज 15.3 ट्रिलियन डॉलर बढ़ चुका है, यानी हर साल औसतन 2.6 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हो रही है।

    कर्ज घटाने के लिए ट्रंप के सख्त फैसले

    देश का कर्ज कम करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई आक्रामक कदम उठाए। भारत समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए गए, ताकि आयात कम हो और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिले। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने बड़ी वैश्विक कंपनियों पर अमेरिका में निवेश का दबाव बनाया। इस सूची में ऐपल, एनवीडिया और माइक्रोन जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।

    इतना ही नहीं, चिप निर्माण से जुड़ी कंपनियों एनवीडिया और एएमडी को चीन में एक्सपोर्ट की अनुमति देने के बदले कमाई का 15 फीसदी हिस्सा अमेरिकी सरकार को देने की शर्त भी रखी गई। ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ट्रंप ने ‘ड्रिल बेबी ड्रिल’ जैसे नारे के साथ कच्चे तेल के उत्पादन को तेज करने पर जोर दिया।

    ब्याज भुगतान बना सबसे बड़ी चुनौती

    इसके बावजूद अमेरिका का कर्ज थमने का नाम नहीं ले रहा। पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन के अनुसार, साल 2024 में अमेरिकी सरकार ने केवल कर्ज के ब्याज के भुगतान पर 880 अरब डॉलर खर्च किए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। अनुमान है कि चालू साल में यह राशि 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

    अमेरिका में करीब 12.8 करोड़ परिवार हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो हर परिवार को हर महीने औसतन 650 डॉलर सिर्फ कर्ज के ब्याज के रूप में चुकाने पड़ रहे हैं। यही कारण है कि अमेरिका की आर्थिक नीति अब सिर्फ घरेलू सुधारों तक सीमित नहीं रह गई है।

    दूसरे देशों के संसाधनों पर नजर

    बढ़ते कर्ज और भारी ब्याज बोझ के चलते ट्रंप प्रशासन की नजर अब दूसरे देशों के संसाधनों और बाजारों पर टिकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका की व्यापार और विदेश नीति और ज्यादा सख्त हो सकती है, ताकि किसी भी तरह से बढ़ते कर्ज पर लगाम लगाई जा सके।

     

    MP Weather Today: सुबह घना कोहरा, दिनभर सर्दी का कहर, MP में जनजीवन प्रभावित


    मध्य प्रदेश इस समय भीषण ठंड, घने कोहरे और शीतलहर की दोहरी मार झेल रहा है। रविवार से शुरू हुआ घना कोहरा सोमवार को और ज्यादा गहरा हो गया, जिससे प्रदेश के बड़े हिस्से में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राजधानी भोपाल में इस सीजन का अब तक का सबसे घना कोहरा दर्ज किया गया, जहां दृश्यता 20 मीटर से भी कम रह गई।

    रविवार को दिनभर कोहरा छाया रहा, जबकि सोमवार सुबह हालात और खराब हो गए। भोपाल समेत कई जिलों में सड़कें धुंध में गुम रहीं और सुबह की रफ्तार लगभग थम सी गई। वाहनों की धीमी गति के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही।

    कोल्ड वेव का कहर, कई जिलों में अलर्ट

    ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड अंचल में शीतलहर का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, उमरिया और राजगढ़ जैसे जिलों में ठंड ने लोगों को घरों में कैद कर दिया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक ऐसे ही हालात बने रह सकते हैं।

    सोमवार सुबह भोपाल के साथ-साथ इंदौर, उज्जैन, देवास, सीहोर, रायसेन, विदिशा, सागर, दमोह, ग्वालियर, मुरैना, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली और कटनी सहित 30 से अधिक जिलों में घना कोहरा छाया रहा। वहीं, दिन के समय राजगढ़, दतिया, छतरपुर और उमरिया में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है।

    ठंड का असर स्कूलों तक पहुंचा

    तेज ठंड और घने कोहरे को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। प्रदेश के 13 जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। इसके अलावा भोपाल और धार में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। भोपाल जिले में नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के सभी स्कूल सुबह 9:30 बजे के बाद संचालित किए जा रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश शासकीय, अशासकीय, CBSE, ICSE और अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों पर लागू होगा।

    10 डिग्री से नीचे पहुंचा तापमान

    मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार और रविवार की रात प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। राजगढ़ और दतिया में पारा करीब 5 डिग्री तक लुढ़क गया, जबकि पचमढ़ी में 6.4 और शिवपुरी में 7 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    प्रदेश के पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 10.8, इंदौर में 11.8, उज्जैन में 11.4 और जबलपुर में 11 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

