
नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” साइबर फ्रॉड को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों गंभीर हो गए हैं। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) का गठन किया है, जो इस पूरे फर्जीवाड़े के हर पहलू की जांच करेगी।
क्या है डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड
डिजिटल अरेस्ट में साइबर ठग खुद को पुलिस, CBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल या वीडियो कॉल करते हैं। वे डराकर कहते हैं कि व्यक्ति किसी केस में फंस चुका है और उसे “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” किया गया है। भयभीत लोग अपनी जमा-पूंजी ठगों को सौंप देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पहले ही CBI को जांच के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा था कि इस समस्या से निपटने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इसी के जवाब में सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है।
कमेटी में कौन-कौन शामिल
इस हाई-लेवल कमेटी की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) कर रहे हैं। इसमें शामिल हैं—
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IT मंत्रालय (MeitY)
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टेलीकॉम विभाग (DoT)
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विदेश मंत्रालय
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वित्तीय सेवा विभाग
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RBI
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CBI, NIA
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दिल्ली पुलिस
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I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर)
कमेटी का काम कानूनों की खामियां पहचानना, सुधार सुझाना और कोर्ट के निर्देशों पर अमल सुनिश्चित करना है।
टेक कंपनियों से भी चर्चा
जनवरी 2026 में सरकार ने Google, WhatsApp, Telegram और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ भी बैठक की। इसमें साइबर ठगी रोकने के तकनीकी उपायों पर चर्चा हुई।
सरकार ने मांगा एक महीना
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से एक महीने का और समय मांगा है, ताकि सभी विभागों से सुझाव लेकर एक ठोस और संयुक्त रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी जा सके।
इस पूरी कवायद से साफ है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर अपराधों पर अब सरकार और न्यायपालिका मिलकर कड़ा शिकंजा कसने की तैयारी में हैं।

