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    चुनावी वादों का बोझ: राजनीतिक घोषणाओं से राज्यों की माली हालत चरमराई

    विकास पर लगता विराम…वादो पर कब लगेगा लगाम

    चुनावी मौसम में की गई लोकलुभावन घोषणाएं अब राज्यों के लिए गंभीर आर्थिक चुनौती बनती जा रही हैं। लगभग हर राज्य इस दबाव से जूझ रहा है, जहां राजनीतिक मजबूरियों में किए गए वादों को पूरा करना सरकारों के लिए लगातार कठिन होता जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हालिया बयान ने इस सच्चाई को खुलकर सामने रखा है।

    राजधानी भोपाल में शनिवार को आयोजित शहरी विकास पर क्षेत्रीय बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि राजनीतिक दबाव में की गई घोषणाओं ने राज्यों की वित्तीय स्थिति को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के लिए आवश्यक संसाधन जुटाना अब राज्यों के बूते से बाहर होता जा रहा है।

    मंत्री ने स्पष्ट किया कि शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं को गति देने के लिए केंद्र सरकार की मदद अब अपरिहार्य हो गई है। अमृत योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी अहम परियोजनाएं अक्सर बजट की कमी के कारण अटक जाती हैं, जिससे योजनाओं का लाभ आम लोगों तक समय पर नहीं पहुंच पाता।

    उन्होंने यह भी माना कि राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के चलते राज्यों पर खर्च का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जबकि आय के स्रोत सीमित हैं। ऐसे हालात में राज्यों की उम्मीदें केंद्र सरकार पर टिकी हुई हैं, ताकि शहरी विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके।

    इस अहम बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के साथ शहरी विकास की चुनौतियों से निपटने पर भी चर्चा हुई।

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