    ये भी पढ़े :सरकारी आदेश में मंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी, लेटर वायरल होते ही देवास SDM निलंबित; जानिए पूरा मामला

    सरकारी आदेश में मंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी, लेटर वायरल होते ही देवास SDM निलंबित; जानिए पूरा मामला

    MP NEWS: मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब देवास के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) आनंद मालवीय द्वारा जारी एक सरकारी आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस आदेश में न सिर्फ सरकार विरोधी आरोप लगाए गए, बल्कि कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर आपत्तिजनक टिप्पणी भी दर्ज थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने SDM आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

    कैसे सामने आया मामला

    दरअसल, 3 जनवरी 2026 को देवास SDM कार्यालय से आदेश क्रमांक 44/रीडर-1/2026 जारी किया गया था। यह आदेश कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित एक प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी तय करने से संबंधित था।लेकिन इस सरकारी आदेश की भाषा ने प्रशासनिक हलकों को चौंका दिया।आदेश में दावा किया गया कि इंदौर नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए कथित गंदे पानी से 14 लोगों की मौत हुई है और करीब 2800 लोग इलाजरत हैं। इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा पत्रकार के सवाल पर दिए गए ‘घंटा’ शब्द को अमानवीय और निरंकुश करार दिया गया।इतना ही नहीं, आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर भाजपा सांसदों और विधायकों के घरों के सामने ‘घंटा’ बजाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

    आदेश की भाषा पर उठे सवाल

    आमतौर पर प्रशासनिक आदेशों में केवल प्रदर्शन की सूचना, स्थान और अधिकारियों की ड्यूटी का उल्लेख किया जाता है। लेकिन इस आदेश में प्रदर्शनकारी दल की भाषा, आरोप और आंकड़े भी शामिल कर दिए गए, जो किसी राजनीतिक ज्ञापन या प्रेस नोट जैसे प्रतीत हुए।यही वजह रही कि इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना गया।

    प्रशासन ने क्यों की सख्त कार्रवाई

    जैसे ही यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, देवास कलेक्टर ने 4 जनवरी 2026 को पत्र क्रमांक 23 के माध्यम से उज्जैन संभाग आयुक्त को पूरी रिपोर्ट भेजी। इसके बाद संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने उसी दिन निलंबन आदेश क्रमांक 41/स्था-दो/2026 जारी कर SDM आनंद मालवीय को निलंबित कर दिया।

    निलंबन आदेश में कहा गया कि बिना तथ्यात्मक जांच के संवेदनशील विषय पर गलत आंकड़ों और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। यह आचरण पद के अनुरूप नहीं है और मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है।

    नौकरशाही में मचा हड़कंप

    इस घटना के बाद राज्य की नौकरशाही में हड़कंप मच गया है। मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि सरकारी दस्तावेजों में राजनीतिक भाषा और आरोपों का इस्तेमाल कितनी बड़ी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
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    Supreme Court on Delhi Riots: उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं, पांच अन्य आरोपियों को राहत

    Supreme Court on Delhi Riots: सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में आरोपी बनाए गए उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि किसी आरोपी का लंबे समय तक जेल में बंद रहना, अपने आप में जमानत का आधार नहीं हो सकता। हालांकि, इसी मामले में अदालत ने पांच अन्य आरोपियों को जमानत देते हुए राहत दी है।

    सुप्रीम कोर्ट में आज उमर खालिद, शरजील इमाम समेत अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। फैसले में कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी को जमानत पाने का “ट्रंप कार्ड” नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि ऐसा करने से कानून में दिए गए सुरक्षा प्रावधान कमजोर पड़ सकते हैं।

    उमर और शरजील की स्थिति अन्य आरोपियों से अलग

    दो जजों की पीठ ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका इस मामले के अन्य आरोपियों से अलग है। अदालत के मुताबिक, दोनों के खिलाफ यूएपीए (UAPA) के तहत शुरुआती तौर पर गंभीर आरोप बनते हैं, इसलिए इस स्तर पर उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा।

    पांच आरोपियों को मिली जमानत

    उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले के अन्य आरोपियों — गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को जमानत दे दी। कोर्ट ने माना कि इन आरोपियों की स्थिति अलग है और उन्हें राहत दी जा सकती है।

    दो जजों की पीठ की टिप्पणी

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं और यूएपीए कानून के तहत तय शर्तें पूरी होती हैं। ऐसे में केवल ट्रायल में हो रही देरी को फिलहाल जमानत का मजबूत आधार नहीं माना जा सकता।

