
mp news: उज्जैन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। टॉवर चौक पर सवर्ण समाज और छात्रों ने सड़कों पर उतरकर इस कानून को “काला और विभाजनकारी” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की।
समाज के नेताओं की आपत्ति
प्रदर्शन के दौरान पं. सुरेंद्र चतुर्वेदी (अ.भा. ब्राह्मण समाज अध्यक्ष) और पं. महेश शर्मा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अ.भा. पुजारी महासंघ) ने UGC नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि समानता के नाम पर लाया गया कोई भी कानून यदि असमानता का भय पैदा करता है, तो उस पर पुनर्विचार आवश्यक है। 21वीं सदी जातिवाद के अंत का समय है और हिंदू समाज की एकता बनाए रखना जरूरी है।
टॉवर चौक पर नारेबाजी
टॉवर चौक पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। “काला कानून वापस लो” के नारे लगाए गए। बटुकों और समाज के सदस्यों ने तख्तियां व बैनर लेकर UGC के नए कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया।
छात्रों का उग्र विरोध
छात्रों ने हाथों में पोस्टर लेकर धरना दिया और “UGC रोल बैक” के नारे लगाए। उन्होंने नए बिल को ‘विभाजनकारी’ बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा का निजीकरण और छात्रों के बीच बंटवारा बढ़ेगा। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि बिल जल्द वापस नहीं लिया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
क्या है UGC का नया रेगुलेशन?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 15 जनवरी 2026 से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू किए हैं। इसका उद्देश्य कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकना और सभी वर्गों के लिए सुरक्षित व सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना बताया गया है।
नए कानून में क्या बदला?
पहले जातिगत भेदभाव की शिकायतें मुख्य रूप से एससी-एसटी तक सीमित मानी जाती थीं। नए नियमों में ओबीसी वर्ग को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अब ओबीसी छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत आधिकारिक तौर पर दर्ज करा सकेंगे। यही प्रावधान विरोध का मुख्य कारण बन गया है।

