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    रूस तेल आयात पर सस्पेंस: क्या भारत संतुलन बना रहा है या बढ़ रहा है अमेरिका का दबाव?

    क्या भारत सरकार धीरे-धीरे करके रूस से तेल आयात करना बंद कर रही है? तो क्या डोनाल्ड ट्रम्प आखिरकार कामयाब हुए? ऐसे में यही कहा जा सकता है कि अमेरिका भारत पर दबाव बनाने में कामयाब हो रहा है और अमेरिका के मंसूबे पूरे हो रहे हैं। ये सब आशंका है लेकिन वर्तमान जो स्थिति बनी हुई है उसे देखकर तो ऐसा लगना लाजिमी हो जाता है। क्यों? वो इसलिए क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प ने कुछ दिन पहले कहा था कि भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा और रूस से तेल खरीदना बंद करेगा।

    अमेरिकी बयान, विपक्ष की प्रतिक्रिया और डील पर सियासत

    अमेरिका के राष्ट्रपति के बयान के बाद राहुल गांधी ने भी मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि ये डील होगी और मोदी जी उनकी बात मानेंगे। जब डील हुई तो विपक्ष इसको लेकर सरकार पर निशाना साधने लगा। हालाँकि डील में रूस से तेल आयात पर रोक की खबर अब नहीं आई है और ना ही डील में ऐसी कोई बात हुई है। लेकिन पैटर्न है जिसके कारण ऐसा लग रहा है।

    आंकड़े क्या बताते हैं? रूस से तेल आयात में गिरावट का ट्रेंड

    पिछले 37 महीनों में रूस से तेल आयात घटा है। दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से 2.7 अरब डॉलर का तेल आयात किया जो कि फरवरी के बाद से किसी भी महीने में सबसे कम है। आंकड़ों के मुताबिक भारत ने रूस से नवंबर के महीने में 3.7 अरब डॉलर का और 2024 दिसंबर में 3.2 अरब डॉलर का आयात हुआ था। अगर अब इन आंकड़ों को देखें तो ऐसा ही लगता जैसे भारत पर दबाव का असर दिख रहा है।

    रूस और भारत की आधिकारिक स्थिति क्या है?

    हालाँकि ये स्पष्ट करना बेहद जरूरी है कि रूस की ओर से ये कहा गया था कि उन्हें भारत की तरफ से तेल आयात पर रोक की कोई जानकारी नहीं आई है। और ना ही अभी तक भारत की ओर से ऐसी कोई घोषणा की गई है। कुछ लोग ये भी बोल रहे हैं कि ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं।

    ऊर्जा नीति में संतुलन और भविष्य की संभावनाएँ

    भारत इस समय संतुलन की नीति अपना रहा है और अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाकर किसी एक देश पर निर्भरता कम करना चाहता है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करना और अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत रखना है। साथ ही यह भी संभव है कि आने वाले कुछ महीनों में हालात और कीमतों के हिसाब से रूस से तेल आयात में फिर से वृद्धि देखने को मिले।

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