    भविष्य में फिर से जमानत की गुंजाइश

    हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि यदि गवाहों की जांच पूरी हो जाती है या वर्तमान आदेश की तारीख से एक वर्ष पूरा हो जाता है, तो उमर खालिद और शरजील इमाम दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    10 दिसंबर को सुरक्षित रखा गया था फैसला

    गौरतलब है कि 10 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने दोनों पक्षों को 18 दिसंबर तक अपनी दलीलों के समर्थन में सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के निर्देश भी दिए थे।

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    Ankita bhandari murder case update:
    मुख्यमंत्री निवास के बाहर लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों की भारी भीड़ जमा है, जिसमें ज़्यादातर चेहरे युवाओं और महिलाओं के हैं। मांग सिर्फ़ इंसाफ की है। यह तस्वीर इन दिनों उत्तराखंड के मुख्यमंत्री निवास के बाहर हो रहे प्रदर्शन की है। प्रदर्शनकारियों की एक ही मांग है कि अंकिता को इंसाफ मिले। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लगभग तीन साल होने लगे हैं, लेकिन अब तक इंसाफ नहीं मिल पाया है। हाल ही में इस केस में एक नया मोड़ आया है। कहा जा रहा है कि इसमें VVIP भी शामिल है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो, ऑडियो और चिट्ठियों के बाद कई लोग CBI जांच की मांग कर रहे हैं। हालात यह हैं कि लोग मुख्यमंत्री निवास के बाहर डटे हुए हैं और इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं।

    सोशल मीडिया में वायरल वीडियो से आया नया मोड़

    उर्मिला सनावर नाम की एक महिला, जो खुद को एक पूर्व राजनेता से जुड़ा बता रही हैं, ने सोशल मीडिया पर एक या उससे अधिक वीडियो और ऑडियो क्लिप साझा की हैं। इनमें उन्होंने दावा किया कि हत्या के पीछे सिर्फ़ रिसॉर्ट मालिक या उसके कर्मचारी ही नहीं थे, बल्कि एक “गुप्त VIP”, जिसे उन्होंने “गट्टूनाम से बताया, भी इसमें शामिल था, जिसके तार राजनीति से जुड़े बताए गए हैं। वीडियो और ऑडियो में यह भी कहा गया कि सच्चाई को दबाया गया, यानी केस को सीमित रखा गया। यह आरोप भी लगाए गए कि अगर आरोपी सिर्फ़ तीन ही होते, तो VIP का नाम सामने लाया जाता। कुछ दावों में यह भी कहा गया कि अदालत और स्थानीय अधिकारियों ने सबूत छुपाने या नष्ट करने की कोशिश की, ताकि VIP एंगल सामने न आ सके। इसके बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई।

    क्या था मामला
    अंकिता भंडारी 19 वर्षीय उत्तराखंड की रहने वाली युवती थी, जो अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। 18 सितंबर 2022 को वह काम के बाद लापता हो गई थी, जिसके बाद 24 सितंबर 2022 को उसका शव चिल्ला नहर में बरामद हुआ। पुलिस जांच में सामने आया कि रिज़ॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, उसके मैनेजर सौरभ भास्कर और सहायक मैनेजर अंकित गुप्ता ने अंकिता पर “विशेष सेवाएं” देने का दबाव बनाया और उसके इनकार करने पर उसकी हत्या कर दी, फिर शव को नहर में फेंक दिया। शुरुआती तहकीकात और पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट के अनुसार अंकिता को धक्का देकर नहर में गिराया गया, जिससे उसकी मौत डूबने से हुई। इस जघन्य हत्याकांड में कोटद्वार की अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई।

    VVIP एंगल पर पुलिस का बयान
    उत्तराखंड पुलिस ने साफ़ कहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में किसी भी प्रकार का “वीआईपी” शामिल नहीं मिला है। जांच के दौरान जिस व्यक्ति का नाम चैट्स और बयान में आया, वह अंकिता का जानकार (धर्मेंद्र कुमार अलियास प्रधान) था, जो नोएडा का रहता है और सिर्फ़ काम से उस इलाक़े में आया था। उसके अलावा कोई उच्च प्रभावशाली या VIP व्यक्ति इस मामले में नहीं पाया गया। पुलिस ने कहा कि रिसॉर्ट के रिकार्ड और स्टाफ़ से पूछताछ में भी यह बात पुष्टि हो गई है कि कोई वीआईपी वहां नहीं आया था।
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    सोनम रघुवंशी कांड .. पर नया ड्रामा .. पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर शिक्षक पति की करवाई हत्या…


