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    नोएडा में इंजीनियर की मौत पर सख्त कार्रवाई, दो और बिल्डर गिरफ्तार; दफ्तर व कॉर्पोरेट ऑफिस सील

    नोएडा में इंजीनियर की मौत के मामले में पुलिस और प्रशासन का एक्शन लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी से जुड़े दो और निदेशकों को गिरफ्तार किया गया, जबकि संबंधित बिल्डर कंपनियों के दफ्तर और कॉर्पोरेट कार्यालयों को सील कर दिया गया है। इस मामले में अब तक तीन बिल्डरों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

    दफ्तरों पर पुलिस की कार्रवाई

    पुलिस टीम ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-62 स्थित टॉवर-ए की सातवीं मंजिल पर संचालित बेस्टटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय को सीज किया। इसके अलावा सह-आरोपी बिल्डर निर्मल सिंह से जुड़े सेक्टर-126 नोएडा स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई। इस दौरान पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे तथा किसी भी अव्यवस्था से बचने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया।

    नियमों के उल्लंघन का आरोप

    जांच में सामने आया कि संबंधित कार्यालयों में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था। आरोपियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद प्रशासन ने नोटिस जारी कर परिसर को सीज करने के आदेश दिए। पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के लिए कंपनी से जुड़े अहम रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। अचानक हुई कार्रवाई से आसपास मौजूद लोगों और अन्य कंपनियों के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।

    लोटस ग्रीन के दो निदेशक गिरफ्तार

    पुलिस ने लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी के दो निदेशकों रवि बंसल (फरीदाबाद, हरियाणा) और सचिन करनवाल (गाजियाबाद) को गिरफ्तार किया है। दोनों को सूरजपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को तय की गई है। इससे पहले एमजेड विश टाउन कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

    जमीन सौदे और हिस्सेदारी की जांच

    पुलिस जांच में पता चला है कि संबंधित भूखंड वर्ष 2014 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने खरीदा था, जिसे बाद में वर्ष 2020 में एमजेड विश टाउन ने अधिग्रहित किया। इसके बावजूद लोटस ग्रीन की हिस्सेदारी अब भी बनी हुई है। शेयर होल्डिंग और निवेश से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    क्या है पूरा मामला

    यह मामला एटीएस ले ग्रैंडियोस सोसाइटी के पास उस समय सामने आया, जब तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर नाले की दीवार तोड़ते हुए पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी। हादसे में कार सवार इंजीनियर की मौत हो गई। पुलिस, दमकल और राहत एजेंसियों ने कई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर युवक को मृत घोषित कर दिया गया।

    पुलिस ने मृतक के परिजन की शिकायत पर बिल्डर कंपनियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की जाएगी।

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