    श्योपुर जिले के कराहल क्षेत्र से एक सनसनीखेज हत्या का खुलासा हुआ है। यहां एक महिला ने अपने प्रेमी और उसके साथी के साथ मिलकर अपने ही पति की फिल्मी अंदाज में हत्या कर दी और मामले को सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। गुरुवार शाम पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का पर्दाफाश किया।

    नौनपुरा घाटी में मिला था शिक्षक का शव

    कराहल के नाई मोहल्ला निवासी 49 वर्षीय शिक्षक रमाकांत पाठक का शव बीते शनिवार को नौनपुरा घाटी में संदिग्ध हालत में मिला था। मृतक चकरामपुरा शासकीय विद्यालय में शिक्षक के पद पर पदस्थ थे।

    जानकारी के अनुसार, 26 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे रमाकांत पाठक घर से निकले थे। उन्होंने पत्नी को बताया था कि वे कराहल से करीब 9 किलोमीटर दूर सेसईपुरा किसी काम से जा रहे हैं और जल्द लौट आएंगे। लेकिन देर शाम तक जब वे घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की।

    परिजनों की मांग पर हुई फॉरेंसिक जांच

    अगले दिन 27 दिसंबर को पुलिस को सूचना मिली कि कराहल से लगभग 7 किलोमीटर दूर नौनपुरा घाटी में एक शव पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की पहचान रमाकांत पाठक के रूप में की।
    शव मिलने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए फॉरेंसिक टीम बुलाने की मांग की। मुरैना से पहुंची फॉरेंसिक टीम ने करीब 5–6 घंटे तक घटनास्थल की जांच की और जल्द खुलासे का भरोसा दिलाया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर शव का अंतिम संस्कार किया गया।

    पत्नी ही निकली हत्या की साजिशकर्ता

    जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को चौंकाने वाले सबूत मिले। खुलासे में सामने आया कि शिक्षक की पत्नी साधना पाठक ने अपने प्रेमी मनीष जाटव और उसके दोस्त सतनाम सिंह के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची थी।

    मनीष जाटव पेट्रोल पंप पर काम करता था, जबकि सतनाम सिंह पुलिस की गाड़ी चलाने का काम करता था। तीनों ने मिलकर पहले से पूरी योजना बनाई थी।

    ऐसे दिया वारदात को अंजाम

    एसडीओपी प्रवीण कुमार अष्ठाना ने बताया कि यह हत्या एक-दो महीने की प्लानिंग के बाद की गई। 26 दिसंबर को मनीष ने सतनाम को कराहल बुलाया। सतनाम अपनी कार से पहुंचा और दोनों ने रमाकांत को किसी महिला से संपर्क कराने के बहाने सेसईपुरा की ओर ले गए।

    नौनपुरा घाटी में टॉयलेट करने का बहाना बनाकर कार रोकी गई। तभी पीछे से मनीष ने शिक्षक के सिर पर वार कर दिया। इसके बाद दोनों आरोपियों ने शिक्षक को घसीटकर नीचे ले जाकर उसका मुंह दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

    हादसे का रूप देने की कोशिश

    हत्या के बाद आरोपियों ने शव को घाटी में छोड़ दिया और शिक्षक की बाइक को कराहल से लाकर घटनास्थल पर पटक दिया, ताकि यह सड़क दुर्घटना लगे। मृतक का टोपा आरोपियों की कार में रह गया था, जिसे बाद में जला दिया गया।

    तीनों आरोपी गिरफ्तार, कार जब्त

    पुलिस पूछताछ में तीनों आरोपियों ने अपराध कबूल कर लिया है। हत्या में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त कर लिया गया है, जो सतनाम के साले के नाम पर पंजीकृत है। पुलिस ने साधना पाठक, मनीष जाटव और सतनाम सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेजा जा रहा है।

    दिल्ली-NCR की हवा में राहत, CAQM ने GRAP-3 के प्रतिबंध हटाए, स्टेज-1 और 2 रहेंगे लागू


    Delhi air pollution:
    दिल्ली-एनसीआर के लोगों को वायु प्रदूषण से कुछ राहत मिली है। राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है। मंगलवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 380 से घटकर 236 तक पहुंच गया, जो प्रदूषण स्तर में उल्लेखनीय गिरावट को दर्शाता है। इसी को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की GRAP उप-समिति ने बड़ा फैसला लेते हुए GRAP के स्टेज-3 के तहत लागू सभी प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

    हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण पर नजर बनाए रखने के लिए GRAP के स्टेज-1 और स्टेज-2 के तहत लागू सभी पाबंदियां पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में जारी रहेंगी। अधिकारियों के अनुसार, मौसम की अनुकूल परिस्थितियों और प्रदूषण के स्तर में आई कमी के चलते यह निर्णय लिया गया है।

    CAQM ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता दोबारा खराब होती है, तो स्थिति के अनुसार सख्त कदम फिर से लागू किए जा सकते हैं।

    GRAP-3 के तहत हटाए गए प्रमुख प्रतिबंध

    • गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर लगी रोक हटाई गई।

    • खनन, पत्थर तोड़ने और क्रशर यूनिट्स पर लगाया गया प्रतिबंध समाप्त।

    • NCR में डीज़ल जनरेटर सेट के उपयोग पर रोक हटाई गई (आपात सेवाओं को पहले ही छूट थी)।

    • बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-IV डीजल चारपहिया वाहनों की आवाजाही पर लगी रोक समाप्त।

    • सड़कों पर अतिरिक्त मशीन स्वीपिंग और पानी के छिड़काव की अनिवार्यता खत्म की गई।

    GRAP-1 और GRAP-2 के तहत ये पाबंदियां रहेंगी जारी

    • सड़कों पर नियमित मैकेनिकल स्वीपिंग और पानी का छिड़काव।

    • कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक।

    • खुले में निर्माण सामग्री रखने पर सख्ती।

    • होटल और रेस्तरां में कोयला व लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध।

    • ट्रैफिक जाम कम करने के लिए ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त तैनाती।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हवा की गुणवत्ता में यह सुधार अस्थायी भी हो सकता है, इसलिए नागरिकों और प्रशासन दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। CAQM ने लोगों से अपील की है कि वे प्रदूषण कम करने में सहयोग करें और नियमों का पालन सुनिश्चित करें, ताकि यह राहत लंबे समय तक बनी रह सके।

    इस्लामी संगठन से संबंध की जांच: हेलमेट पर फलस्तीनी झंडा लगाने वाले कश्मीरी क्रिकेटर पर पुलिस की नजर


    जम्मू में आयोजित एक स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब कश्मीर के एक खिलाड़ी ने मैच के दौरान अपने हेलमेट पर फलस्तीनी झंडे का स्टीकर लगाया। मैदान पर मौजूद अन्य खिलाड़ियों ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद मामला तनावपूर्ण हो गया और अंततः पुलिस तक पहुंच गया।

    यह घटना जम्मू एंड कश्मीर चैंपियंस लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के एक मुकाबले के दौरान सामने आई। यह टूर्नामेंट कश्मीर के एक क्लब की ओर से आयोजित किया गया था और इसका प्रायोजन भी एक कश्मीरी सीमेंट कंपनी द्वारा किया जा रहा था। बुधवार शाम खेले गए मुकाबले में जेके इलेवन किंग्स और जम्मू ट्रेल ब्लेजर्स की टीमें आमने-सामने थीं।

    बल्लेबाजी के दौरान सामने आया मामला

    मैच के दौरान जेके इलेवन किंग्स के खिलाड़ी फरकान भट्ट जब बल्लेबाजी करने उतरे, तो उनके हेलमेट पर फलस्तीनी झंडे का स्टीकर लगा हुआ था। जैसे ही यह बात अन्य खिलाड़ियों और आयोजकों की नजर में आई, उन्होंने इस पर कड़ा एतराज जताया। इसके बाद मैच को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा और मैदान का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए टीम प्रबंधन ने तत्काल कदम उठाते हुए संबंधित खिलाड़ी को टीम से बाहर कर दिया। इसके साथ ही इस घटना की सूचना पुलिस को दी गई।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    मामले की गंभीरता को देखते हुए फरकान भट्ट और टूर्नामेंट के आयोजक जावेद भट्ट को जम्मू के दोमाना पुलिस स्टेशन बुलाकर पूछताछ की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह जानने की कोशिश की जा रही है कि खिलाड़ी ने ऐसा कदम क्यों उठाया और इसके पीछे उसकी मंशा क्या थी।

    पुलिस ने इस मामले में औपचारिक जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित खिलाड़ी का किसी इस्लामी संगठन से कोई संपर्क तो नहीं है या वह किसी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित तो नहीं है।

    आयोजन और खेल में राजनीति पर सवाल

    इस घटना के बाद खेल के मैदान में राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय खेल संगठनों का कहना है कि खेल को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, ताकि ऐसे विवादों से बचा जा सके।

    फिलहाल पुलिस जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत कृत्य था या इसके पीछे कोई अन्य कारण मौजूद है।